Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने अर्जुन के समक्ष कर्ण की प्रशंसा की GautamRode SuryaputraKarn Episode 218 PenBhakti

[संगीत] मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलता क्या होती है सोचिए धन प्रेम अहंकार मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलता होती है उसके रहस्य चाहे आप कितने भी शक्तिशाली क्यों ना हो कितने भी प्रबल क्यों ना हो परंतु उसके रहस्य उसके नाश की चाबी होती है इसलिए यदि प्रबल रहना है शक्तिशाली रहना है समर्थ रहना है तो अपने रहस्य को किसी को भी ना बताए ना मित्र को और ना ही शत्रु को क्योंकि समय पड़ने पर कब कौन शत्रु हो जाए ऐसा कहना संभव नहीं विभीषण को रावण के अमृत कुंड का ज्ञात था इसीलिए प्रभु श्रीराम रावण का वध करने में सफल हो सके इसलिए उचित यही है कि आप अपने रहस्य को स्वयं तक ही सीमित रखें विजय और पराजय का निर्णय तो युद्ध के अंतिम दिन होगा हस्तिनापुर युवराज नियम तो केवल युद्ध का मार्गदर्शन करते हैं अंत में कौन कितनी सीमा में रहता है और किसे सीमा तोड़ने का दंड मिलेगा यह तो समय ही बताएगा उचित है वासूद परंतु मैंने जो कारण गिनवाला किसी के पास है अर्जुन भीम किसी के पास उत्तर नहीं है उत्तर मेरे पास है दुर्योधन [संगीत] मैं नया जन्म लेके आऊंगी भीष्म तुमसे प्रतिशोध पूर्ण करने देवी अंबा प्रतीत होता है गांधारी नंदन युद्ध को भी युद्ध समझ बैठे हैं युद्ध के पासे भले ही किसी एक के संकेत पर पड़ते हो परंतु युद्ध के पासे कभी भी पलट सकते हैं उत्तम विचार द्रुपद नंदिनी परंतु एक बात समझ में नहीं आई आप यहां क्या कर रही हैं यहां युद्ध के नियम बन रहे हैं आभूषण नहीं मेरे आभूषण मेरे अस्त्र है गांधार नरेश रहा आपके प्रश्न का उत्तर कुमार दुर्योधन तो मैं आपको बता दूं कि पांडव पक्ष में आपके हर योद्धा की काट है तुम्हारे कवच कुंडल धारी मित्र करण का उत्तर है द्रोण शिष्य पशुपतास्त्र धारी कनत अर्जुन आपकी अगली सुरक्षा पंक्ति आचार्य द्रोण तो कदाचित आप भूल रहे हो तो मैं आपको स्मरण करा दूं कि मेरे भाई दृष्ट दम का जन्म द्रोण का वध करने के लिए हुआ है रही बात आपके प्रिय मामा श्री की नारायणी सेना की तो मैं आपको बता दूं स्वयं नारायण पांडवों के मार्गदर्शक है और शेष रहे आपके कुशल अनुभवी सेनापति गंगापुत्र भीष्म तो उन्हे मुक्त करने के लिए मैं स्वयं आप सबके सामने खड़ी हूं मां भली भीष्म को संसार भीषण से भीषण अपनी प्रतिज्ञा से जानते हैं तो उन्हें यह प्रतिज्ञा भी निभानी होगी कि वह मेरे सामने शस्त्र नहीं उठाएंगे तो कौरव दल स्वागत कीजिए पांडव पक्ष के सेनापति वीरांगना शिखनी का अद्भुत पांचाल कुमारी अद्भुत परंतु यह समय युद्ध की ललकार देने का नहीं है यहां हम युद्ध के नियम निर्धारित करने के लिए बैठे हुए इसीलिए आप अपना स्थान ग्रहण करें तो अब बिना किसी विलम के युद्ध के नियम निर्धारित करने के लिए चर्चा की जाए जैसे कि गुरुकुल की रीति रही है कि सदैव सबको समान अवसर दिया जाए इसीलिए युद्ध के नियम निर्धारित करने के लिए भी हम कौरो की तरफ से सभी उपस्थित महा योद्धाओं को नियमों का सुझाव देने का समान अवसर दिया जाएगा और हा मैं यह जानता हूं कि पांडव पक्ष मामा श्री शकुनी का मुख अधिक समय तक नहीं देख सकते इसीलिए मैं अपना सुझाव आरंभ में ही दे देता हूं समस्त आर्यव्रत में युद्ध चाहे जितने भी दिन चले परंतु आरंभ सूर्योदय से होता है और सूर्यास्त होते ही युद्ध भी थम जाता है परंतु परंतु इस बार नियम में एक छोटा सा परिवर्तन होगा सूर्यास्त के पश्चात भी युद्ध पर विराम नहीं लगेगा तब तक जब तक अंधकार इतना सघन ना हो जाए कि योद्धाओं को मशाल के प्रकाश में भी कुछ दिखाई ना [संगीत] दे विकार है परंतु स्मरण रहे मामा श्री यह नियम सब पर प्रभावी होगा जब तक अंधकार में मैं देखने में अक्षम ना हो जाऊ मैं प्रहार करता रहूंगा और स्मरण तो आपको है ही कि अंधकार में भी अर्जुन अपने लक्ष्य से कभी नहीं चुकता मेरा भी एक सुझाव है युद्ध में घायल या लड़ने में असमर्थ या निरस्त्र हुए योद्धा पर विपक्षी प्रहार नहीं करेगा अति उत्तम मित्र हमें स्वीकार अद्भुत अंगराज आपका न्याय दर्शन तो सराहनीय है हमें आपका यह नियम स्वीकार समान पद वाले योद्धा समान पद के योद्धाओं से द्वंद करेंगे [संगीत] रथी रथी से द्वंद करेंगे महारथी महारथी से द्वंद करेंगे अश्वर से अश्वर द्वंद करेंगे और गज रोही से गज रोही द्वंद [संगीत] करेंगे एक योद्धा केवल एक योद्धा से युद्ध करेगा गुड बनाकर कोई कोई भी किसी एक पर आक्रमण नहीं करेगा किसी के पीठ पीछे कोई प्रहार नहीं करेगा यदि विपक्षी ने पहले छल किया तो क्या प्रतिपक्ष को उसका उत्तर देने का अधिकार है वो योद्धा की सोच पर निर्भर करता है विको दर एक महत्त्वपूर्ण नियम इस युद्ध में वही योद्धा एक दूसरे का सामना कर सकता है जिसके पास समान रूप से अस्त्र शस्त्र और शक्ति होगी दुर्बल पर प्रहार करना निषेध होगा और इस युद्ध में गदाधारी गदा युद्ध के नियम से और धनुर्ध धनुर शस्त्र के युद्ध से युद्ध करें और सबसे महत्त्वपूर्ण नियम इस युद्ध में किसी भी प्रकार का छल कुचक्र या षड्यंत्र नहीं होगा स्मरण रहे [संगीत] हमें स्वीकार [संगीत] है युद्ध के सारे नियम निर्धारित हो चुके हैं परंतु अभी भी पांडव पक्ष से मुझे एक छोटी सी समस्या है युद्ध के सारे नियम निर्धारित हो चुके हैं परंतु अभी भी पांडव पक्ष से मुझे एक छोटी सी समस्या है कैसी समस्या गंधार राज धर्मराज अर्थात यह युद्ध समान पद बल शक्ति और हम हम पुरुषों के मध्य हो रहा है तो आपके दल में एक स्त्री क्या कर रही [संगीत] [संगीत] है ना ना पुरुषों के युद्ध में एक स्त्री का भाग लेना युद्ध के नियमों के विपरीत है धर्मराज ये नियम आप जैसे त पुरुषों ने बनाए हैं जो स्त्री को तुच्छ मानते हैं केवल वस्तु मानते हैं शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव य यह क्या कह र हैं आप यह नियम तो य नियम तो स्वयं महादेव ने बनाया है महादेव आपको स्मरण है ना जब देवी पार्वती ने असुरों का नाश करने के लिए माता काली का रूप धारण किया था तो स्वयं महादेव ने भी उन्हें रोकने के लिए अपने बल का प्रयोग नहीं किया ना अपितु व स्वयं माता काली के समक्ष नतमस्तक हो गए जब स्वयं ईश्वर इस नियम का पालन कर सकते हैं तो हम तो केवल साधारण मनुष्य है कोई भी पुरुष योद्धा एक स्त्री पर आक्रमण नहीं करेगा यही युद्ध के आधारभूत नियमों में से एक है और यदि ऐसे में यानी एक स्त्री को पांडव दल का सेनापति पद दिया जाता है तो कौरव बेचारे कौरव तो बिना युद्ध लड़े ही हार जाएंगे क्या य ये अधर्म नहीं है [संगीत] बताइए अपने सेनापति के प्राण बचाने के लिए और कोई मार्ग नहीं सूझा आप लोगों को योद्धा सिर्फ योद्धा होता है स्त्री या पुरुष नहीं स्मरण है मां पार्वती जिन्होंने काली का रूप धारण करके कितने असुरों का वध किया था हम असुर नहीं है हम हम साधारण मनुष्य है मनुष्य सभ्य मनुष्य और सभ्य मनुष्य नियमों का पालन करता है आप सेनापति पद छोड़ दे यही धर्म है क्यों धर्मराज [संगीत] हां तो सबके समक्ष युद्ध के सभी नियम निर्धारित हो चुके हैं हां परंतु अभी भी अभी भी किसी के मन में शंका कु शंका हो तो यहां अपने विचार प्रकट कर सकते [संगीत] हैं नहीं गांधार राज इस सभा में बनाए सभी नियम और उप नियम हमें [संगीत] [प्रशंसा] स्वीकार प्रणिपात प्रणिपात े मनुष्य देव प्रतम तुम [संगीत] [संगीत] शकत मान गया मान गया क्या रणनीति थी मामा श्री आपकी रणनीति को मैं मान गया मामा श्री आपकी रणनीति का उत्तर तो आज कृष्ण के पास भी नहीं था पूरी युद्ध की रचना ही बदल दी आपने [संगीत] साधू साध परंतु सुनो अब यह साधुवाद देने में समय व्यर्थ ना करो दुधन हमें केवल यह युद्ध आरंभ ही नहीं करना है अपितु इस युद्ध को जीतना भी है और युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनानी पड़ती है बहुत चतुर बन रहे थे य पांडव बहुत चतुर पर तो अब इन्ह ज्ञात हो गया होगा कि इनकी हार निश्चित है हमने जो चाहा वही हुआ है [संगीत] दुर्व ना अपनी कायरता गंगापुत्र फिर से मौन रहकर तुमने अपने इच्छा मृत्यु के वरदान को लंबा कर दिया फिर से अपनी दृष्टि झुकाकर तुम्हें लगता है कि तुमने अंबा के प्रति शोध को झुका [संगीत] दिया आज सिद्ध कर दिया तुमने कि जब अपने प्राणों का प्रश्न आएगा तो गंगा का बेटा भी अधर्म का मार्ग चन सकता है यह आशा तो मां गंगा को भी आपसे ना होगी ना मैंने नियम बनाए हैं ना मैं गायर हूं और ना ही अधर्म के मार्ग पर मैंने तुम्हें वचन दिया था अं देवी कि जिस समय मेरे जीवन का कोई उद्देश्य शेश नहीं रहेगा मैं तुम्हे वो शक्ति प्रदान करूंगा कि तुम मेरे इस जीवन का अंत कर सको अब वो समय आ गया है तुम्हे कदाचित विश्वास ना हो परंतु मुझे आशा है गुरुक्षेत्र में तुम मुझे मेरे भार से मुक्ति दिला दो वरदान से मुक्ति मेरे लिए श्र बन गयान से मुक्ति जो पाप बन गया है भीष्म मेरे अंदर कोई आशाए शेष नहीं यदि शेष है तो केवल इस युद्ध का शाप आपको इतना व्यथित देखकर बड़ी शांति मिली गंगापुत्र चित आपको अब अनुभव हो गया है कि कैसा प्रतीत होता है जब मनुष्य के जीवन में कोई आशा कोई उत्साह ना रहे स्मरण है भीष्म यही मेरे जीवन के साथ किया आपने एक वचन के लिए मेरा पूरा जीवन भस्म कर दिया परंतु एक बात स्मरण रखना इतनी सरलता से मैं अपने शत्रु को मुक्त नहीं होने दूंगी मेरी प्रतीक्षा करोगे तुम गंगापुत्र कि मैं कब तुम्हे मुक्त करू हर पल एक जन्म के समान होगा और प्रतीक्षा का आरंभ होता है [संगीत] अब [संगीत] मैं उन्ह नहीं छोडूंगा जेस उने हमारे साथ ल किया [संगीत] है दाता भीम शांत हो जाइए रो भीम यह मेरा आदेश [संगीत] है क्रोध केवल तुम्हें नहीं आ रहा है रक्त हम सब कबल रहा है एक और हमारे ही मामा शरी को छल के कारण हमारे विरुद्ध युद्ध करना पड़ रहा [संगीत] है और दूसरी और बड़ी ही चतुर से उन्होंने शिखनी को युद्ध से दूर कर दिया यह समय क्रोध का नहीं कर्म का है इस समय गौरव सेना के पास 11 शनि सेना है और हमारे पास केवल साथ इस समय हमें हमारी शक्ति को एकत्रित करना [संगीत] होगा वासुदेव क्या हम कभी भी कौरवों से न्याय की आशा नहीं रख सकते गांधा राज और दुर्योधन से तो हम न्याय की आशा नहीं रख सकते परंतु अंगरा कण से दानवीर कर्ण से आशा अवश्य की जा सकती [संगीत] है कि वह युद्ध में न्याय का पालन करेंगे अपने वचन दान का मान रखेंगे हम सबने देखा अंगराज ने कौरवों के पक्ष में होते हुए युद्ध के लिए कैसे न्याय संगत नियम बनाए परंतु वासुदेव वो दुर्योधन के विरुद्ध कभी नहीं जाएगा और उस दुर्योधन से मुझे न्याय की कोई आशा नहीं कायरो की भाति हमारी सैन्य शक्ति को छिन्न बिन्न करने लगा है ष बहुत हो गई सफा बहुत बंद ग नियम बस अब समय आ गया उस दुधन को उचित उत्तर देने [संगीत] का ठहरो [संगीत] भीम युद्ध का समय अभी नहीं हुआ है अनुज जे मैं तो केवल आपकी आज्ञा का पालन करने जा रहा हूं आपने तो कहा था ना कि समय अपनी शक्ति एकत्रित करने का है तो बस वही करने जा रहा [संगीत] हूं मैं अपने पूरे परिवार को इस महायुद्ध में सम्मिलित करने जा रहा हूं मैं अपने पुत्र महाकाय कटो कज उसके साथ ही राक्षसों वीरो को अपनी सेना में सम्मिलित करने जा रहा हूं [संगीत] तुम उचित कह रहे हो अनज तुम्हें शीघ्र अति शीघ्र यहां से प्रस्थान करना [संगीत] [संगीत] चाहिए [संगीत] मुझे आज्ञा दीजिए जेस्ट मैं प्रस्थान कर रहा हूं [संगीत] [संगीत] प्रणिपात [संगीत] वासुदेव मैं अपने पुत्र को लेने जा रहा हूं आशीष [संगीत] [संगीत] क्या हुआ माता आप अचानक बाहर क्यों आ गई और आप इतने विचलित क्यों मैं विचलित नहीं हूं पार्थ बस तनिक अशांत अशांत मैं समझा नहीं माता युद्ध होता ही ऐसा है पार्थ जो मन को अशांत कर [संगीत] दे समय एक बहती धारा के समान होता है पार्थ धारा का स्वर हमारे मन को आनंदित करता है परंतु यह आवश्यक नहीं कि उस धारा का स्वर सदैव हमारे मन को आनंदित ही करे उसे विचलित ना करे फ यह विचलन क्यों [प्रशंसा] [संगीत] माथा अन सागर में जब तरंग उठती है तो वह उत्साह से भरी होती है पार और जब वही तरंग गिरकर अपना अस्तित्व खो बैठती है तब मन विचलित हो जाता है कि कदाचित वह तरंग और ऊंचा जा सकती थी कदाचित उसका प्रारब्ध कुछ और हो सकता था परंतु तरंग का [संगीत] प्रारब्ध य उठना और गिर जाना है माता है ना तो फिर इसमें अशांत और विचलित होने की क्या बात है तुमने सही कहा पा मुझे विचलित नहीं होना चाहिए परंतु तुम बताओ कि तुम्हारा मन इतना अशांत क्यों है इतना विचलित क्यों है ऐसा कौन सा भाव है जो तुम्हें कष्ट दे रहा है बोलो पार्थ दानवीर कर्ण से आशा अवश्य की जा सकती है कि व युद्ध नियमों का पालन अवश्य [संगीत] [संगीत] करेंगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] वाह कितना अद्भुत [संगीत] धनधरिया प्रणिपात यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आपसे टकराया सौभाग्य और दुर्भाग्य के लिए धन्यवाद और तानों का पात्र समय होता है अंगराज मनुष्य नहीं [संगीत] उचित परिस्थिति में उचित समय पर उचित मनुष्य से मिल जाना सौभाग्य होता है और अनुचित परिस्थिति में उचित मनुष्य से मिलना दुर्भाग्य होता है क आपका टकराना तो उचित ही होता है वासुदेव इसलिए यह सौभाग्य होता [संगीत] है आज्ञा दीजिए प्रणिपात [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] और इसके शब्दों की भाति इसके बाण भी कितने अमोक है ना शब्दों को तो ज्ञात नहीं परंतु लक्ष्य भेद करने के लिए मेरे बाण कण से अधिक शक्तिशाली और तीव्र है माधव यह बात आप भली भाति जानते हैं आज किसी के शब्दों में धार दिखाई दे रही है [संगीत] पार्थ अर्थ इसके शब्दों की भाति इसके बाण भी कितने अमोक है ना शब्दों का तो ज्ञात नहीं परंतु लक्ष्य भेद करने के लिए मेरे बाण कण से अधिक शक्तिशाली और तीव्र है माधव यह बात आप भली भाति जानते हैं आज किसी के शब्दों में धार दिखाई दे रही है पार [संगीत] [संगीत] अब बता भी दो अपने सखा को ऐसी कौन सी बात है जो प्रतिपल तुम्हें और अधिक अशांत किए जा रहे है पार आप तो ऐसे कह रहे हैं मा जैसे कि आप तो कुछ जानते ही नहीं कैसे जानू मैं कोई अंतर्यामी थोड़ी ना हूं वाह माता जो संसार में कोई नहीं देख सकता उसे आप देख लेते हैं जो सबके समक्ष है उससे अनजान होने का अभिनय करते आप भली भांति जानते हैं इस बात को को मैं इतना व्यग्र क्यों हूं क्यों आपके विचारों पर आपके समय पर उसका अधिकार है क्यों मा क्यों प्रशंसा उसकी की जाती है पार जो प्रशंसा के योग्य होता है महत्व उसे दिया जाता है जो महान होता है [संगीत] और समय उसे दिया जाता है जो स्वयं समय को परिवर्तित करने की शक्ति रखता हो और मैं क्या कर्ण की कुशलता और लगन को देखकर उस पर कोई भी मोहित हो सकता है ऐसा कोई नहीं जो कर्ण की कुशलता को अनदेखा कर सके केवल उनके जो उसके प्रति ईर्षा रखते बस बस माधव रुक [संगीत] [संगीत] जाइए [संगीत] [संगीत] कौन है व कौन है जो मेरा पीछा कर रहा है यदि सास है तो सामने आ आपको लगता है कि मुझे कण से र्ष परतु मुझे कण से र्ष क्यों होगी माता मैं भी मानता हूं कि व एक महान धनुर्धारी है और इस बात का मैं सम्मान भी करता हूं इसलिए उसके साथ अपना अधूरा दव पूर्ण करना चाह परंतु मा आप कैसे भूल सकते वो अर्जुन ही था जिसने विराट युद्ध में कर्ण को पराजित किया था व अर्जुन ही था जिसने कर्ण के रहते हुए पांचाली के स्व को विजित किया था मैं स्वीकार करता कण एक महान योद्धा है धारी परतु मुझे आज तक उसने कोई अदभुत बात नहीं देखी परंतु आज एक विचित्र बात का भन अवश्य हुआ कि आपके हृदय में अर्जुन से अधिक कर्ण बसता है [संगीत] पर्थ विराट युद्ध गह में तुमने नहीं सूर्यास्त ने उसे परास्त किया था पांचाली के स्वयंवर एक सूत के प्रति क्षत्रियों के दरगाह ने जीता और रही बात मेरे मन में सम्मान की तो पार मेरे मन में मेरे हृदय में जितना सम्मान तुम्हारा है उतना ही सम्मान अंगराज कर्ण का है पार जलधारा की शक्ति का अनुमान उसकी सतह को देखकर नहीं लगाया जा सकता पार्थ जलधारा की शक्ति उसके भीतर छिपे उथल तरंगों में होता है पार्त जिसका अनुमान समय आने पर सबको हो जाता है सत्य सदैव वो नहीं होता पार्त जो सबको दिखाई देता है सत्य वो भी होता है जो हमारी दृष्टि देख नहीं [संगीत] सकती और बहुत शीघ्र तुम्हें उसका अनुमान भी हो [संगीत] जाएगा [संगीत] [हंसी] कौन हो तुम तु अनुमान भी है किस पर हंस रहे हो जानते हो मैं कौन हूं मेरा नाम क्या है बता दीजिए ना भद्र आपका रूप देखकर तो भय लगता नहीं कदाचित आपका नाम इतना भयंकर हो जिसे सुनकर मेरी हंसी चली जाए तुम जानते हो मैं कौन हूं यदि मैंने अपना परिचय दे दिया तो तुम शवास भी नहीं ले पाओगे और यदि मैंने आपके कर्मों का दंड दे दिया तो आप अपना नाम भी भूल जाएंगे [संगीत] भद्र और यदि मैंने आपके कर्मों का दंड दे दिया तो आप अपना नाम भी भूल जाएंगे भद्र जिस भाति आप पौधों और वनस्पति को अपने पांव तले कुचल चले जा रहे हैं स्पष्ट है कि निसर्ग के प्रति आपको कोई सम्मान नहीं है वन से ऐसा व्यवहार केवल दो ही जंतु कर सकते हैं एक जो मूर्ख हो और दूसरा कोई वानर हो इसीलिए सोच रहा हूं कि आप कोई मूर्ख है या फिर कोई वानर मूर्ख तुम्हें तुम्हारी मृत्यु क्या खीचना बड़ा चतुर बनता है तुझे अभी मैं सिखाता हूं कि बड़ों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए कुछ भी सीखने के लिए मैं सदा प्रस्तुत हूं भद्र आगे [संगीत] [संगीत] बढ़े [संगीत] आ [संगीत] दो [संगीत] तुम साधारण मनुष्य नहीं हो सकते कौन हो कौन हो तुम कहा था ना अपना परिचय देना भूल जाओगे अब सुनो मेरा परिचय मैं हूं बर्बरीक घटोत पुत्र बरबरी [संगीत] बालक अपना परिचय देने से पूर्व मेरा नाम तो जान [संगीत] लेते [संगीत] क्षमा चाहता हूं माता परंतु एक बात जानना चाहता हूं ऐसा क्या है उस कर्ण में जो वह कर सकता है और वही सब उससे अधिक कुशलता से मैं कर सकता हूं अवश्य पा अवश्य तुम कर सकते हो परंतु कर सकने में और कर लेने में बड़ा अंतर होता है पार अर्थात शब्द और अर्थ के फेर में मत पड़ो पार उससे कोई लाभ नहीं होता नहीं माधव लाभ है बहुत गुणगान सुन लिया कण का आज तक मैंने आपकी हर बात आंख मूंद कर मानी है परंतु आज मुझे साक्ष्य चाहिए प्रमाण चाहिए कि कर्ण श्रेष्ठ क्यों है तुम्हें पूर्ण विश्वास है पार्थ कि तुम प्रमाण पाना चाहते हो हां माधव ठीक है अर्जुन मैं तुम्हें सिद्ध करके दिखाता हूं कदाचित उसके पश्चात तुम्हें विश्वास हो जा यदि फिर भी विश्वास ना हुआ तो मैं वचन देता हूं पा कण की प्रशंसा तो दूर तुम्हारे समक्ष उसका नाम तक नहीं लूंगा i

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