[संगीत] महाभारत आप किस सोच में पड़े हैं महाराज महाराज नहीं वासुदेव मुझे भाई कहिए मेरे और आपके बीच तो राजमुकुट दीवान नहीं बन सकता और यदि बन सकता है तो मुझे यह राजमुकुट नहीं चाहिए जो मुझे मेरे भाई से अलग कर दे मैंने अपनी भूल मार ली भ्राता श्री परंतु आपकी राजनीति शुद्ध है आपके भाई आपसे कभी अलग नहीं होंगे अब तो बताइए किस सोच में पड़े थे मैं यह सोच रहा था कि नारद जी तो पिता श्री का यह आदेश सुना गए हैं कि मुझे राजय यज्ञ करना चाहिए परंतु क्या ज्येष्ठ पिता श्री के जीवन काल ही में मेरे लिए राज यज्ञ करना उचित होगा उचित क्यों नहीं होगा आप स्वयं तो अलग नहीं हुए हैं आपको तो अलग किया गया है स्वयं महाराज धृतराष्ट्र ने आपका राज्याभिषेक भी करवाया था आप हस्तिनापुर के आधीन नहीं है इंद्रप्रस्थ एक अलग और स्वतंत्र राज्य है और उसके राजा को राजसूय यज्ञ करने का अधिकार है आपके राज्य में प्रजा सुखी है इंद्र की कृपा से वर्षा अच्छी होती है कोठार अनाज से भरे हुए हैं जन समुदाय रात्रि के प्रहर अपने घर के दरवाजे बंद नहीं करते क्योंकि चोरों का खटका नहीं चोरी तो तब होती है भ्राता श्री जब किसी के पास सब कुछ हो और किसी के पास कुछ भी ना हो और आपके न्याय ने अपने राज्य में यह नहीं होने दिया यात्री बे घटक यात्रा पर जाते हैं क्योंकि राज्य के सारे मार्ग दर्पण की भा स्वच्छ है उन पर ठगों की धूल नहीं पड़ती राजकीय कर न्याय की मर्यादा भंग नहीं करते आपके कार्यकर्ता घूस नहीं खाते तो आज आपके अतिरिक्त राजसूय यज्ञ करने का अधिकार किसी और को है ही नहीं सम्राट कहलाने का अधिकार तो केवल आपको है भ्राता श्री केवल आपको इसलिए राजसूय यज्ञ अवश्य की [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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