Sunday, 4 January 2026

शिखंडी ने धृष्टद्युम्न को अपना रहस्य बताया Mahabharat Scene Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] महाभारत प्रधा श्री [संगीत] राता श्री आओ अनुज यह बाण विष में किसके लिए बुझाए जा रहे है उस महायोद्धा के कई नाम है अनुज देवव्रत [संगीत] गंगापुत्र [संगीत] भीष्म मेरी आत्मा के माथे पर अपमान का हस्ताक्षर उनका वद तो आपकी ओर से मैं करूंगा प्रता श्री मैं करूंगा नहीं अनुज अपमान का प्रतिशोध तो स्वयं ही लेना पड़ता है व मेरा ऋणी है मैं हर क्षण के साथ अपने अपमान की पूरी कहानी जीता काशी की राजकुमारी अंबा के स्वयंबर का वो दिन और उस दिन के पश्चात बीतने वाला कोई दिन भी अभी तक बीता नहीं है लगातार पीत रहा है लगातार पीत रहा है मैं आंखें बंद करता हूं तो काशी की वो सभा मेरे सामने राक्षसी की भांती हाथ उठा उठा कर हंसने लगती है और मेरी छाती पर मेरे अपमान का फता मृत्य करने लगता है सारी राज्यसभा वीरों महावीर से भरी हुई है कि एक व्यक्ति के आने से सारे होठों की मुस्कान मुरझा जाती है गंगापुत्र भीष्म पधार रहे हैं लगता है भीष्म प्रतिज्ञा राजकुमारियों की सुंदरता के सागर में डूब गई प्रतिज्ञा भी काज की रही होगी सावधान इस स्वंबर में मैं हस्तिनापुर नरेश महाराज विचित्र वरी का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं काशी राजकुमारियां शताब्दियों से कुरुवंश में ब्याह के लिए जाती रही हैं आज भी यही होगा मैं इन तीनों राजकुमारियों को अपने छोटे भाई विचित्र वरी की रानिया बनाने के लिए ले जा रहा हूं राजकुमारियों का स्वयं भर रचाकर आपने जो हस्तिनापुर का अपमान किया है मैं उसके लिए आपको क्षमा करता हूं परंतु राजकुमारियों को अपना वर चुनने का अधिकार है भीष्म इन राजकुमारियों को य अधिकार नहीं है शवराज और यदि है तो मेरे सिवा और कोई स्वयं सभा में बैठने योग्य नहीं भीष्म अपनी जुबान को लगाम दो मैं केवल घोड़ों को लगाम देता हूं और शाल राज तुम यदि मुझसे जीवन दान पाकर ना जी रहे होते तो भरी सभा में इस प्रकार मेरी बात काटने का कड़ा दंड देता तुम्हें मैं इस बरे दरबार में घोषणा करता हूं कि मैं राजकुमारियों को लेने आया हूं और ले जा रहा हूं [संगीत] [संगीत] क्या कोई भीष्म को रोकना चाहता है रोकना चाहता है भीष्म को राजकुमारियों को जाने की आज्ञा दीजिए काशी नरेश [संगीत] भीष्म सारथी र घुमाओ शाल्व राज हां मैं शाल्व [संगीत] मेरे पास बाणों की कमी नहीं है शाल राज पर दिया हुआ जीवन में वापस लेना नहीं चाहता इसलिए एक बार फिर क्षमा करता हूं सारथी हस्तिना पर चलो [संगीत] [संगीत] क्या मैं एक विनती कर सकती हूं राजमाता केवल मां कहो अंबा परंतु मेरी विनती तो राजमाता से है आज्ञा है परमवीर गंगापुत्र भीष्म के आने से पहले ही मैं मन ही मन शाल्व नरेश को अपना पति मान चुकी थी राजमाता तो तुमने मुझे यह बात बताई क्यों नहीं राजकुमारी भय गंगापुत्र आपका [संगीत] भय तब तो विचित्र वीर का विवाह अंबा से नहीं हो सकता माते तुमने ठीक कहा भीष्म तुम निश्चिंत रहो राजकुमारी तुम्हें आदर के साथ शाल भिजवाने का प्रबंध किया जाएगा भीष्म से कह देना हम हारी हुई वस्तु दान में स्वीकार नहीं करते और उनसे यह भी कह देना कि राजकुमारी को यहां भेजकर उन्होंने हमारा अपमान किया है मेरा अपमान किया है गंगापुत्र भीष्म ने यह मुझे श्याल नरेश के पास भेजते और ना ही मेरा इतना बड़ा अपमान होता इसलिए गंगापुत्र भीष्म को आदेश हो कि अपने क्षत्रीय धर्म का पालन करते हुए मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें महाराज की जय हो परंतु मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूं महाराज मैं विवाह कर ही नहीं सकता विवाह नहीं कर सकते तो काशी से यहां लाए क्यों मैंने तो काशी दरबार में यह घोषणा कर दी थी कि मैं केवल हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं मेरा हरण ऐसे समय में किया गया था महाराज जब मेरे हाथ में वरमाला थी मेरी बहनों ने आपको स्वीकार किया परंतु मैं आपको स्वीकार नहीं करती अब मैं वह माला गंगा पुत्र भीष्म के गले में डालना चाहती हूं यह संभव नहीं है देवी क्यों संभव नहीं है क्योंकि मैं ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की है घायल नागिन घायल शेरनी और अपमानित स्त्री से डरना सीखो गंगापुत्र तुम वचन बद्ध हो इसलिए मेरे अपमान के घाव पर मान का फाया नहीं लगा सकते तो आज इसी कुरु राज दरबार में हस्तिनापुर नरेश को साक्षी मानते हुए मैं भी प्रतिज्ञा बद्ध होती हूं गंगापुत्र भीष्म मैं तुम्हे अपने अपमान के लिए कभी क्षमा नहीं करूंगी चाहे इसके लिए मुझे जन् पर जन् क्यों ना लेने पड़े तुम्हारी मृत्यु का कारण बनकर मैं अपने इस अपमान का बदला अवश्य [संगीत] लूंगी अंबा अपने अपमान का नरक अपने आंचल में लिए हुए तपस्वी के एक आश्रम में पहुंची तपस्वी ने उसकी कथा सुनने के पश्चात उससे कहा कि स्त्री के केवल दो ही आश्रय हैं पति या पिता अंबा ने कहा कि प्रश्न आश्रय का नहीं है प्रश्न है अपमान और उसके भुगतान का अंबा आश्रय की खोज में नहीं थी वह तो प्रतिशोध के मार्ग की यात्री थी हम बड़े विचित्र समाज में जी रहे हैं अनुज नारी के मान अपमान पर भी पुरुषों का अधिकार है ना उसका अपना व्यक्तिगत मान है ना अपमान परंतु अंबा के लिए स्वी काणी नहीं था अपमान तो उसका हुआ था तो उसके प्रति शोध पर भी केवल उसी का अधिकार था तो उसने तपस्वी से कहा हे मुनि गण मैं अब काशी तो नहीं जा सकती वहां मुझे बंधु बांधों का तिरस्कार स्वीकार करना पड़ेगा मैं शल के पास भी नहीं जा सकती क्योंकि वे मुझे पहले ही अस्वीकार कर चुके हैं मेरे लिए तो केवल एक ही मार्ग खुला रह गया है और वह मार्ग है तपस्या का हे राजकन्या तपस्या का मार्ग सरल नहीं है जानती हूं किंतु कोई और मार्ग खुला ही ना हो तो उसी मार्ग पर चलना पड़ेगा ना जो खुला हुआ है चाहे वह कितना ही कठिन क्यों ना हो हे मुनिवर तब का मार्ग अपमान को सहन करने के मार्ग से अधिक कठिन तो नहीं हो सकता ना किंतु पुत्री हो [संगीत] हे परम तपस्वी राजा श होत्र वाहन आपका हार्दिक स्वागत है स्थान ग्रहण कीजिए मुनि गण कुछ चिंतित लग रहे हैं समस्या कुछ गंभीर है यह काशी की राजकुमारी अंबा है [संगीत] अंबा की कथा सुनकर राज श्री होत्र वाहन सन्नाटे में आ गए और बोले हे पुत्री मैं तेरे जन्म से पहले ही तपोवन चला गया था इसलिए तू मुझे नहीं जानती मैं तेरा नाना हूं तू अपने पिता के घर ना जा तू परशुराम जी के पास चली जा वे ही तेरे शोक और संताप का उपचार कर सकते हैं वे कहां मिलेंगे श्वर महेंद्र पर्वत पर जा पुत्री वे मेरे बाल सखा और सहपाठी हैं आयुष्मान भाव आसन ग्रहण कीजिए ऋषिवर [संगीत] हे ब्रह्म ऋषि यह मेरी देवती अंबा है मैं इसे आप ही के पास भेज रहा था कि इसके दुख का उपचार यदि किसी के पास है तो वे आप ही हैं आयुष्मान भव क्या समस्या है पुत्री गंगापुत्र भीष्म ने इसका अपमान किया है इसका हरण किया फिर इसे स्वीकार करने से नकार दिया है ऋषिवर यदि ऐसा है तो भीष्म को से स्वीकार करना ही पड़ेगा क्योंकि यही हरण की मर्यादा है [संगीत] प्रणाम एक ब्राह्मण आपके दर्शन के अभिलाषी हैं [संगीत] प्रणाम आयुष मान भव स्थान ग्रहण कीजिए मैं महर्षि परशुराम का संदेश लेकर आया हूं गुरु परशुराम का क्या आदेश है गुरुदेव का उन्होंने कहवा है कि किसी विशेष का का से यहां आए हैं और उनकी इच्छा है कि आप उनका यह कार्य कर दें गुरु की इच्छा भी आदेश है कार्य क्या है यह तो वे स्वयं ही बताएंगे जब तुम्हें विवाह नहीं करना था तो तुमने काशी की राजकुमारी अंबा का हरण क्यों किया और जब हरण कर ही लिया था तो उसके किस अपराध के आधार पर तुम ने उसे त्याग दिया इसका परिणाम यह हुआ कि वो अकेली और हसाए रह गई यही कारण था कि शाल्व नरेश ने उसे अस्वीकार कर दिया अत अग्नि को साक्षी मानकर तुम उसे ग्रहण करो और अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करो भगवन अब तो मैं उसे अपने भाई के साथ भी नहीं ब्या सकता क्योंकि स्वयं अंबा ने मुझसे कहा कि वह तो शाल वराज की हो चुकी है और मैं उसे आदर के साथ शाल राज के पास भेजकर अपने क्षत्रिय धर्म का पालन कर चुका हूं हे गंगापुत्र देवत यदि तुमने हमारी आज्ञा का पालन नहीं किया तो तुम्हें हमसे युद्ध करना होगा मैं आपको समझाने का प्रयत्न करके शिष्य की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चा चाहता नहीं गंगापुत्र तुम इस मर्यादा का भी उल्लंघन करके देख लो हे भगवन आप मेरे गुरु हैं आप अपने शिष्य के साथ क्यों युद्ध करना चाहते हैं शिष्य को उसकी सभ्यता पर कठोर दंड देना गुरु का परम कर्तव्य है देवव्रत मैं फिर कहता हूं अंबा को ग्रहण कर लो हे ब्रह्म र्ष यह तो संभव ही नहीं है और यदि आपने युद्ध का आदेश दे ही दिया है तो आपका यह शिष्य उस आज्ञा का पालन अवश्य करेगा मैं जानता हूं कि आपने अकेले ही इस पृथ्वी के सारे क्षत्रियों को पराजित किया है पर हे गुरु श्रेष्ठ य आप भी जानते हैं कि उन क्षत्रियों में से आपके इस शिष्य जैसा कोई क्षत्रिय नहीं था जो आपके युद्धाभ्यास देवव्रत का उदय तो अब हुआ है तो कुरुक्षेत्र की ओर चलो तनिक मैं भी देखूं कि मैंने अपने शिष्य को कैसी शिक्षा दी है जो आज्ञा गुरुदेव जो आज्ञ [संगीत] [संगीत] और [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] हे गुरु श्रेष्ठ आप भूमि पर खड़े हुए हैं मैं रथ पर चढ़कर आपसे युद्ध नहीं कर सकता यदि आप मुझसे युद्ध करना चाहते हैं तो कवच धारण करके रथ पर आईए यह भूमि मेरा रथ है वेद अश्व है पवन सारथी है वेद माता गायत्री सावित्री और सरस्वती मेरा कवच है [संगीत] [संगीत] [संगीत] हे गुरु श्रेष्ठ मुझे अपने साथ युद्ध करने की आज्ञा दीजिए और यह आशीर्वाद दीजिए कि विजय मेरी हो हे कुरु श्रेष्ठ मैं तुम्हारी नम्रता से अति प्रसन्न हूं सफलता चाहने वाले पुरुष को ऐसा ही करना चाहिए अपने से बड़ों के साथ युद्ध करने वालों का यही धर्म है यदि तुम इस प्रकार नहीं आते तो मैं तुम्हें शाप दे देता हूं जाओ और इस प्रकार युद्ध करो कि तुम्हारा गुरु लज जित ना [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो सावधान सावधान [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] शिवर यह तो प्रवा पास्त्र है इस अस्त्र से क्या होगा यह तो अचूक अस्त्र है पुत्री और इसके प्रयोग की विधि गंगापुत्र के अतिरिक्त और कोई नहीं जानता यदि उन्होंने इस अस्त्र का प्रयोग परशुराम जी पर कर दिया तो उनकी पराजय निश्चित है ठहरो हे गुरु नंदन हे भरत श्रेष्ठ दवा पास्त्र का प्रयोग ना करो इसके प्रयोग से तुम्हारे गुरुदेव का अपमान होगा इसका प्रयोग ना करो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] हे शिष्य श्रेष्ठ हे गंगा पुत्र हे अधिरथ हे भीष्म आज तुमने अपने गुरु को परास्त कर दिया अब संसार में किसी गुरु को तुम जैसा शिष्य नहीं मिलेगा परंतु हे पुत्र अब मैं रणभूमि में पीछे नहीं हट सकता इसलिए या तो मेरा वध करो या फिर लौट जाओ [संगीत] हे गुरु श्रेष्ठ मैं युद्ध आपकी आज्ञा पालन के लिए कर रहा था और अब यदि आपका आदेश यह है कि मैं लौट जाऊ तो मैं लौट जाता हूं [संगीत] [संगीत] सारथी चलो [संगीत] [संगीत] हे अनुज स्वयं मैंने परशुराम को उस भीष्म के आगे विवश होते हुए देखा है तब मैंने निर्णय लिया कि जो कुछ करना है वह स्वयं मुझी को करना पड़ेगा मैंने खोर तपस्या की परिणाम यह हुआ कि मेरा आधा शरीर अंबा नदी बन गया और ंग वत्स देश की कन्या होकर उत्पन्न हुआ किंतु यह तो मेरा लक्ष्य नहीं था मैंने फिर तपस्या का मार्ग पकड़ा और तब स्वयं महादेव से मुझे यह वर मिला कि मैं भीष्म की मृत्यु का कारण बन सकूंगा तब मैंने तब मैंने कहा हे ईश्वर मैं तो नारी हूं मैं भीष्म जैसे अधिरथ का वध कैसे कर सकूंगी तब महादेव ने कहा कि तू पुरुषत्व प्राप्त करेगी और दूसरा शरीर पाने के पश्चात भी यह सब याद रखेगी तू द्रुपद के घर जन्म लेगी और महारथी बनेगी और हे प्रिय अनुज महादेव का वो वरदान तुम्हारे सामने है प्रता श्री प्रता श्री प्रण पूरा नहीं कर सकी जन्म गया था बीत अंबा फिर से जन्म ले बनकर नया अतीत बनक नया अतीत महा भारत महा भारत महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत]

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...