[संगीत] [संगीत] महाभारत [संगीत] तुम कौन हो बालक मैं मत नरेश का पुत्र उत्तर हू महारथ शल्य किंतु यह मेरा आधा परिचय है महारती शल्य और तुम्हारा पूरा परिचय क्या है मेरी आयु ना देखि मद्र नरेश अपने शरीर में मेरे बा से लगाए हुए घव की गहराई देखिए उन घव की इस गहराई को नापने के उपरांत ही तो तुम्हें जानने को जी चाह रहा है बालक अपना पूरा परिचय दो जिस योद्धा के सारथी आज स्वयं वासुदेव कृष्ण है महारथ शल्य विराट युद्ध में मैं उस योद्धा का सारथी था अपनी जीवा को अपने आकार से लंबा ना होने दो बालक और अब यह संभालो [संगीत] [संगीत] [संगीत] यह मेरी जिवा नहीं मेरे बाण है मदर [संगीत] नरेश [संगीत] हे बालक महारथी मैं तेरी मृत्यु को सादर प्रणाम करता हूं [संगीत] [संगीत] सुदेशना अरे आप समझ गई निसंदेह मेरे पुत्र ने रणभूमि में कोई उत्तम कार्य किया होगा और आप मुझे उसी की बधाई देने आए हैं यही कारण है ना हां तुम्हारे पुत्र ने बड़ा उत्तम कार्य किया है सुदेशना हम दोनों उस पर जितना भी गर्व करें कम है पांडव सेना की तो बात छोड़ो उसकी प्रशंसा तो कौरव सेना भी कर रही है जानती हो महारथी शल्य ने उसे सादर प्रणाम किया हार्दिक बधाई हो सुदेशना हार्दिक बधाई हो मैंने विराट नगर की ओर सवार दौड़ा दिए हैं कि वे उत्तरा को ले आए यह क्या किया आपने यह क्या उसके यात्रा करने के दिन है पूरे दिनों से है तो क्या हुआ अच्छा है महारथी मामा के भांजे महारथी पिता के पुत्र महारथी पिता माओ के पौत्र को रणभूमि में ही जन्म लेने दो आपने पहले उसके महारथी मामा का नाम क्यों लिया आरे वह तो सबसे छोटा है आज की रात वह सबसे छोटा नहीं [संगीत] है आज की रात उसी की रात है सुदेशना आज वह किसी से छोटा नहीं है रणभूमि कुरुक्षेत्र में किसी महारथी का आकार आज उससे ऊंचा नहीं सच आर्य तने को उसके युद्ध के बारे में विस्तार से सुनाई है ना आर्य जब शल्य से उसका सामना हुआ तो शल्य ने से पूछा तुम कौन हो बालक तो उसने कहा मैं मत्स नरेश का पुत्र उत्तर हूं किंतु यह मेरा आधा परिचय है आप मेरी आयु ना देखिए अपने शरीर पर लगे हुए बाणों के घाव की गहराई को देखिए हे महारथी शल्य जिस महारथी के सारथी स्वयं वासुदेव कृष्ण है विराट के युद्ध में उस योद्धा का सारथी मैं था आर्य फिर द्वंद युद्ध आरंभ हुआ तुम पुत्र ने शल्य की छाती भेदी शल्य ने तुम्हारे पुत्र की छाती छेदी दोनों लोहू लुहान रणभूमि कुरुक्षेत्र में हर योद्धा इस द्वंद युद्ध को रुक कर देख रहा था और सबकी आंखों से ऐसा लग रहा था मानो कह रही हो धन्य है वह माता जिसने इस वीर बालक को जन्म दिया किंतु किंतु आप रो क्यों रहे यह आंसू गौरव के हैं सुदेशना यह आंसू आनंद के हैं यह आंसू सम्मान की लेखनी है जो आज मुझे पुतर का पिता होने के कारण मिली है य आंसू तुम भी बहाल हो य आंसू तुम भी बहा लो सुदेशना आप आप कुछ छुपा रहे हैं आर्य मुझसे आप कुछ छिपा रहे हैं सम्मान छिपाया नहीं जाता सुदेशना छिपाया नहीं जाता मैं तो चिल्ला चिल्ला करय कहना चाहता हूं कि हे संसार देख मैं महारथी उत्तर का पिता हूं कल तक उसका परिचय यह था कि वह मेरा पुत्र है किंतु आज से मेरा परिचय यह है कि मैं महारथी उत्तर का पिता हूं और तुम्हारा परिचय यह है कि तुम महारथी उत्तर की माता हो हम तो धन्य हो गए सुदेशना धन्य हो [संगीत] गए जानती हो रणभूमि कुरुक्षेत्र में क्या हुआ महारथी शल्य अपने रथ से उतरे और तुम्हारे पुत्र के शव को प्रणाम करके बो हे बालक महारथी मैं तेरी मृत्यु को सादर प्रणाम करता हूं उन्होंने किससे कहा मेरे मेरे उत्तर के शव से हां सुदेशना हां मैं पुत्र के वीर गति को प्राप्त होने पर शोक नहीं प्रकट कर सकता यह उसकी मृत्यु का अपमान होगा मेरी बधाई स्वीकार करो उत्तर की माता मेरी बधाई स्वीकार [संगीत] करो आपकी बधाई स्वीकार करती स्वीकार [संगीत] करतीं महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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