Thursday, 1 January 2026

महाराज केसरी को बाली पर क्रोध क्यों आया Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 309 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ [संगीत] हे प्रभु इस युद्ध का हर क्षण मेरे लिए भयावह है किंतु ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे महारानी जी को इस युद्ध के परिणाम की कोई चिंता ही नहीं पुत्र मां की अवज्ञा करें अपमान करें किंतु फिर भी मां पुत्र के कष्ट देखकर विचलित होती है परंतु इन्हे तो जैसे वाली के जीवन का कोई भय ही नहीं कहीं मेरी इच्छा अधूरी ना रह जाए वानर बालक की आधी शक्तियां बाली को प्राप्त हो गई फिर भी वो उसका वद नहीं कर पा रहा है मुझे किसी प्रकार बाली की सहायता करनी होगी मार जाओ जाकर बाली की सहायता करो अभी पूरे दिन का युद्ध शेष है कहीं यह ना हो जाए के बाली उस वानर बालक के हाथों परास्त हो जाए यह ना सोचना दशानन रावण को बाली की चिंता है ना दशानन रावण को केवल अपना उद्देश्य पूर्ण करने की चिंता है और यह उद्देश्य तभी पूर्ण होगा जब उस वानर बालक का वाद होगा जाओ जो आ गया लंकेश आओ हनुमान बाली अस्त्र हीन रहकर भी तुम्हारा सामना करने में सक्षम है आगे बो युगराज हनुमान की रक्षा करो हनुमान की रक्षा करो अभी पता चल जाएगा मूर्खों कि किसका अंत होगा बाली को नष्ट करना इतना सरल नहीं है वाली अस्त्र हीन हनुमान के समक्ष खड़ा है उसके वध करने का सम्मिलित स्वर गूंज रहा है किंतु महारानी जी के मुख पर अब भी चिंता का कोई भाव नहीं है अवश्य इसमें कोई रहस्य है जो मुझे ज्ञात नहीं महारानी जी अपने पुत्र को संकट में देखकर आपका हृदय विचलित हो उठा होगा वाली भैया आप चिंता मत करिए आपके पास अस्त्र नहीं है तो हनुमान भी अस्त्र विहीन होकर आज से युद्ध करेगा मर्कट मेरे बल में तुम्हारी आदि शक्ति मिल जाने के पश्चात अस्त्र विहीन होकर भी महानतम वाली तुमसे कहीं अधिक शक्तिशाली है तुम किसी भी अवस्था में मेरा सामना नहीं कर सकते मैं इस पर्वत को ही अस्त्र बना लेता [संगीत] [संगीत] हूं [संगीत] हनुमान हनुमान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] यदि वाली भैया ऐसे ही पर्वत उठा उठाकर उनसे मुझ पर वार करते रहे तो हनुमान अपना बचाव कर लेगा परंतु उससे यहां एकत्रित जन समूह को क्षति पहुंच सकती है हनुमान को अपना आकार परिवर्तित कर वाली भैया को रोकना होगा [संगीत] वानर तुमने अपना आकार सूक्ष्म कर मुझ मारीच को तुम पर वार करने का अवसर दे दिया पुर्ता अन्याय है यह वा युद्ध भूमि में अ की सहायता ले सकता य नियत अवश्य हुआ था किंतु यह युद्ध के नियमों के विरुद्ध है अन्याय है यह सु शक्तियों ने वाली को भी उन्हीं के समान बना दिया है कैसी विडंबना है एक पिता की कैसी विडंबना है क्या मांगे वो क्या प्रार्थना करे प्रभु से अपने पुत्र वाली के जीवन की प्रार्थना करें अथवा असुर वाली की मृत्यु भागे प्रभु से महाराज रि हमें प्रभु से अपने तीनों पुत्रों के जीवन की रक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए मृत्यु हो तो केवल बाली के अंतर बसी कुटिलता की ईश्वर उसका नाश करे बाली को सनमार्ग पर ले आए यह युद्ध बाली और हनुमान के मध्य है इसमें किसी और का हस्तक्षेप मैं स्वीकार नहीं कर सकता मैं यह अन्याय होते नहीं देख सकता इससे मुग होने के लिए तो हनुमान को अपनी देह का आकार बढ़ाना नहीं होगा [संगीत] [संगीत] सा आ मैंने अपना आकार बढ़ाया तो वाली भैया पहाड़ का वार करेंगे जिससे अनेकों जीवन हताहत हो सकते हैं आकार छोटा रखता हूं तो यह राक्षस मुझे उठा लेता है और अभी कहां ले जा रहा है यह हनुमान को यह नीतिगत नहीं है वाली यह युद्ध तुम्हारे और हनुमान के मध्य है इसमें असरों का तुम्हारा साथ देना न्याय के विरुद्ध है असुरों का इस युद्ध में होना दोनों के लिए ही शुभ नहीं है भाई से भाई का युद्ध करवाकर अवश्य इसमें इनका कोई लाभ होगा महारानी जी के दोनों पुत्रों के जीवन संकट में है हर अवस्था में एक पुत्र की मृत्यु अवश्य होगी फिर भी यह शांत क्लेश का कोई चिन्ह तक नहीं है उनके मुख पर असुरो को तो हनुमान अनेकों बार पराजित कर चुका है वो विजय होगा मेरे वाली का व नहीं करेगा और सुग्रीव की भी रक्षा कर [संगीत] लेगा मैं अब इस अनुचित युद्ध को रोक कर ही रहूंगा स्वामी कहां जा रहे हैं आप रुकिए स्वामी कहां जा रहे हैं पुत्र कितना भी शक्तिशाली प्रतापी क्यों ना हो परंतु कोई यदि उसे हानि पहुंचाए तो माता-पिता का व्यतीत होना स्वाभाविक है जैसे अभी हनुमान को संकट में देखकर केसरी और अंजना हो रहे हैं केसरी हनुमान के प्रति हो रहे अन्याय को देखकर इतने आहत है कि स्वयं संकट में स्थिति में प्रवेश करने में उन्होंने तनिक भी संकोच नहीं किया [प्रशंसा] है [प्रशंसा] [संगीत] पिता श्री कहीं वो वाली भैया पर वार ना कर बैठे मुझे उ रोकना ही होगा रुक जाइए पिता श्री मत जाइए नहीं पुत्र हनुमान जब असुर मारीच वाली की सहायता कर सकता है तो मैं भी अपने पुत्र के पक्ष में खड़ा हो सकता हूं मैं अपने नेत्रों के समक्ष अपने पुत्र के साथ अन्याय होते हुए नहीं देख सकता स्वागत है काका केसरी जी आपका भी स्वागत है यदि आप भी अपने पुत्र के समान मृत्यु लोग जाना चाहते हैं तो अवश्य आइए महानतम वाली आपको रोकेगा [संगीत] नहीं परंतु तू इतना स्मरण कीजिए युद्ध से पूर्व मैंने यह स्पष्ट किया था कि मैं युद्ध में असुरों का सहयोग लूंगा और आपके पुत्र ने स्वीकार भी किया था और उसने स्वयं एका की युद्ध करने का चुनाव किया था इसलिए मैं उस पर कोई अन्याय नहीं कर रहा हूं हां पिता श्री रुक जाइए सब मेरी इच्छा अनुसार ही हो रहा है यदि आप मेरी इस में सहायता करने आए तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और मुझे पराजय स्वीकार करनी होगी पिताश्री [संगीत] [प्रशंसा] पिता श्री आप चिंता मत करिए मैं इस चुनौती का सामना करने के लिए सक्षम हूं आपका आशीर्वाद ही मेरे लिए पर्याप्त है कृपया लौट जाइए [संगीत] नहीं पिता श्री यदि आपने वाली भैया पर आक्रमण किया तो हम सुग्रीव भैया की रक्षा नहीं कर पाएंगे ठीक कह रहा है आपका पुत्र हनुमान काका केसरी जी यदि आपने मुझ पर वार किया तो आपके पुत्र की ही पराजय होगी बड़े आए थे मुझसे महानतम वाली से युद्ध करने विजय भवा पुत्र हनुमान को अपने पिता का अपमान स्वीकार नहीं [संगीत] [संगीत] स्वामी ये असुर पक्षी रूप धरकर मेरी दृष्टि बाधित कर रहा है [संगीत] हे [संगीत] ज [संगीत] शिलाखंड के टुकड़ों से सभी आहित हो सकते हैं अब इन्ह कैसे रोकू

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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