किराड रूप प्रभु महादेव और अर्जुन में ऐसा घमासान युद्ध छिड़ गया जो आगे जाकर श्री काल हस्ती की मुख्य कथा का आधार [संगीत] बना मेरे वायु अस्त्र को तो लौटा दिया तुमने परंतु मेरा अग्नि अस्त्र तुम्हारे बाणों को भस्म कर देगा अग्नि अस्त्र [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] इसका प्रत्येक प्रहार मेरे भीतर क्रोध की ज्वाला को जागृत कर रहा [संगीत] है मेरे सारे माण समाप्त हो गए आश्चर्य है मेरे शक्तिशाली दिव्य बाणों का सामना करना किसी भी साधारण आखेटक के लिए संभव नहीं कौन है यह योधा बस बहुत हुआ अब मैं अपने महानतम अस्त्र का प्रयोग करूंगा ओम ब्रह्मास्त्र ओम ब्रह्मास्त्र ओम ब्रह्म देवाय नमः हे ब्रह्मदेव ब्रह्मास्त्र को जागृत कीजिए अर्जुन को भले ही ज्ञात ना हो किंतु मैं उसके द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग महादेव पर कदा प नहीं होने दूंगा महादेव पर कदा प नहीं होने दूंगा ब्रह्मदेव मेरी प्रार्थना क्यों नहीं सुन रहे हैं मुझसे इतनी प्रतीक्षा क्यों करवा रहे हैं ब्रह्मास्त्र का प्रयोग अंतिम विकल्प है ब्रह्मदेव ब्रह्मास्त्र को क्रियान्वित ना भी करें तो भी मैं अपनी समस्त प शक्ति का प्रयोग कर इसे क्रियान्वित करूंगा मुझे ज्ञात है इसका विपरीत प्रभाव मुझ पर भी पड़ेगा किंतु अब मेरे समक्ष दूसरा विकल्प नहीं है [संगीत] अर्जुन के इस निर्णय का अर्थ यह है कि मैं भी उसे ब्रह्मास्त्र के प्रयोग से नहीं रोक [संगीत] सकूंगा उसकी समझ शक्ति छिन पड़ रही है फिर भी पराजय स्वीकार नहीं है [संगीत] उसे स्वामी अब ब्रह्मदेव के सम्मान में ब्रह्मास्त्र को नष्ट नहीं करेंगे फिर उस महास्त्र का सामना भला कैसे होगा [संगीत] स्वामी मैं मेरे सभी बाण यहां तक की ब्रह्मास्त्र भी यहां कैसे पहुंच गए कौन था व [संगीत] किरात [संगीत] जो भी हो तुम माया वई की रात अब मैं तुम्हें अवश्य पराजित [प्रशंसा] करूंगा [संगीत] महादेव [संगीत] प्रभु प्रभु प्रभु महादेव [संगीत] महादेव मुझे क्षमा करें प्रभु भूल हुई है मुझसे आपकी तपस्या कर रहा था और आप पर ही वार करने का दशास कर बैठ हमें क्षमा करें प्रभु क्षमा करें मेरे दिव्यास्त्र जब विफल होने लगे तभी मैं समझ कि किसी अत्यंत दिव्य और वक्ति से मेरा सामना है किंतु योद्धा युद्ध के मध्य में नहीं रुक सकता अन्य वो मेरा मेरे युद्ध कौशल और मेरे शस्त्रों का अपमान होता इसलिए मुझ पर दया करें प्रभु और क्षमा कर दे क्षमा कर दे मुझे प्रभु पुत्र अर्जुन मेरी परीक्षा में सफल हुए तुम तुमने एक वीर योद्धा के धर्म का पालन किया पाशुपतास्त्र के लिए सर्वथा योग्य हो तुम प्रभु अब आपके दर्शन प्राप्त हो गए मुझे तो अब और कुछ पाने की इच्छा कहां शेष रही आप तो एक ही कृपा कीजिए प्रभु मुझे सयो मुक्ति अर्थात परम मोक्ष का वरदान [संगीत] दीजिए ईश्वर हो या कोई छोटे से छोटा जीव संसार में सभी के लिए कर्तव्य निर्धारित है तुम्हारा कर्तव्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है पुत्र तुम्हारी भक्ति सच्ची निष्ठा और योग्य यो के गुण से अत्यंत प्रभावित हुआ हूं मैं इसलिए मैं तुम्हे युद्ध में प्रयोग करने हेतु वो पाशुपतास्त्र प्रदान करता हूं जिसमें सभी जीवों की शक्ति समहित [संगीत] है [संगीत] कुंती पुत्र एक मात्र तुम ही से थामने इसका वार करने और लौटाने में समर्थ [संगीत] हो त्रिलोक में कोई भी ऐसा नहीं जो इसका सामना कर सके इसलिए इसका प्रहार शक्तिशाली शत्रुओं पर ही होना चाहिए उन से कम किसी योद्धा पर इसका प्रयोग सृष्टि के अंत का कारण बन सकता [संगीत] [संगीत] है [संगीत] जब इस जन में अपने कर्तव्य पूर कर तुम उसके फल स्वरूप अगला जन्म पाओगे तब उस जन्म में तुम्ह मोक्ष की प्राप्ति होगी होगी ईश्वर हो या कोई छोटे से छोटा जीव संसार में सभी के लिए कर्तव्य निर्धारित है मुझे सफलता पूर्वक इस यात्रा को संपन्न कर पशुपतास्त्र प्राप्त करना होगा तभी मेरे जीवन का उद्देश्य पूर्ण होगा मुझे विश्वास हो गया जीवन का उद्देश्य आपसे जुड़ा और मैं आपके कर्तव्य में आपकी सहायक बनू तो मैं आपके कर्तव्य के मध्य आधा कैसे उत्पन्न कर सकती हू इसलिए अब मैं आपके विचारों में डूबी नहीं रहूंगी अभी तु मैं मां के बताए 16 सोमवार व्रत में व्यस्त रहूंगी आपका आशीर्वाद होगा तो मुझे अपने व्रत में सफलता प्राप्त होगी इसलिए मुझे आपका आशीष [संगीत] दीजिए [संगीत] [संगीत] पुत्री देश सेना पुत्र कार्तिक के लिए पूर्ण रूप से सुयोग्य है अब शीघ्र इन दोनों का विवाह कर देना [संगीत] चाहिए तो भ्राता इस प्रकार वीर अर्जुन को पाशुपतास्त्र प्राप्त हुआ इसलिए प्रभु महादेव के किरा अवतार को प्रभु पशु पतेश्वर भी कहा जाता है और उन्होंने अर्जुन को मात्र वह महा अस्त्र ही प्रदान नहीं किया अपितु उन्हें भावी जन्म में मोक्ष का वचन भी दिया तो फिर क्या अर्जुन का पुनर्जन्म हुआ प्रभु गणेश जी हां हुआ और इस जन्म में भी सज मुक्ति पाने के लिए उन्हें कठिन परीक्षा का सामना करना पड़ा क्योंकि इस जन्म में उन्हें किसी भी ईश्वर में कोई आस्था नहीं थी और उनके पुनर्जन्म की कथा भी अत्यंत रोचक है इस कथा की शुरुआत एक कबीले से होती है जिसके राजा व्याध राज नागा को कोई संतान ना [संगीत] थी मैया को प्रणाम करता [संगीत] हूं आज के दिन का आखेट स्वीकार करे मां और एक कृपा और करे मां मुझे उत्तराधिकारी दे मेरा यह दुख हर ले मां कृपा करे मां कृपा [संगीत] करें [संगीत] जगत पिता की लीला अपरम पार है उन्होंने अर्जुन की आत्मा को अगले जन्म के लिए जागृत किया और जगत माता ने उसे एक परिवार दिया नमय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय [संगीत] हम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] व्याध राज नागा को मां की कृपा से उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ [संगीत] शांत हो गया मेरी भुजाओ में आते ही यह शांत हो गया यह मां की कृपा है यह मेरा ही पुत्र है यह मेरा ही पुत्र है हां यह मेरा ही पुत्र है और जब व अपने कबीले लौटे तो सब पहले से ही आनंदित थे क कि उसी समय उनकी रानी ने एक पुत्री को जन्म दिया था महाराज मैया की कृपा हुई है आप पर पुत्री हुई है आपको मैया की कृपा की वर्षा हुई है मुझ पर उत्तराधिकारी भी मिला और पुत्री भी नाचो माता की कृपा में अब उन्हें पूर्ण विश्वास था और राजा अति आनंदित थे वो अपनी ी नीला और उस बालक थिन्ना की जो उन्हें वन में प्राप्त हुआ था दोनों का लालन पोषण बहुत स्नेह से करने लगे और उनकी इच्छा थी कि उचित आयु पर व उन दोनों का विवाह करवा दे ना आ जाओ आओ आओ तुम व्या ग्र हो और यह तुम्हारा अस्त्र है अब इसे तुम्हें चलाना सीखना है और सामने देखकर निशाना साधना [संगीत] है हां हां समझ गया आखेट करना तो तुम्हारा भी धर्म है चलो अच्छा है तुम्हारे होने वाले पति के साथ में तुम भी धनुष विद्या सीख लोगी जाओ ले आओ वो धनुष लो और साधो निशाना [संगीत] चलो प्रणाम मैया आशीष दीजिए [संगीत] प्रभु जीती रहो ना तुम्हें प्रभु और मैया से आशीर्वाद नहीं लेना मिट्टी की मूर्ति के सामने क्या झुकना इनसे क्या मिलेगा ना मेरे राजा मेरे मुखिया का आशीष है मुझे इतना ही अधिक है मेरे [संगीत] लिए जाओ साधो [संगीत] निशाना अच्छा है बहुत अच्छा है धनुष पाण चलाना तो जैसे तुम जन्म से ही जानते [संगीत] हो ऐसे नहीं ऐसे अपनी दृष्टि रखो और साधो [संगीत] निशाना नीला और अभ्यास करो नहीं तो चूक जाओगी आख हाथ से निकल जाएगा और तुम भूखी रह जाओगी जब तुम हो तो मैं भूखी क्यों रहूंगी भला तुम आखेट करोगे और जो तुम लाओगे वो मैं खाकर प्रसन्न रहूंगी फिर से लक्ष साधो और छोड़ दो बा [संगीत] [संगीत] अनेक योद्धा मेरी दृष्टि के सामने से निकले किंतु अपने संपूर्ण जीवन में थिन्ना के समान कुशल धनु दारी मैंने नहीं देखा जैसे ये पिछले जन्म से ही युद्ध कला सीख कर आया [संगीत] हो व्यर्थ में निर्जीव शीला आकृति के सामने झुकना छोड़ दो कदाचित तुम्हारा भी लक्ष्य सुधर जाए जिन्हे तुम मात्र निर्जीव शीला आकृति कहते हो वो मेरे भगवान है मुझे उनमें विश्वास है और मुझे विश्वास है मेरी भुजाओं पर मेरे अस्त्रों पर और कदाचित इसीलिए मैं अधिक उत्तम धनु [संगीत] दारी बचपन से इसे समझा रहा हूं ईश्वर भक्ति का महत्व समझा रहा हूं किंतु इस पर कोई प्रभाव ही नहीं पड़ता और अब जब इसका राज्य अभिषेक इतना निकट है तो यह प्रभु में मैया में आस्था कैसे रख सकता है जहां एक और थिन्ना को ईश्वर पर बिल्कुल भी आस्था नहीं थी वहीं दूसरी ओर नीला की भक्ति प्रगा होती चली गई राजा नागा ने उन्हें माता की कृपा समझकर स्वीकार किया था किंतु वह थिन्ना से कभी ईश्वर सत्ता उनकी भक्ति स्वीकार नहीं करा सके दो इतने विपरीत व्यक्तित्व उनके मध्य विवाह संभव ही कैसे था विवाह के उपरांत व्यक्ति के जीवन में कितने अद्भुत परिवर्तन आते हैं मैं यही तो आपको दिखाना चाहता हूं भ्राता जिससे आप शीघ्र विवाह करने के लिए तैयार हो जाए क्या हुआ गणेश अब किस विचार में डूब गए हो तुम विवाह एक यात्रा है जिसमें स्त्री और पुरुष एक दूसरे को जानते हैं समझते हैं यह यात्रा कभी उन्हें आनंदित करती है तो कभी असंतोष का आभास भी कराती है किंतु शुभ और बड़े उद्देश्य के लिए दोनों पति-पत्नी इस यात्रा पर निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं खन्ना और लीला में मतभेद अवश्य थे किंतु मनभेद नहीं दोनों एक दूसरे को स्वीकार करते थे फिर एक दिन उन दोनों के विवाह का समय आ ही [संगीत] गया अभी भी समय है तुम मुझे अभी भी अस्वीकार कर सकते हो क्योंकि विवाह के उपरांत भी मैं अपना पूजा पाठ कदापि नहीं छोडूंगी यदि तुम्हारे ईश्वर हमारे संबंध के मध्य ना आए तो तुम्हें पाकर मुझे अति प्रसन्नता होगी [संगीत] जाओ अपनी मैया और अपने भगवान से आशीष ले लो मैं यही प्रतीक्षा करू आज भी रुकोगे आज मैं तुम्हें अपनी पुत्री ही नहीं सौंप रहा हूं अभी तू याद राज भी बना रहा हूं वराज नागा की जयराज की राज नागा की मां के सामने इस महायोद्धा थिंडा को मैं कबीले का सरदार बनाता [संगीत] हूं आगे बढ़ो थिन्ना मां के सामने मेरी पुत्री और राज सिंहासन को स्वीकार करो नहीं नहीं [संगीत] जब दो विपरीत विचारधाराओं के व्यक्तियों के मध्य प्रेम संबंध स्थापित होकर विवाह में परिणत होता है तो वह सामाजिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करता है
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