Saturday, 3 January 2026

विराट नरेश ने पांडवों को कैसे पहचाना था Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत भूमि पति महाराज अधिराज पधार रहे [संगीत] हैं कं ज्वारी का यह साहस क्षत्रियों के वस्त्र पहन कर वो स्थान ग्रहण किए हुए हैं जो अतिथि राजाओं के लिए नियत है पिता श्री इनके स्थान ग्रहण करने से इस राज्यसभा का मान बढ़ गया है युवराज युवराज ठीक कह रहे हैं महाराज आपने जिस व्यक्ति को यह स्थान ग्रहण करने से रोका है यह तो वह महात्मा है कि यदि इंद्र के सिंहासन पर विराजमान हो जाएं तो स्वयं इंद्र इनका आभार प्रकट करें कि इन्होंने उनके सिंहासन पर विराजमान होकर उनके सिंहासन का मान बढ़ाया है इनका इस राज्यसभा में होना इस राज्यसभा के लिए गौरव की बात है क्योंकि यह जेष्ठ कुंती पुत्र सम्राट युधिष्ठिर है महाराज सम्राट युधिष्ठिर सम्राट युधिष्ठिर समराट युधिष्ठिर युध [संगीत] सम्राट युधिष्ठिर यह सम्राट युधिष्ठिर है तो अब तुम यह कहोगे कि यह रसोइया बल्लभ सर्वश्रेष्ठ गदाधारी भीम है और तुम स्वयं द्रोण शिष्य अर्जुन हो निसंदेह महाराज और यह मेरे अनुज नकुल और सदेव [संगीत] है आपके प्रति अपना हार्दिक आभार प्रकट किए बिना चले जाना हमने उचित नहीं जाना महाराज आपने हम पर जो उपकार किया है उसे हम पांचों कुंती पुत्र सदैव याद रखेंगे क्योंकि हमने अपना अज्ञातवास आपकी कृपा की छत्र छाया में बिताया है अपनी राज्यसभा में इनका स्वागत कीजिए पिता श्री भारतवर्ष का इतिहास सदैव आपका नाम आदर सहित लेगा कि आप साल भर आदरणीय पांडवों के अतिथ र यदि य पांडव है तो महारानी द्रौपदी कहां है माता श्री के प्रसाद के रूप में आपने उन्हें साल भर देखा है पिता श्री जेष्ठ कुंती पुत्र हे धर्मराज हे राजर्षि हे सम्राट युधिष्ठिर अनजाने में आपको कंक मानकर मैंने हर दिन आपका अपमान किया है महारानी द्रौपदी को सररी जानकर अपमान किया है आपके महारथी ताओं का अपमान किया है आप दया और धर्म के प्रतिबिंब है मुझे क्षमा कीजिए महाराज मुझे क्षमा कीजिए आप या नहीं बल्कि उस राज सिंहासन पर विराजी क्योंकि इस सभा में केवल वही एक ऐसा स्थान है जिस पर आप विराजमान हो सकते हैं मेरा विनम्र निवेदन स्वीकार कीजिए सम्राट युधिष्ठिर स्वीकार कीजिए हे राजन वो क्षत्रिय नहीं हो सकता जो अपने आथ थे की राजसभा में स्वयं उसके सिंहासन पर बैठ जाए वह आपका स्थान है अपना स्थान ग्रहण कीजिए महाराज कुछ ना कुछ तो आपको स्वीकार करना ही पड़ेगा ट हम पांचों भाई आपका स्नेह तो स्वीकार कर ही चुके हैं राजन ण शिष्य ने मेरे पुत्र को जीवन दान दिया है सम्राट इसलिए मैं अपने स्नेह पर अपने हस्ताक्षर के रूप में अपनी पुत्री उनकी भेट करने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहता हूं उत्तरा उत्तरा मेरी शिष्या है महाराज मेरी शिष्या उसमें मैंने सदैव अपनी पुत्री का रूप देखा है परंतु मैं आपका पुरस्कार अस्वीकार भी तो नहीं कर सकता यदि राजकुमारी को कोई आपत्ति ना हो तो मैं उन्हें अपने पुत्र वधु के रूप में स्वीकार करता हूं मेरा पुत्र श्री कृष्ण का हिता है और हे राजन यदि संसार के सारे महारती एकत्रित हो जाए तो मेरा पुत्र अभिमन्यु सारे महारथियों में अपनी तेज द्वारा दूर से पहचाना जा सकता है दूर से आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत

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