Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने अपने मित्र भूषण नाग की रक्षा की Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 284 Pen Bhakti

[संगीत] मुझे शीघ्र ही मेघसर तक पहुंचना होगा यदि उसने दिव्य पंख प्राप्त कर लिया तो अनर्थ हो जाएगा अरे आपको तो अभी हम नागों के लिए यज करना है खग विद्या सिद्ध करनी है जीवित रहना चाहते हो ना तो हम नागों का आचार्य बनना होगा बालक लो यह पंख लो मुझे क्षमा करें आचार्य जी मुझे मेरे पिता पंच फन को बचाना है पंखी से मत देना पुत्र ये मत [संगीत] देना ले जाओ इस आचार्य को यज्ञ स्थल पर और प्रतीक्षा करो मेरी छोड़ दो मुझे छोड़ दो मुझे लाओ बालक यह दिव्य पंख मुझे दे [संगीत] दो आप मेरे पिता श्री को मुक्त तो कर देंगे ना [संगीत] विस्टर विकराल हूं मैं शत्रुओं का काल हूं मैं अब मेरे पास भी उड़ने की शक्ति होगी लंकेश रावण और वाली प्रसन्न हो जाएंगे क्योंकि योजना के अनुसार मैंने गरुड़ का दिव्य पंख प्राप्त कर लिया है अब इस दिव्य पंख से केवल युवराज वाली ही नहीं अभी तो समस्त असुर भी उड़ पाएंगे विर विकराल उड़ेगा आसमान की ऊंचाई तक विर विकराल हूं मैं अब मेरे पिता श्री को मुक्त कर दीजिए ना कहां है वो मुझे मिलना है उनसे अपने पिता से मिलना चाहते हो वो रहे पुत्र भूषण मेरे लाल पुत्र भूषण दादी दादी दादी आप यहां कैसे पुत्र जिस दिन तुम गरुण राज्य के लिए निकले थे उसी दिन इसने मेरा भी अपहण कर लिया था [संगीत] य गरुण का दिव्य पंख मेघसर के पास कैसे पुत्र भूषण यह तुमने क्या किया य दिव्य पंख लाकर इसत को दे दिया पुत्र मुझे मुक्त कराने के लिए तुमने गरुड़ के सर्वनाश का मार्ग खोल दिया मुझे क्षमा कर दे पिताश्री मैंने आपके तुमने य दिव्य पंख प्राप्त कैसे किया मैं हनुमान के साथ गरुण राज्य गया था जहां जटायु जी से हमें ज्ञात हुआ कि उन्होंने आपका अपहरण नहीं किया हनुमान सारी परिस्थितियों को समझकर सब कुछ ठीक कर पाते इसी मध्य गरुड़ राज्य के सेनापति चित्रकेतु जी जो पहले से ही मेघा सुर से मिले हुए थे उन्होंने मेरा अपहरण कर मेघसर को मुझे सौंप दिया और मेघसर ने आप मुक्त कर देने के प्रतिफल के रूप में मुझे गरुड़ का दिव्य पंख चुड़ने के लिए विवश कर दिया और मुझसे यह अपराध हो गया ये तुमने उचित नहीं किया पुत्र हनुमान ने तुम्हें अपना मित्र बनाया और तुमने उसके साथ छल किया कपट किया उसके साथ पंच फन यह मेरा प्रतिशोध है तुमने मुझे बंदी बनाया था आज तुम्हारी मां और तुम मेरे बंदी हो मेरे बंदी मेघा सुर के और तुम्हारा पुत्र उसके साथ क्या होगा यह तुम्हे शीघ्र ही ज्ञात हो जाएगा विडर विकराल हूं मैं शत्रुओं का काल हूं मैं मेघसर को दिव्य पंख देकर मैंने बहुत बड़ी भूल कर [संगीत] दी आशा करता हूं हनुमान कि तुम समय रहते लौट आओगे आपको अभी भी उस शल करने वाले हनुमान से आशा है यह मेघसर भी मुझसे छल कर रहा है उसने मुझे सहायता का वचन दिया था किंतु अब तक कोई नहीं [संगीत] आया अभ यह जंगली स्वान भी आ गए जंगली सावधान पीड़ा के कारण हाथ भी नहीं उठ पा रहे हैं मुंह से बोल नहीं निकल रहे हैं सर आ गए हैं छोड़ दो हमें चलो छोड़ दो हम लोगों को चल चल बलि देदी यह तो हमें यहां बलि देने लाए हैं छोड़ दो हमें हनुमान के साथ ल करने का उचित डन मिल रहा है मुझे मुझे कुछ भी हो जाए किंतु मेरे पिता श्री और दादी मां दोनों जीवित रहने चाहिए हनुमान मैं तुमसे सहायता मांगने का पात्र नहीं हूं किंतु अगर हो सके तो मेरे पिता श्री और दादी मां दोनों को बचा ले लेना ऐसा मत कहो पुत्र चुप चलो बालक सबसे पहले तुम्हारा वध [संगीत] होगा काले मेघ घिर रहे हैं कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा है ऐसा मत करो पहले मुझे मार दो मैं अपने सामने अपने पुत्र को मरता हुआ नहीं देख सकता नहीं मेरे दोनों बच्चों को छोड़ दो इन दोनों से पहले मुझे मार दो ले आओ उसे चलो चलो इस नहीं छोड़ दो मेरे को नहीं शिला पर शीष टिका बालक छोड़ दो मेरे पात्र को छोड़ दो भूषण मेरे पत्र पूषण पत्र मुझे क्षमा कर देना हनुमान मैंने मेघसर को पं देकर बहुत बड़ी भूल कर दी हनुमान आ मेघों के कारण दृष्टि भी अवध हो रही है कोई अनर्थ होने से पूर्व ही नागलोक पहुंचना आवश्यक है हे भोले बाबा अब अब आप ही मुझे मार दिखाइए [संगीत] रुको मुझे प्रार्थना करनी [संगीत] है मरने वाले की अंतिम इच्छा पूरी की जाती है मुझे भी मृत्यु से पूर्व भगवान से प्रार्थना करनी है ठीक है शीष झुका के ही प्रार्थना करो और शीघ्र अधिक समय नहीं है तुम्हारे पास अति शीघ्र [संगीत] करो छोड़ दो मेरे पात्र [संगीत] को [संगीत] हनुमान हमारी [संगीत] सहायता हमारा दुर्भाग्य है पुत्र हनुमान तक हमारी ध्वनि नहीं पहुंच रही है हनुमान [संगीत] बहुत हो गई प्रार्थना अब मृत्यु के लिए प्रस्तुत हो जाओ हनुमान [संगीत] हा [संगीत] मित्र हनुमान हनुमान आ ही गए हे प्रभु आपका कोटि कोटि धन्यवाद हनुमान प्रभु आपका [संगीत] धन्यवाद इस वानर का अंत कर दो नाग वरो [संगीत] सखा [संगीत] हनुमान जटायु जी ने मेरा अपहरण नहीं किया अभी तो मायावी काल ने नहीं आया था उसी ने गों और नागों के बीच शत्रुता का पुन बीजारोपण कर दिया कोई कितना भी प्रयास कर ले पंचन जी सत्य का प्रकाश असत्य के अंधकार को भेद करर सत्य प्रकाशित हो ही उठता है मुझे पहले ही विश्वास था कि महाराज जटायु ऐसा कर ही नहीं सकते हा हनुमान शत्रु गणों और नागों के बीच व्या अविश्वास का लाभ उठाकर आम नागों और गणों को भड़का कर यह सब किया [संगीत] [संगीत] है मित्र भूषण हनुमान मैं मित्र कहलाने के योग्य नहीं हूं मैंने मेरे पिता श्री की मुक्ति के लिए तुम्हारे साथ छल किया मुझे दंड मिलना [संगीत] चाहिए मैंने मेरे पिता श्री की मुक्ति के लिए तुम्हारे साथ छल किया मुझे दंड मिलना चाहिए मित्र भूषण विवशता से और अपनों के मुंह में किए गए कार्य के लिए तुम अपने आप को दोषी मत समझो मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई भी द्वेष भावना नहीं है आज भी तुम मेरे मित्र हो जो न मित्र दुख होई दुखारी तिन ही बि लोकतक भारी जेन सुनही आरत के बानी तिन ही लोकतक हानी जिनके मन दाया नहीं व्याप तिनके दरस ताप त्रय काप मंगलकारी मारुती महिमा रखते सदा दया और करुणा था महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाब हनुमान कभी-कभी लोग अपनी भूल को इसलिए स्वीकार नहीं करते क्योंकि उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि इससे वह छोटे हो जाएंगे अपनी भूल को स्वीकार कर लेने से कोई छोटा नहीं होता भूल को स्वीकार करना दुर्बलता का नहीं अपितु साहस का परिचायक है जो विनम्रता से अपनी भूल को स्वीकार करके सत्य के पथ को चुनता है वही बड़ा होता है वही महान [संगीत] होता हनुमान यह षड्यंत्र मेघसर कालनेमी और चित्रकेतु का था सेनापति चित्रकेतु ने अपनी गरुड़ जाति के साथ छल किया है और उन्होंने ही तुम्हें इस षडयंत्र का दोषी ठहराने का प्रयत्न किया था हां मित्र मुझे पहले ही ज्ञात हो गया था चित्रकेतु जी के षडयंत्र के बारे में किंतु मित्र हमें मेघसर को पहले रोकना होगा समय भी बहुत अल्प है हमारे पास कहां है मेघसर मैं बताता हूं मेघसर कहां [संगीत] है [संगीत] आप यहां से अंदर नहीं जा [संगीत] सकते सैनिक मति भ्रष्ट हो गई है तुम्हारी मैं तुम्हारा राजा पंच फन हूं हटो भीतर जाने दो हमें हमारे एक ही राजा है मेघसर और कोई नहीं अपनी भलाई चाहते हो तो लौट जाओ यहां से अन्यथा तुम में से कोई जीवित नहीं बचेगा चले जाओ यहां से चले [संगीत] जाओ [संगीत] यह अपने राजा के साथ ऐसा विचित्र व्यवहार कैसे कर सकते हैं अवश्य ही किसी ने इन्ह सम्मोहित कर दिया है

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