[संगीत] [संगीत] महाभारत राधा [संगीत] श्री [संगीत] राता श्री आओ अनुज यह बाण विश् में किसके लिए बुझाए जा रहे हैं उस महायोद्धा के कई नाम है अनुज दे व्रत गंगापुत्र भीष्म मेरी आत्मा के माथे पर अपमान का [संगीत] हस्ताक्षर उनका वद तो आपकी ओर से मैं करूंगा प्रता श्री मैं करूंगा नहीं अनुज अपमान का प्रतिशोध तो स्वयं ही लेना पड़ता है वो मेरा ऋणी है मैं हर क्षण के साथ अपने अपमान की पूरी कहानी जीता हूं काशी की राजकुमारी अंबा के स्वयंबर का वो दिन और उस दिन के पश्चात बीतने वाला कोई दिन भी अभी तक बीता नहीं है लगातार पीत रहा है लगातार पीत रहा है मैं आंखें बंद करता हूं तो काशी की वह सभा मेरे सामने राक्षसी की भांती हाथ उठा उठा कर हसने लगती है और मेरी छाती पर मेरे अपमान का ताल मृत्य करने लगता है सारी राज्यसभा वीरों महावीर से भरी हुई है के एक व्यक्ति के आने से सारे होठों की मुस्कान मुर्झा जाती है गंगापुत्र भीष्म पधार रहे हैं लगता है भीष्म प्रतिज्ञा राजकुमारियों की सुंदरता के सागर में डूब गई प्रतिज भी काज की रही होगी सान इस स्व में मैं हस्तिनापुर नरेश महाराज विचित्र वरी का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं काशी राजकुमारियां शताब्दियों से कुरुवंश में ब्याह के ली जाती रही है आज भी यही होगा मैं इन तीनों राजकुमारियों को अपने छो छोटे भाई विचित्र वरी की रानिया बनाने के लिए ले जा रहा हूं राजकुमारियों का स्वयंवर रचाकर आपने जो हस्तिनापुर का अपमान किया है मैं उसके लिए आपको क्षमा करता हूं परंतु राजकुमारियों को अपना वर चुनने का अधिकार है भीष्म इन राजकुमारियों को यह अधिकार नहीं है शाल वराज और यदि है तो मेरे सिवा और कोई स्वयं बर सभा में बैठने योग्य नहीं भीष्म अपनी जुबान को लगाम दो मैं केवल घोड़ों को लगाम देता हूं और शाल राज तुम यदि मुझसे जीवन दान पाकर ना जी रहे होते तो भरी सभा में इस प्रकार मेरी बात काटने का कड़ा दंड देता तुम्हें मैं इस बरे दरबार में घोषणा करता हूं कि मैं राजकुमारियों को लेने आया हूं और ले जा रहा [प्रशंसा] [संगीत] हूं [संगीत] क्या कोई भीष्म को रोकना चाहता है रोकना चाहता है भीष्म को राजकुमारियों को जाने की आज्ञा दीजिए काशी [संगीत] नरेश [संगीत] [संगीत] भीष्म सारथी रस घुमाओ शाल्व राज हां मैं [संगीत] शाल्व मेरे पास बाणों की कमी नहीं है शाल आज पर दिया हुआ जीवन में वापस लेना नहीं चाहता इसलिए एक बार फिर क्षमा करता हूं सारथी हस्तिना पर [संगीत] चलो [संगीत] क्या मैं एक विनती कर सकती हूं राजमाता केवल मां कहो अंबा परंतु मेरी विनती तो राजमाता से है आज्ञा है परमवीर गंगापुत्र भीष्म के आने से पहले ही मैं मन ही मन शाल्व नरेश को अपना पति मान चुकी थी राजमाता तो तुमने मुझे यह बात बताई क्यों नहीं राजकुमारी भय गंगापुत्र आपका [संगीत] भय तब तो विचित्र वीर का विवाह अंबा से नहीं हो सकता माते तुमने ठीक कहा भीष्म तुम निश्चिंत रहो राजकुमारी तुम्हें आदर के साथ शाल भिजवाने का प्रबंध किया जाएगा भीष्म से कह देना हम हारी हुई वस्तु दान में स्वीकार नहीं करते और उनसे यह भी कह देना कि राजकुमारी को यहां भेजकर उन्होंने हमारा अपमान किया है मेरा अपमान किया है गंगापुत्र भीष्म ने यह मुझे श्याल नरेश के पास भेजते और ना ही मेरा इतना बड़ा अपमान होता इसलिए गंगापुत्र भीष्म को आदेश हो कि अपने क्षत्रीय धर्म का पालन करते हुए मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें महाराज की जय हो परंतु मैं प्रतिज्ञा बध हूं महाराज मैं विवाह कर ही नहीं सकता विवाह नहीं कर सकते तो काशी से यहां लाए क्यों मैंने तो काशी दरबार में यह घोषणा कर दी थी कि मैं केवल हस्तिनापुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं मेरा हरण ऐसे समय में किया गया था महाराज जब मेरे हाथ में वरमाला थी मेरी बहनों ने आपको स्वीकार किया परंतु मैं आपको स्वीकार नहीं करती अब मैं वह माला गंगापुत्र भीष्म के गले में डालना चाहती हूं यह संभव नहीं है देवी क्यों संभव नहीं है क्योंकि मैंने ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की है घायल नागिन घायल चेरनी और अपमानित स्त्री से डरना सीखो गंगापुत्र तुम वचन बद्ध हो इसलिए मेरे अपमान के घाव पर मान का फाया नहीं लगा सकते तो आज इसी गुरु राज दरबार में में हस्तिनापुर नरेश को साक्षी मानते हुए मैं भी प्रतिज्ञाबद्ध होती हूं गंगापुत्र भीष्म मैं तुम्हें अपने अपमान के लिए कभी क्षमा नहीं करूंगी चाहे इसके लिए मुझे जन पर जन क्यों ना लेने पड़े तुम्हारी मृत्यु का कारण बनकर मैं अपने इस अपमान का बदला अवश्य [संगीत] लूंगी अंबा अपने अपमान का नरक अपने आंचल में लिए हुए तपस्वी के एक आश्रम में पहुंची तपस्वी ने उसकी कथा सुनने के पश्चात उससे कहा कि स्त्री के केवल दो ही आश्रय हैं पति या पिता अंबा ने कहा कि प्रश्न आश्रय का नहीं है प्रश्न है अपमान और उसके भुगतान का अंबा की खोज में नहीं थी वह तो प्रतिशोध के मार्ग की यात्री थी हम बड़े विचित्र समाज में जी रहे हैं अनुज नारी के मान अपमान पर भी पुरुषों का अधिकार है ना उसका अपना व्यक्तिगत मान है ना अपमान परंतु अंबा के लिए स्वीकारने नहीं था अपमान तो उसका हुआ था तो उसके प्रति शोध पर भी केवल उसी का अधिकार था तो उसने तपस्वी से कहा हे मुनिगर मैं अब काशी तो नहीं जा सकती वहां मुझे बंधु बांधव का तिरस्कार स्वीकार करना पड़ेगा मैं शल के पास भी नहीं जा सकती क्योंकि वे मुझे पहले ही स्वीकार कर चुके हैं मेरे लिए तो केवल एक ही मार्ग खुला रह गया है और वह मार्ग है तपस्या का हे राजकन्या तपस्या का मार्ग सरल नहीं है जानती हूं किंतु कोई और मार्ग खुला ही ना हो तो उसी मार्ग पर चलना पड़ेगा ना जो खुला हुआ है चाहे वह कितना ही कठिन क्यों ना हो हे मुनिवर तप का मार्ग अपमान को सहन करने के मार्ग से अधिक कठिन तो नहीं हो सकता ना किंतु पुत्री [संगीत] व हे परम तपस्वी राजशी होत्र वाहन आपका हार्दिक स्वागत है स्थान ग्रहण कीजिए मुनि गण कुछ चिंतित लग रहे हैं समस्या कुछ गंभीर है यह काशी के राजकुमारी अंबा [संगीत] है अंबा की कथा सुनकर राज श्री होत्र वाहन सन्नाटे में आ गए और बोले हे पुत्री मैं तेरे जन्म से पहले ही तपोवन चला गया था इसलिए तू मुझे नहीं जानती मैं तेरा नाना हूं तू अपने पिता के घर ना जा तू परशुराम जी के पास चली जा वे ही तेरे शोक और संताप का उपचार कर सकते हैं वे कहां मिलेंगे ऋषिवर महेंद्र पर्वत पर जा पुत्री वे मेरे बाल सखा और सहपाठी हैं आयुष्मान भव आसन ग्रहण कीजिए [संगीत] ऋषिवर हे ब्रह्म ऋषि यह मेरी देवती अंबा है मैं इसे आप ही के पास भेज रहा था कि इसके दुख का उपचार यदि किसी के पास है तो वे आप ही हैं आयुष्मान भव क्या समस्या है पुत्री गंगापुत्र भीष्म ने इसका अपमान किया है इसका हरण किया फिर इसे स्वीकार करने से नकार दिया है ऋषिवर यदि ऐसा है तो भीष्म को से स्वीकार करना ही पड़ेगा महाभारत म महाभारत महाभारत महाभारत
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