Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण से सुदामा को मिला अमूल्य उपहार Hitanshu Gagan Vighnaharta Ganesh Ep 777 PenBhakti

[संगीत] नहीं प्रभु नहीं प्रभु प्रभु प्रभ मेरे पुत्र भूखे हैं प्रभु तो भला मैं भोजन कैसे ग्रहण कर सकता [संगीत] हूं तुम दया के सागर तुम रक्षक सब स्वामी तुम सब परिर से दूर रहने पर परिवार की चिंता बढ़ जाती है तुम्ह मुझ पर विश्वास [संगीत] है य नाराय अपने मित्र के स्नेह की भक्त के भक्ति की लाज रख ली आपने हे दया निधान आपको कोटि कोटि [संगीत] धन्यवाद अब तक तो भाभी मां और बालकों ने भी भोजन कर लिया [संगीत] होगा क्या हुआ अभी भी कोई संदेह है तुम्हारे मन में या अपने मित्र के हाथों से भोजन करने की इच्छा ही नहीं है मेरे श्री कृष्ण विश्वास और प्रमाण से परे हैं उनसे बड़ा ना तो कोई सत्य है और ना ही सर्वोच्च आप तो परम सत्य [संगीत] है तो इस भोजन के सत्य को स्वीकार करो मित्र भोजन ग्रहण [संगीत] ओ जय नारायण हरि स्वामी जयना नाथ हरे सुर नर मुनि सब ध्यावे सकल कल्याण [संगीत] करे जय नारायण हरे यहां विश्राम करो [संगीत] मित्र मैं यहां प्रभु किंतु मेरे वस्त्र तो मैले हैं मैले नहीं है सुदामा तुम्हारे वस्त्रों पर बस कुछ माटी लगी है वो माटी जिसे हम बाल्यावस्था में खेला करते [संगीत] थे आओ [संगीत] बैठ मुझे सब स्मरण है मित्र मैं खट्टे आम चखू भी नहीं इसलिए कैसे तुम सभी आम खा लिया करते [संगीत] थे राजा ही नहीं प्रभु तो स्वयं परमात्मा है संपूर्ण सृष्टि के पालनहार फिर भी कितनी सरलता है इनके स्वभाव में लो मैं तो स्मृतियों में ही खो गया था किंतु तुम तो किसी विशेष कारण से ही आए होगे ना खाली हाथ लौट एगा नहीं उनसे सहायता अवश्य [संगीत] मांगिए क्या हुआ मित्र कह ना अब भी संकोच करोगे मुझसे मैं कैसे बताऊं आपको क्यों आया हूं मैं आपके इस भव्य स्वागत से आपका मित्र ये भक्त निशब्द हो गया है मैं आपको कैसे कुछ कहूं विचारों को शब्द बनने से मत रोको बताओ मित्र सुदामा क्या है तुम्हारे मन में प्रभु आपने मित्र माना है मुझे और मुझे अपने मित्र के दर्शन हो गए तो भला इससे विशेष और क्या हो सकता है अच्छा तो मित्र के लिए कुछ भेट भी लाए हो य खाली हाथ आए हो लाया तो अवश्य हूं मित्र सुदामा के हाथ आगे बढ़कर रुक क्यों गए किंतु कैसे दू मैं इनके पास तो सब कुछ है धन संपत्ति उसके समक्ष मेरे चावल के कुछ दानों का भला क्या मूल्य है भाभी मा ने कुछ तो भेजा होगा मेरे लिए मित्र के लिए मित्र से अधिक क्या भेंट हो सकती है मैं आया हूं ना शेष तो है सब आपके पास तो मेरे जैसा दरिद्र ब्राह्मण यदि कुछ कुछ लाता भी तो क्या लाता अच्छा तो अपने पीछे यह पोटली क्यों छिपा रहे हो कुछ नहीं प्रभु कुछ नहीं मित्र अब दे भी दो सुदामा दे दो लाओ सुदामा लाओ [संगीत] कुछ भोजन भेजा है भाभी मां ने और तुम स्वयं खाने के लालच में मुझे नहीं दे रहे थे [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] देखो रुक्मिणी क्या भेजा है अभिमान चूड़ा भाभी माने भेजा है तो स्वादिष्ट तो होगा ही [संगीत] अद्भुत इस एक निवाले के स्वाद का सुख आहा जैसे समूची धरती का सुख सुख एक पल में ही प्राप्त हो [संगीत] गया [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] ओम जय नारायण हरि स्वामी जसरा सब ध्यावे सकल कल्याण करे ओम जय नारायण हरि और अभी सुख समाप्त नहीं हुए हैं अभी और [संगीत] भी [संगीत] प्रभु यदि आपने यह तीसरा निवाला ग्रहण कर लिया तो उन्हें परम पद की प्राप्ति हो जाएगी उनके भविष्य का निर्धारण उनके कर्मों द्वारा ही होने दीजिए स्वामी पहले निवाले में आपने उन्हे धरती के सभी सुख दे दिए और दूसरे निवाले से सर्ग लोक के [संगीत] ऐश्वर्या स्वामी इतना स्वादिष चूड़ा है तो आप मुझे चकने नहीं देंगे अवश्य प्रिय सुदामा भाभी मां का दिया सारा चूड़ा तो हम खा चुके अब तुम तो खाली हाथ ही लौटो [संगीत] ग नहीं प्रभु खाली हाथ नहीं आपका दिया हुआ अपार सुख अपने साथ लेकर जा रहा हूं जो आपने अपना प्यार छावर करके मुझे दिया [संगीत] है सुदामा मेरे मित्र [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आओ [संगीत] आओ [संगीत] [संगीत] बस अब कुछ ही क्षणों में घर पहुंच जाऊंगा बालक सुनेंगे द्वारका में कैसा स्वागत हुआ मेरा तो कितने आनंदित होंगे सभी और जब ब्राह्मणी य सुनेगी प्रभु ने कितने चाव से चूड़ा खाया था तो वह भी अति आनंदित होंगे किंतु ब्राह्मणी ने तो कहा था स्वामी प्रभु के पास खाली हाथ तो जा रहे ली हा लगा नहीं उनसे सहायता अवश्य मांगिए मैं मांग ही लेता तो वो मुझे कुछ देने से मना थोड़ी करते वैसे बिना मांगे ही दे सकते थे किंतु संभव है इसलिए नहीं दिया होगा कहीं सांसारिक सुख पाकर मेरे मन में अहंकार ना आ जाए और मैं प्रभु की महिमा को ना भूल जाऊ किंतु एक ब्राह्मणी को मैं कैसे समझा सकूंगा [संगीत] कुटिया तो यही थी मेरी कहां चले गए यह भवन राज भवन जैसा ये यहां कैसे मैं मार भूल तो नहीं गया [संगीत] ना किंतु यह कैसे संभव है [संगीत] स्वामी [संगीत] स्वामी प्रणाम स्वामी स्वामी देखिए यह देखिए सब कुछ मिल गया हमें स्वामी आपने प्रमाणित कर दिया कि प्रभु आपके मित्र है उन्होंने खाली हाथ नहीं भेजा आपको जय श्री कृष्ण जय श्री कृष्ण जय श्री कृष्ण हे प्रभु आप परम सत्य हैं जय श्री कृष्ण जय श्री कृष्ण और यह सब संभव हुआ केवल और केवल प्रभु श्री सत्यनारायण के व्रत और पूजा के कारण सर्वप्रथम मुझे सुख और समृद्धि की प्राप्ति हुई गोलोक में परम प्रभु श्री कृष्ण का सानिध्य मिला और फिर मेरे प्रभु की कृपा यही नहीं रुकी स्वयं स्वयं उन्होंने मेरा ऐसा सत्कार किया जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती स्वामी ज [संगीत] ह आपने तो अपने इस भक्त का जीवन धन्य कर दिया न होंगे व स जो सदा धर्म पथ पर चलकर सत्कर्म करेंगे और सत्यनारायण व्रत पर कथा उनका मुझ तक पहुंचने का माध्यम बनेगा उन्हें सुदामा जी और उनके परिवार के समान सदा समृद्धि प्राप्त होगी प्रभु भक्त सतानंद और श्री कृष्ण मित्र सुदामा कथा से यह सीख प्राप्त होती है कि अपने प्रभु को प्रसन्न करने के लिए जिस भी रूप में हो कठोर तप हो अथवा सरल भक्ति प्रभु के प्रति निष्ठा और उन पर विश्वास होना चाहिए उनके प्रति सेवा भाव होना चाहिए भक्त का प्रेम प्रभु को भी प्रेममय बना देता है और भक्ति प्रेम निष्ठा में स्पर्धा नहीं [संगीत] होती [संगीत] स्वामी स्वामी के प्रेम की आस में हम दोनों एक दूसरे से ही स्पर्धा कर रही थी किंतु जहां विश्वास है वहीं प्रेम का निवास है य हम भूल गए प्रभु का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए क्याक नहीं करने लगी किंतु इस प्रसंग से मिलने वाली एक और सीख है सुदामा जी की कथा से जुड़ी हुई एक और अद्भुत कथा है कैसी कथा वह कथा जिसमें एक साधारण लकड़हारा भी अपने विश्वास के बल पर राजा के पद पर पहुंच गया और इतना ही नहीं उसे प्रभु श्री हरि के चरण स्पर्श करने का अवसर भी प्राप्त हुआ [संगीत] किसकी कथा है यह प्रभु क्या वह भी यही है हमारे बीच कैलाश में यह कथा है गुहराज केवट के पूर्व जन्म की और आपको यह कथा उनके मुख से ही सुननी चाहिए सभी को मेरा प्रणाम श्री सत्यनारायण भगवान की जय जय अपने पूर्व जन्म में मैं एक साधारण लकड़ हारा था जो वन से सूखी लकड़ियां काट कर लाता था और उसी से मेरा जीवन यापन होता था पर कभी-कभी मेरे लिए इतना पर्याप्त नहीं होता था और मैं कठिनाई में पड़ जाता [संगीत] [संगीत] था आज तो कोई सूखा वृक्ष दिखाई नहीं दे [संगीत] रहा वहां एक वहां एक वृक्ष सूखा हुआ लग रहा है आज का दिन व्यर्थ होने से बच गया रूखा सूखा ही सही कुछ तो भोजन प्राप्त होगा हमारे परिवार को भूखे पेट तो नहीं सोना पड़ेगा चलो उसे काटते [संगीत] हैं क्या हुआ मित्र तुम रुक क्यों गए वृक्ष को अभी हम काट नहीं सकते यह पूर्ण रूप से सूखा नहीं है इसमें अभी भी जीवन शेष है तुम्हारे आदर्शों के कारण हम क्यों वंचित रहे सूखा नहीं है तो सूख जाएगा अब इसमें क्या बचा है हा इसमें बचा ही क्या है संभव है सूख जाए पर पतझड़ में भी इसमें नए पत्रे हैं तो यह भी संभव है कि यह फिर से हरा भरा हो जाएगा रे भाई छोड़ो ऐसा सोचकर वृक्ष को छोड़ते रहे तब तो हो गया हमारे परिवार नहीं बचेंगे और चलो हमारे साथ काट लो इसे नहीं नहीं ऐसा अधर्म मैं नहीं कर सकता अपने पेट के लिए दूसरे के जीवन को आहत कर दूं यह तो अधर्म है हमें कोई और वृक्ष ढूंढना चाहिए नहीं भाई इतनी कठिनाई से पूरा वन ढूंढने के बाद यह वृक्ष मिला है हम ऐसे समय नहीं व्यर्थ कर सकते तुम्हें आना है तो आओ नहीं तो यह वृक्ष तुम्हारे बिना भी कट जाएगा चलो मूर्खता मत करो अन्यथा तुम्हारा परिवार आज नहीं तो कल बहुत कष्ट में पड़ जाएगा अरे अपना नहीं तो उनका तो विचार करो और चलो आ जाओ हमारे साथ संध्या होने को है एक भी काटने योग्य वृक्ष दिखाई नहीं [संगीत] दिया हे प्रभु प्यास भी लगी है कुछ नहीं तो पीने के लिए जल ही मिल [संगीत] जाए वहां वहां जल मिल सकता [संगीत] है वहां तो बस एक र्ण शीर्ण कुटिया हुआ करती थी अब वो इतने भव्य भवन में कैसे बदल [संगीत] [संगीत] ग [संगीत] एक बार प्रेम से बोलिए श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] [प्रशंसा] जय आइए आप सब प्रसाद ग्रहण [संगीत] कीजिए भिक्षम देही भिक्षम देही यह ब्राह्मण तो बहुत दरिद्र हुआ करता था आश्चर्य अब इस पर समृद्धि की कृपा है आइए आप भी प्रसाद ग्रहण कीजिए ब्राह्मण देवता मुझे प्यास लगी है थोड़ा सा जल चाहिए [संगीत] अवश्य गृह स्वामीनी के हाथों में स्वर्ण का पात्र लीजिए जल [संगीत] [संगीत] लीजिए [संगीत] ये प्रभु का प्रसाद है इसे भी अवश्य ग्रहण [संगीत] कीजिए इसे बांध क्यों रहे हैं आप थके हुए लग रहे हैं भूख भी लगी होगी यहीं बैठकर खा लीजिए वो घर पर मेरे मेरे वृद्ध माता-पिता हैं उनके बिना मैं यह यह प्रसाद ग्रहण नहीं कर सकता यह प्रसाद उनके साथ भी बांट लूंगा हां हां उनके लिए और ले जाइए आश्चर्य जिनके पास कुछ नहीं था आज वो इतने धनवान कैसे बन गए क्षमा कीजिए ब्राह्मण देवता किंतु मुझे तो स्मरण होता है कि आप तो आप तो बहुत दरिद्र [संगीत] था किंतु प्रभु सत्यनारायण की कृपा से मुझे दरिद्रता से मुक्ति मिल [संगीत] गई मैं आपका मनोभाव समझ रहा हूं आप भी प्रभु सत्यनारायण की पूजा और व्रत कीजिए आपकी कठिनाइयां भी दूर हो जाएंगी और आपका उद्धार हो जाएगा सफलता के नए मार्ग खुल जाएंगे और आपको जीवन में कोई कष्ट नहीं होगा ब्राह्मण देवता मैं करूंगा मैं इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करूंगा कृपया मुझे मुझे इस व्रत की विधि बताइए इस प्रकार सुदामा जी ने ब्राह्मण शतानंद रूप में मुझे प्रभु सत्यनारायण व्रत और पूजा की विधि विधान ही नहीं समझाई अपि तो उन्होंने तो मेरी मेरी एक और सहायता भी की धन्यवाद ब्राह्मण देवता मैं संकल्प लेता हूं कि मैं इस पूजा को विधि विधान से करूंगा मैं तो कल ही कर लेता पर मेरे पास भोग के लिए सवा शेर तो क्या सवा दाना भी नहीं है प्रभु श्री हरि नारायण हमारी सहायता अवश्य करेंगे मैं उन पर विश्वास भंग नहीं होने दूंगा आज आपके भक्त के पास आपको जल चढ़ाने के सिवाय और कुछ नहीं है कृपा करके इसे स्वीकार कीजिए रुकिए रुकिए [संगीत] रुक भोग की सामग्री जुटाने में मैं आपकी सहायता करूंगा क्षमा कीजिए ब्राह्मण देवता किंतु मैं प्रभु को वही भोग चढ़ाऊ जो स्वयं से मोल लाऊंगा उचित है एक सूखा वृक्ष तो काट सकते हैं ना आप मेरे भवन के पीछे है यदि वह हट जाएगा तो मेरे बालक वहां खेल सकेंगे श्रम आप कीजिए उसके बदले उसकी लकड़िया आप ले जाइए धन्यवाद उस दिन तो मैंने प्रभु की पूजा का संकल्प मात्र ही किया था और मुझे भोजन और लकड़ी दोनों ही प्राप्त हुए और अगले ही दिन मैंने अपने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर प्रभु सत्यनारायण का व्रत किया उनकी कथा का श्रवण किया ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नारायण [संगीत] हरि बोलो सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय ओम जय नारायण हरि स्वामी जय दीनानाथ हरि और वहीं से मेरा भाग्य बदलने लगा मुझे सूखे वृक्ष मिलने लगे जो मुझसे वृक्ष कटवाते थे उनसे मुझे उचित मूल्य मिलने लगा और शीघ्र हीय साधारण लकड़हारा लकड़ी का व्यापारी बन [संगीत] गया किंतु तब भी मैं प्रतिमाह नियमित रूप से पूजा और व्रत करता रहा जिसके परिणाम स्वरूप मेरा जीवन तो सफल हुआ ही और उसके बाद भी प्रभु सत्यनारायण की कृपा से अगले जन्म में मैं गुहा राज बना और इस प्रकार मैंने प्रभु की दया से अपना जीवन सार्थक किया गुहा राज यानी वह केवट जिसे ना केवल प्रभु श्री राम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ अपी तो साथ [संगीत] [संगीत] ही श्री राम सीताराम सीता राम सीता राम [संगीत] राम वीर है रघुवीर है रणधीर मेरे राम [संगीत] है दन बंधु कंज लोचन कोटि उनके नाम है श्री राम सीता राम सीता राम सीता राम [संगीत] राम प्रणाम प्रभु श्री रामरा सीता राम [संगीत] राम हे केवट राज आप हमें नदी पार नहीं कराएंगे [संगीत] हे प्रभु एक साधारण सा केवट आपकी आज्ञा को कैसे अस्वीकार कर सकता है आपके चरण कमल पड़ने से मेरा मेरी नौका का मेरा जीवन सभी का उद्धार हो जाएगा किंतु मुझे किंतु मुझे एक बात का भय है प्रभु कैसा भय जिस प्रकार आपके चरण धूली का स्पर्श करते ही एक शिला देवी अहिल्या श्राप मुक्त होकर अपने मूल रूप में आ गई थी उसी प्रकार आपके चरण धूली का स्पर्श करते ही मेरी मेरी नौका ना बदल [संगीत] जाए यदि ऐसा हुआ प्रभु तो मेरे परिवार की जीविका का साधन ही नहीं रहेगा अतः हे प्रभु मैं आपको अपनी नौका में नहीं ले जा सकता भक्ति का प्रतिफल तभी प्राप्त होता है जब भक्त अपने इष्ट के प्रति पूर्ण निष्ठा रखता है

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