Friday, 2 January 2026

मौरवी से घटोत्कच ने कौनसा प्रश्न किया था Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत आओ घटोत गज जीवन से बहुत निराश लगते हो कल संध्या ही आए और आज सुबह ही आ गए हमें ललकार में पराग ज्योतिपुर बड़ी सुंदर जगह है कामदेव ने इसे अपने हाथों से रचा है दो चार दिन ठहर जाते तनिक भ्रमण कर लेते तब चले आते वैसे भी पराग ज्योतिष पुर के वासी अतिथि सत्कार में बहुत प्रसिद्ध हैं स्थान ग्रहण [संगीत] करो अच्छा तो इस नगरी को कामदेव ने बसाया हां कामदेव की इस नगरी में अकेले घूमने का क्या आनंद हां कोई तुम्हारे जैसी सुंदर प्रेमिका या पत्नी हो तो बात भी है रहा अतिथि सत्कार तो हम नहीं चाहते कि इस नगर के वासी हमें अतिथि समझकर हमारा सम्मान करें हम तो चाहते हैं कि वह हमें अपना जमाई समझकर हमारा आदर करें टो कच तुमरे लोग विजय का घमंड और गौरव मां के गर्भ से लेकर पैदा होते हो ठीक कहती हो परंतु जहां तक हमारा प्रश्न है हमारा यह घमंड और गौरव आर्य की तुलना में दुगुना है क्यों क्योंकि हम केवल आर्य महावीर पुत्र भीम की ही संतान नहीं पराक्रमी असुर माता डंबा के पुत्र भी है अच्छा यह व्यर्थ का वार्तालाप छोड़ो पहले यह बताओ तुम मेरी बुद्धि की परीक्षा चाहती हो या शस्त्र की पहले बुद्धि परीक्षा ही हो जाए कदाचित शस्त्र परीक्षा का अवसर ही ना आए क्योंकि मृतक शरीर तो परीक्षा दे ही नहीं सकता पूछिए कोई भी प्रश्न पूछिए यदि मैं उत्तर ना दे पाई तो अपनी पराजा स्वीकार कर लूंगी तो फिर ध्यान देकर मेरा प्रश्न सुनो मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूं जो कथा के साथ एक प्रश्न भी है तुम्हें उसका ठीक उत्तर देना होगा मैं तैयार हूं कुछ समय पहले एक बहुत कामुक प्रवृत्ति का व्यक्ति शरण दीप में रहता था वह एक वैश्य पर मोहित हो गया वैश्य भी उस पर मर मिटी दोनों ने विवाह तो नहीं किया किंतु उनके अनैतिक संबंध से एक पुत्री का जन्म हुआ वैश्य तो वैश्य ही थी पुत्री के जन्म के पश्चात उसका संबंध किसी और व्यक्ति से हो गया और वह उस व्यक्ति के साथ भाग गई फिर क्या हुआ उस कामुक व्यक्ति ने वैश्य से जन्मी उस पुत्री को पाल पोस करर बड़ा किया बड़ी होकर वह युवती सुंदरता में अपनी माता से भी आगे निकल गई इतनी अधिक सुंदर कामिनी युवती को अपने ही घर में पाकर वह कामुक व्यक्ति उस पर आसक्त हो गया मैं सुन रही हूं उस व्यक्ति ने उस कन्या से कहा वो उसकी पुत्री नहीं उसके पड़ोसी की कन्या है जिनकी मृत्यु हो चुकी है उसने तो केवल उसको पाल पोस करर बड़ा किया है वह युवती उस कामुक व्यक्ति के झांसे में आ गई और दोनों में अनैतिक संबंध हो गए इन संबंधों के फल स्वरूप उस युवती ने एक बालिका को जन्म दिया और अब मैं अपना प्रश्न पूछू पूछो जिस बालिका ने जन्म लिया वो उस कामुक व्यक्ति की पुत्री थी या दोत्र पुत्री पुत्री तो फिर उस बालिका की मां उस व्यक्ति की क्या थी पुत्री दोनों पुत्रियां यह कैसे संभव है दोत्र किंतु एक कन्या एक ही समय में पुत्री और दो इत्री दोनों तो नहीं हो सकती इसका उत्तर यह है कि शास्त्रों के प्रमाण से उस कामुक व्यक्ति ने उन दोनों स्त्रियों में से किसी से भी विवाह नहीं किया था इसलिए उससे उत्पन्न होने वाली संतान से उसका कोई संबंध नहीं बना तो फिर पुत्री या दो इत्री का तो प्रश्न ही नहीं उठता तुम हार गई हो मोरवी तुम्हें अपनी पराजय स्वीकार करनी होगी [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] यदि मेरे ताय श्री श्री कृष्ण ने तुझसे विवाह करने की आज्ञा ना दी होती तो आज मैं तेरा वध कर देता क्योंकि तूने इतने नव युवकों को मौत के घाट उतारा है कि तेरी हत्या करना कोई पाप ना होता बोल तुझे अपनी पराजय स्वीकार है या नहीं मैं अपनी पराजय स्वीकार करती हूं [संगीत] आज से आप मेरे स्वामी है और मैं आपकी दासी मुझसे विवाह करके मुझे कृतार्थ कीजिए जीत घटो कच ने लिया युद्ध और अभिमान हार गई तब मोरवी किए समर्पित प्राण किए समर्पित प्राण उदय हुआ फिर प्रेम का मिले हृदय और [संगीत] हाथ निश्चय दोनों ने किया दे जीवन भर साथ दे जी भर [संगीत] साथ मैं आ गया ताय श्री मैंने मोरवी का अभिमान चूर चूर कर दिया है उसे बुद्धि और बाल दोनों में हराकर आपकी आज्ञा का पालन भी किया और उसका सिर अपने पैरों में भी झुका दिया बधाई हो वत्स बहुत-बहुत बधाई हो हमें विश्वास था कि तुम अवश्य सफल होकर लौटो ग वत्स अभिमान मानव प्रवृत्ति का विकार है सूर्य का दोष उसका ग्रहण है और मानव का दोष अभिमान उसे तो टूटना ही चाहिए मोरवी अपना अभिमान छोड़कर महान हो गई यदि आज्ञा हो तो एक प्रश्न पूछ य [संगीत] श्री आज्ञा पराय तुम तो मेरे अपने हो पूछो क्या प्रश्न है तुम्हारे मन में संसार में ना जाने कितने शूरवीर बलवान और शक्तिमान नवयुवक हैं तो आपने मोरवी का अभिमान तोड़ने के लिए मुझे ही क्यों चुना क्यों क्या मोरवी तुम्हें अच्छी नहीं लगी वत्स अच्छी लगी बहुत अच्छी लगी किंतु मेरे प्रश्न का यह उत्तर तो नहीं किंतु तुम यह प्रश्न क्यों पूछना चाहते हो इसलिए कि आपको कोई कार्य अकारण नहीं करते आपके मुख से निकला हुआ कोई भी शब्द अर्थहीन नहीं होता आपके हर आदेश में सृष्टि का कोई ना कोई भेद अवश्य छिपा होता है मैं आपके उस आदेश के भेद को जानने के लिए उत्सुक हूं तो यूं कहो वत्स कि तुम भविष्य के आंगन में झांक कर देखना चाहते हो तो यूं ही समझ लीजिए किंतु मैं आपके आदेश का कारण अवश्य जानना चाहता हूं तो सुनो व यहां संसार में घटनाएं उसी समय जन्म लेती है जब महान व्यक्तियों का परस्पर मिलन होता है तुम्हारा मोरवी का मिलन और विवाह कोई साधारण घटना नहीं है तुम महाबली भीम और मायाव भाभी श्री हिडिंबा के पुत्र हो और मोरवी स्वयं माया विनी तुम्हारा यह संबंध भविष्य में ऐसी घटनाओं को जन्म देगा जो तुम दोनों की महानता में और वृद्धि [संगीत] करें क्यों व क्या तुम्हारी इस उत्तर से संतुष्टि नहीं हुई मैं धन्य हो गया तो चलो वत्स इंद्रप्रस्थ चलते हैं तुम्हारा विवाह वही संपन्न होगा यदि आज्ञा हो तो मैं माता श्री के पास हो आऊ अवश्य जाओ वत्स विवाह से पहले माता का आशीर्वाद लेना यूं भी तुम्हारा परम धर्म है मैं केवल आशीर्वाद लेने नहीं जा रहा हूं मेरे विवाह में उनकी उपस्थिति अनिवार्य है मैं उन्हें अपने साथ इंद्र प्रस्थ लाने जा रहा हूं किसी भी बहाने से माता के चरण छूना स्वर्ग के द्वार खटखटाने के समान होता है वत्स रहा प्रश्न भाभी श्री को इंद्रप्रस्थ लाने का तो अवश्य जाओ प्रयत्न करके देख लो आयुष्मान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] भव महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत i

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...