ओम शर्व करनाय नमः ओम विघ्न हय नमः अब तो आप सबको प्रभु श्री गणेश जी के अनुपम रूप का उचित परिचय प्राप्त हो गया तो अब मेरे साथ कहिए ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः बस बस बालक बस तुम कहते हो कि परम ब्रह्म है वो जिनके ऊपर संपूर्ण संसार का भार है तो क्या उनके पास इतना समय है कि तुम्हारे जैसे तुच्छ कीर की प्रार्थना सुनकर तुम्हारी पुकार सुनकर तुम्हारी रक्षा करने के लिए आएगा हां वह अवश्य सुनेंगे मेरी पुकार उनसे किसी का भेद नहीं छिपा चाहे वो देवलोक वासी हो या साधारण धरती वासी जीव बड़ा हो या छोटा सब उनके लिए समान है इसलिए वो मेरी भी पुकार सुनेंगे [संगीत] जैसे उन्होंने एक मेंढक दंपति की सुनी थी और प्रभु का नाम लेने मात्र से उन दोनों का उद्धार भी हुआ बालक मेंडक मेंढकी की कथाएं तुम जैसे बालक को ही सुहाती है हमारे पास इस सब का समय नहीं है सुरा पद्मन नहीं असुर माता यह मात्र कथा नहीं प्रभु श्री गणेश जी की लीला है जो सभी जीवों को आस देती है माता अपनी अंतिम इच्छा पूर्ण कर लेने दीजिए इसे धन्यवाद एक बार एक मेंढक दंपति एक कुए के मुंडेर पर बैठे थे मेंढकी प्रभु श्री गणेश जी के नाम का उच्चारण कर रही थी ओम गणपते नम ओम गणपते नम किंतु उसके पति को यह नहीं भाया क्योंकि उसके अनुसार एक पत्नी की निष्ठा मात्र उसके पति के लिए ही होनी चाहिए तो पति के टोकने पर मेंढकी ने प्रभु का नाम लेना रोक दिया किंतु जैसे ही मेंढकी ने प्रभु का नाम लेना छोड़ा आंधी और वर्षा होने लगी आकाश से विद्युतीय तरंग कुए के मुंडेर पर गिरी और वो दोनों कुए में गिर गए वर्षा निरंतर होती रही फिसलन के कारण वो दोनों ऊपर भी नहीं चढ़ पा रहे थे और दूसरी ओर एक जलसर उन्हें निगलने की ताक में था उनका जीवन संकट में था मेंढक तो बचने की आशा छोड़ चुका था किंतु मेंढकी को अभी भी अपने प्रभु श्री गणेश जी से आस थी और तब उसने मेंढक से अनुमति मांगते हुए कहा स्वामी मुझे प्रभु श्री गणेश जी का नाम लेने दीजिए लाचार मेंढक ने मेंढकी का निवेदन स्वीकार कर लिया और मेंढकी प्रभु के नाम का जाप करने [संगीत] लगी और उधर उस सर्फ ने भी अपना मुंह खोलकर वार किया और तब जैसे ही सर्प उनके निकट पहुंचा कुए में कुछ गिरा मेंढक ने तो भयभीत होकर अपने बंद कर दिए किंतु मेंढकी को अपने प्रभु पर इतना अटूट विश्वास था कि उसे लगा कि वो प्रभु श्री गणेश जी की सुन है और जब मेंढक ने अपने नेत्र खोले और पाया कि वह एक जल के पात्र में है सुरक्षित है मेंढकी ने कहा प्रभु दयानी धान श्री गणेश जी ने उनकी रक्षा की किंतु मेंढक को तो प्रभु पर विश्वास नहीं था तो वह बोला यह तो एक मात्र सहयोग है वास्तव में हमारी रक्षा तो इस व्यक्ति ने की है जिसने इस पात्र को जल में डाला और हम दोनों को बाहर निकाला इसलिए तुम्हारे गणेश जी में विश्वास व्यर्थ है तो अब यदि तुमने अपने पति की अवज्ञा की तो तुम अपने पति का अपमान करने का अर्धन करोगी उसके पति की बात सुनकर मेंढकी सहम गई और शांत हो गई किंतु जिस जल में वो थे वो खोलते हुए उस जल के पात्र में डाल दिया गया इस नए संकट से गिरने पर वो उससे निकलने का कोई प्रयास करते उससे पहले उस पात्र को ढक दिया गया अब तो बचाव का कोई मार्ग ही नहीं था तो मेंढक ने उस पर कटाक्ष करते हुए कहा तुम्हारे आस के आधार प्रभु श्री गणेश जी कहां है तो मेंढकी ने उत्तर दिया आपने मुझे प्रभु श्री गणेश जी का विचार करने से या नाम लेने से रोक दिया है स्वामी तो मैं उनका का स्मरण कैसे करूं जीवन और मृत्यु के बीच अधर में लटके मेंढक को और कुछ ना सूझा तो उसने कहा तो लो मैं अनुमति देता हूं लो उनका नाम और हमें यहां से निकालो किंतु मेंढकी ने कहा यदि मैंने ऐसा किया तो आप मुझे प्रभु का नाम लेने से कदापि नहीं रोकेंगे मेंढक के पास तो कोई और चारा था ही नहीं तो उसने मेंढकी का प्रस्ताव स्वीकार किया और नवीन आशा और उत्साह के साथ मेंढकी फिर से प्रभु का नाम लेने लगी बस मेंढकी द्वारा प्रभु का नाम लेने की देर थी कि जल का पात्र जल के उबलने से कंपित होने लगा और फिर अचानक टूट गया और जल बिखर गया और मेंढक और मेंढकी फिर से मुक्त हो गए ओ गणपते नम ओ गणपते [संगीत] जिस प्रकार विघ्न हर्ता श्री गणेश जी का नाम लेने से उन दोनों की जीवन की निराशा आशा में परिवर्तित हो गई उसी प्रकार यदि कोई भी जीवन की किसी विकट समस्या से जूझ करर निराशा के समुद्र में डूब रहा हो तो अपने भीतर की आशा को जगा कर रखना चाहिए फिर स्थिति कैसी भी हो भूकंप भव ंडर महामारी या कोई और जटिल समस्या सबके निवारण का आधार मन की आशा है क्योंकि जहां आशा है वहां प्रभु श्री गणेश जी साथ है श्र गणराज सुखदाता न रो दर्शन मेरा मन रमता जय देव जय देव शरणागत संत संपत सही भरपूर पावे ऐसे तु महाराजन को अति भावे सानंदन जय देव जय [संगीत] देव और मेरी क्या आशा है यह भी सुन लीजिए मेरे प्रभु कार्तिके मात्र मेरी रक्षा के लिए नहीं अपितु कुटिलता कपट दृष्ट अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना के लिए भी यहां आएंगे और जब तक आस है तब तक श्वास है और जब तक मेरे प्रभु श्री गणेश जी मेरे साथ है तब तक ना कोई मुझसे मेरी आस छीन सकता है ना मेरी श्वास जयंत की भक्ति और प्रभु कार्तिकेय की शक्ति पर विश्वास रखिए देवराज अपना व्रत संपन्न करने के उपरांत वह स्वयं उसे मुक्त कराएंगे [संगीत] मुझे सुब्रमण्य स्वामी कार्तिकेय पर पूर्ण विश्वास है प्रथम पूज्य [संगीत] [संगीत] गनेश ओम नम [संगीत] शिवाय [संगीत] नम प्रणाम प्रभु प्रणाम माता कल्याण [संगीत] कल्याण पुत्री भक्ति भाव और निष्ठा तुम दोनों में ही हमारी आशा से कहीं अधिक हो हम अत्यंत प्रसन्न पुत्री तुमने वोह उदाहरण दिया है जो अतुलनीय है भक्त के रूप में अपार भक्ति की जीवन साथी के रूप में हर क्षण उसका साथ दिया और तभी संयम और ध्यान में रहकर भी कार्तिकेय अपनी पूजा पूर्ण कर स जो उसकी साधना और एकाग्रता और तुम्हारी अनुपम भक्ति का प्रमाण है किंतु पुत्री अभी पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के लिए एक अंतिम उत्तर देना शेष है जिस प्रकार अब तक की यात्रा में तुमने एक श्रेष्ठ संगिनी होने का उदाहरण प्रस्तुत किया है तो क्या उसी प्रकार तुम उसके स्थान पर रहकर इस प्रश्न का उत्तर दे सकोगी बता सकती हो शिव और शक्ति तत्व क्या है तुम्हारा उचित उत्तर ही उसे पाशुपतास्त्र पाने में सफल कर सकेगा अन्यथा उसकी संपूर्ण यात्रा और उसकी साधना विफल हो जाएगी मेरे कारण स्वामी विफल हो य नहीं हो सकता कदा भी [संगीत] नहीं [संगीत] प्रभु महादेव स्वामी के स्थान पर आपके प्रश्न का उत्तर मैं अवश्य [संगीत] दूंगी शिव और शक्ति तत्व क्या [संगीत] है शिव और शक्ति एक दूसरे से विलग नहीं है शिव तत्व में शक्ति और शक्ति तत्व में शिव समाहित [संगीत] है निष्क्रिय या शांत होने पर वो शि तत्व है और सक्रिय अथवा गतिशील होने पर शक्ति और यह दोनों संयुक्त रूप से ही सृष्टि की उत्पत्ति उसके पालन और उसके विलय के नियंत्रक है और सृष्टि के निर्माण उनका पालन और विनाश की लय इसी प्रकार गतिमान रहती [संगीत] है जिस प्रकार जब तक हाथ पेड़ से तोड़कर फल चवा तक ना ले जाए तब तक प्राणी को उसके स्वाद का पता नहीं चलता उसी प्रकार शक्ति गतिमान होकर शिव को संसार के प्रति उनके हृदय में भाव जगाती है और फिर दोनों के परस्पर सहयोग से संसार भी गतिमान होता है उसी प्रकार मेरे सहयोग से स्वामी की पूजा भी पूर्ण हो रही है [संगीत] जैसे प्रभु महादेव का प्रश्न स्वामी के लिए था और मैं उत्तर दे रही हूं ठीक उसी प्रकार अटूट और परस्पर है शिव और शक्ति का तत्व और संबंध नम शिवाय च न शिवाय नम शिवाय नम शिवाय शिव और शक्ति के भाति पति और पत्नी भी अभेद है और एकाकार होकर नई रचना का निर्माण करते हैं आगे बढ़ते हैं यही शिव शक्ति तत्व है पुत्री तुमने ना केवल पति पत्नी के पावन संबंध ना केवल शिव शक्ति के दिव्य बंधन को समझाया है अपत इस अंतिम परीक्षा में भी पुत्र कार्तिकी को सफल बनाया है अब वो पाशुपतास्त्र पाने और उसे धर्म युद्ध में उसका प्रयोग करने के लिए सर्वथा योग्य [संगीत] है [संगीत] [संगीत] सा [संगीत] [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नम शिवाय नमः [संगीत] शिवाय [संगीत] पुत्र अब तुम मेरे शक्ति दंड और पशुपतास्त्र अर्थात शिव और शक्ति दोनों के ही असरों से संपन्न और इसका श्रेय देव सेना को भी जाता [संगीत] है मां पिता श्री आपके इस पुत्र पर आप दोनों की इस कृपा के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद अब आप दोनों मुझे यह आशीष दीजिए कि मैं अपना कर्तव्य पूर्ण कर सकू सफल सफल पुत हमारा आशीष सदा तुम्हारे साथ कि तुम धर्म का प्रतीक बन अधर्म का नाश [संगीत] [संगीत] करो भ्राता भ्राता आप इसी का विचार कर रहे हैं ना कि यहां क्या और कैसे हुआ यह तो आपकी परम भक्त कुमारी देवसेना जी की भक्ति के चरम का ही परिणाम है विकट परिस्थितियों में भी सभी कष्ट स्वयं सहकर उन्होंने आपकी पूजा आपके व्रत में कोई कमी नहीं आने दी सर्वप्रथम आपके पद चिन्हो पर चलकर उन्होंने आपके समान तीर्थ यात्रा पूर्ण की अ प्रथम वचन किसी भी व्रत या उपवास में समानता की भागीदारी निभाना फिर यहां पहुंचने के उपरांत आपके व्रत का सम्मान करते हुए प्रत्येक पग पर आपकी सहायक बनी यह तो दूसरा वचन था एक दूसरे के प्रत्येक चुनाव का सम्मान कर आपकी पूजा के हर चरण में आपके साथ रही और आपके लिए रा वन था एक दूसरे की आवश्यकता और सुख का ध्यान रखना और जब आप ध्यान में लीन थे तो आपके स्थान पर उन्होंने आपकी पूजा संपन्न [संगीत] की चौथा वचन प्रत्येक अवस्था में एक दूसरे के दायित्व निभाने में साथ देना माता मुझे आशीर्वाद दीजिए [संगीत] एक दूसरे से विमर्श किए बिना कुछ नहीं करना इतना ही नहीं भ्राता मुसला वर्षा में भी उन्होंने आपके व्रत आपके ध्यान को ही सर्वोपरि माना जलधारा को आप तक पहुंचकर आपका ध्यान भंग नहीं करने [संगीत] दिया कारणवश एक दूसरे का अपमान कदा भी नहीं होने [संगीत] देना तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया मैं उसका धन्यवाद कैसे करूं धन्यवाद कैसा स्वामी मैंने तो बस अपना कर्तव्य निभाया आश्चर्य है एक पत्नी विवाह के बंधनों में बंद कर भी जो कार्य नहीं कर पाती तुमने तो उन्ही वचनों को निभा दिया है अब इसका क्या अर्थ समझू मैं कदाचित अब भाभी मां से भ्राता विवाह की बात करेंगे आप इसेरी श या सेवा यह तो आपके ऊपर है स्वामी किंतु मैंने जो किया व तो अटूट भक्ति से ही प्रेरित था और मुझे आशा है कि जिस प्रकार मेरे हृदय ने आपको स्वीकार किया उसी प्रकार आप भी मुझे स्वीकार करेंगे आपने मेरे लिए जो कुछ भी किया है मैं उससे बहुत प्रभावित हूं और आपको धन्यवाद भी करता हूं मैं आपको स्वीकार करता हूं [संगीत] अपनी प्रिय भक्त के रूप [संगीत] में मैं अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए और बहुत कुछ कहने का इच्छुक हूं किंतु अभी मैं अपना ध्यान कहीं भी भटकने नहीं दे सकता क्योंकि अभी मेरा कार्य अधूरा है मुझे अभी अधर्म का नाश करने और अधर्म को दंडित करने का कर्तव्य भी निभाना है [संगीत] [संगीत] प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी की जय प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी की जय प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी की जय [संगीत] प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिकेय स्वामी की जय प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिकेय स्वामी की जय प्रणाम देव गुरु बृहस्पति जी कल्याण हो अब जब देव सेनापति कुमार कार्तिके ने पशुपतास्त्र प्राप्त कर ही लिए तोहे युद्ध के लिए प्रस्थान करने में तनिक फिलम नहीं करना चाहिए देवराज सेनापति वीर बा देव गुरु बृहस्पति जी के आदेश का पालन करने के लिए तैयार हो जाइए और स्मरण रखिए यह युद्ध कठिन अवश्य होगा किंतु इस युद्ध को हम सभी योद्धाओं को मिलकर संपूर्ण साहस शक्ति और अटूट विश्वास के साथ लड़ना है और इसके लिए हम अभी इसी क्षण महेंद्रपुरी की ओर प्रस्थान [संगीत] [संगीत] करेंगे मूर्ख समझने की भूल कर रहा है मुझे यह बालक भेद जानने के लिए भेदिया छोड़ दिया ताकि हम यहां इसमें उलझे रहे और वो वहां युद्ध की तैयारी य पहुच भी जाए किंतु मैं ऐसा कदा भी नहीं होने दूंगी मा मुझे अनुमति दो मैं अभी इसका अंत कर देता हूं नहीं य कारागार में रहना चाहता है ना तो इससे ऐसे भयंकर कारागार में भेजूंगी जहां होने वाले कष्ट की यह कल्पना भी नहीं कर सकता और जहां तक उस कार्तिके का प्रश्न है तो जान हू कि उसके साथ क्या करना है भ्राता मुझे आज्ञा दें मैं यहां से महेंद्रपुरी तक अपनी सण से पुल बना दूंगा जिससे हमारी सेना वहां तक पहुंच सके प्रभु देव सेना आगे बढ़ने को तैयार [संगीत] है हा देव सेनापति हमारी सेना युद्ध के लिए तैयार है किंतु मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे आप किसी की प्रतीक्षा में है नहीं देवराज हमें इसी क्षण कुछ करना चाहिए प्रणाम [संगीत] प्रभु ओ तो भ्राता भाभी मां की प्रतीक्षा में [संगीत] थे [संगीत] प्रभु मां के अनुसार युद्ध के लिए प्रस्थान विज तिलक के उपरांत ही करना चाहिए यह सौभाग्य मुझे प्रदान करने की कृपा कीजिए तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक नैना [संगीत] हो तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक नैना तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक नैना तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक नैना यद आप मुझसे प्रसन्न होकर मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार है तो आप जाने से पहले एक बार मुड़कर मुझे अवश्य [संगीत] देखेंगे देरे ना देरे ना दमता नाना देताना तनाना देरे ना देरे ना [संगीत] तनाना दि का नाना रेना रेना ता नाना ता नाना ता नाना ये क्या प्रभु ने तो जाते मुझे देख ही नहीं नाना रेना देरे [संगीत] नानाना खड़े क्यों हो जाओ और जाकर उस कार्तिके और उसकी सेना की सूचना लेकर [संगीत] आओ मुझे विश्वास है आप मुझे निराश नहीं करेंगे प्रभु एक बार अवश्य मुड़ें देखेंगे मुझे व मुड़ क्यों नहीं रहे हैं मुझे देख क्यों नहीं रहे क्या मेरी य आशा निराशा बन [संगीत] जाएगी मयूर जी [संगीत] प्रभु तू अपने वाहन मयूर जी पर सवार भी हो गए व मुड़ क्यों नहीं रहे मुझे देख क्यों नहीं [संगीत] रहे युद्ध ही दुष्टता के अंत का अंतिम उपाय है तो अब वही करूंगा मैं किंतु अधर्म अनाचार को रोके बिना अब मैं भी नहीं रुकूंगा प्रभु सुब्रमण्य कार्तिके स्वामी की ज प्रभु सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी की जय भाभी मां के मुख पर ऐसी चिंता जिस प्रकार प्यास लगने पर जल की एक बूंद भी अमृत के समान होती उसी प्रकार स्नेह संबंध स्नेह युग संकेत की एक झलक मन को तृप्त कर देती देव सेना कितने समय से कितने अधीरता से पुत्र कार्तिक की एक स्नेह युक्त की प्रतीक्षा कर रही यदि वो भी उसे प्राप्त नहीं हो तो उसका प्रेम भरा हृद झा जाए भाभी मां के हृदय को निराशा का सामना नहीं करना चाहिए वह मेरी भाभी मां ही नहीं स्वयं देवताओं की सेना की शक्ति देव सेना है जिनसे देव सैनिकों को शक्ति और ऊर्जा प्राप्त हुई है इसलिए यदि वह निराश हो गई तो युद्ध के लिए प्रस्थान करने वाली संपूर्ण देव सेना राशा के भवर में डूब जाएगी नहीं देख रहे हैं प्रभु हां मशक जी उनकी दृष्टि तो उनके लक्ष्य पर ही टिकी [संगीत] है उन्होंने नहीं देखा अभी भी नहीं देखा भाभी मां को पुत्र कार्तिकी को पुत्री देव सेना को एक बार अवश्य देख लेना चाहिए नहीं अब तो स्वामी प्रस्थान करने वाले अब मेरी रही सही आशा भी बिखर रही है भक्ति की शक्ति अनंत है जो भक्त अपने इष्ट पर पूर्ण विश्वास रखते हैं ईश्वर उन्हें विपरीत से विपरीत परिस्थिति से भी उबार लेते हैं
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