[संगीत] महाभारत आपको जाने की क्यों पड़ी है जाना तो पड़ेगा ही अर्जुन पिताश्री और माता श्री को समझाना इतनी कठिन बात नहीं है परंतु सुभद्रा बड़ी टेढ़ी खीर है जाने में जितने अधिक दिन लगाऊंगा उतने ही अधिक प्रश्न करेगी दाऊ से तो डर के मारे कोई प्रश्न करता नहीं तो फस जाता हूं मैं और फिर छोटी बहन के अधिकार यूं भी कुछ अधिक ही होते हैं लगता है सुभद्रा से कुछ अधिक ही स्नेह है आपको उससे तो सभी को अधिक स्नेह है दाऊ तो हर दूसरे दिन मुझसे लड़ते रहते हैं उसके लिए देखो कृष्ण मैं जेष्ठ भ्राता हूं इसलिए सुभद्रा की देखभाल पर मेरा अधिकार तुम्हारे अधिकारों से अधिक तो होना ही चाहिए कृष्ण अब तो सो जाओ दाऊ मैं अर्जुन को यह बता रहा था कि आप स्वयं इस बात को मानते हैं कि सुभद्रा की देखभाल पर मेरा अधिकार आपसे अधिक है यह मैंने कब कहा दाऊ मैं हूं या तुम दाऊ तो आप ही है दाऊ परंतु मैं भी कुछ तो अवश्य ही हूं यह मैंने कब कहा कि तुम कुछ नहीं हो मैं अभी से कह देता हूं अर्जुन तुम साक्षी हो नहीं तो यह महाशय मुकर जाएंगे कि दाऊ ऐसा आपने कब कहा था सुभद्रा के जीवन के विषय में सारे निर्णय मैं लूंगा मैं देख लिया ना अर्जुन अब इनसे कोई कुछ कह सकता है परंतु दाऊ अभी तो सो जाइए कि आपका जागते रहना कुरु राज घराने के स्वादिष्ट भोजन का अपमान है और फिर सुभद्रा के जीवन के विषय में निर्णय लेने के दिन अभी सामने थोड़ी ना खड़े हैं सो जाइए तो स्वयं तुम क्यों जाग रहे हो आप तो जानते हैं दाऊ कि जब मैं सोया हुआ दिखाई देता हूं तब भी जागता ही रहता हूं कान लगा केर सुनिए दाऊ आज तो स्वयं रात भी जाग रही है तुला की डंडी गंगापुत्र भीष्म की छाती में गड़ी हुई है तुम चिंता ना करो अर्जुन यदि लाठी मारने से पानी को अलग होना है तो लाठी खाकर वह अवश्य अलग हो जाएगा यह जीवन सागर के मंथन की घड़ी है अमृत को विष से अलग हो ही जाना चाहिए महाराज धृतराष्ट्र पधार रहे [प्रशंसा] हैं आइए महाराज आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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