[संगीत] इन पक्षियों को देख रहे हैं आप इनका उड़ना वायु में इतना संतुलन मुक्त कर देता है है ना इन्हे उड़ते देख आपके मन में भी इच्छा होती होगी कि इन्हीं की भाति आप भी स्वतंत्रता से उड़ पाए ईर्ष होती है ना जब आप इन्हें खुले आकाश में ऐसे विचरण करते देखते हैं पर कभी सोचा है इस उड़ान को इस स्वतंत्रता को पाने के लिए कितना परिश्रम कितना अभ्यास किया होगा इन्होंने आकाश में उड़ने से पूर्व धरती पर कितना गहन परिश्रम किया होगा इनके माता-पिता ने पहली बार जब इन्हें पंख फड़फड़ाने को उकसाया होगा तो कितनी बार गिरे होंगे पहली बार वायु में उठते समय कितना भय लगा होगा इ अपनी पहली उड़ान के पश्चात धरती पर उतरते समय गिरकर कितनी चोट खाई हो इस उड़ान का इस स्वतंत्रता का यह मूल है यदि आप यह दे सकते अव आप भी इस स्वतंत्रता को पा सकते हैं इन पक्षियों की भाती ही अपने चारों ओर जब भी आप किसी सफल मनुष्य को देखें तो उससे ईर्षा ना करें उसके परिश्रम और पीड़ा को समझने का प्रयास करें जो उसने यहां तक पहुंचने में पाई है प्रेरणा ले प्रयास करें और स्वयं भी सफल हो जाए [संगीत] [संगीत] महाते 13 वर्षों से ये आखें तुम सबको देखने के लिए तरस रही है अने तृप्त हो जाने [संगीत] दो तुम जानती हो 13 वर्ष की इस परीक्षा में मेरे पुत्र सफल क्यों है क्योंकि तुम इनके साथ थी तुम इनकी तारणहार हो ईश्वर की कृपा है कि बुरा वक्त समाप्त [संगीत] हुआ और किसी का बुरा समय प्रारंभ [संगीत] हुआ महामहिम भीष्म की जय महि भीष्म की जय महामहिम [संगीत] की आप यहां पधारे हम धन्य हु पिता मा प्रणिपात आयुष्यमान [संगीत] प्राणी पान स्वागत है मबली भीष्म महाराज विराट मेरे पड़ पोते के विवाह पर यदि आपने निमंत्रण ना भी दिया होता तो भीष्म अवश्य [संगीत] आता आइए महाबली ब [संगीत] [संगीत] अंतिम भेंट में आशा थी कि अगली भेंट युद्ध भूमि में ही होगी मेरी भी आशा टूट गई अर्जुन वैसे पुत्र के विवाह की बधाई हो स्वागत है [संगीत] धन्यवाद ण [संगीत] पा देख रहे माम श्री किस बात ये य पितामह इन पांडवों से खुल मिल रहे हैं कोई जाए उन्हें उन्हें बताए समझाए उन्हे की कुछ समय पश्चात यही पांडव युद्ध में हमारे विरुद्ध खड़े होंगे शांत रहो दुर्योधन मुख मुद्रा सुंदर नहीं बना सकते तो कम से कम सुंदर शब्दों का प्रयोग तो करो और यह मत भूलो कि हम यहां केवल अभिमन्यु के विवाह के लिए नहीं आए हमें हमारी बच्ची लक्ष्मणा के विवाह के विषय में भी बात चलानी है और एक कर्तव्यनिष्ठ पिता के भाती व्यवहार करना सीखो और यह और यह बचपना [संगीत] छोड़ो पिताश्री अब तो सभी अतिथि आ ही चुके हैं ना आप भी तनिक मेरे साथ बैठिए मुझे आपको कितना कुछ बताना 13 वर्षों पश्चात आपसे मिलना हु और इतना समय भी नहीं मिला कि आपको बता सकू मैंने क्या क्या सीखा [संगीत] है [संगीत] अवश्य जिनसे मिलना था उनसे मिल चुके हैं अब ना किसी से मिलना शेष है और ना किसी को उत्तर देना [संगीत] [संगीत] वासुदेव प्रणिपात वासुदेव क्षमा कीजिएगा मैंने आपको देखा नहीं कोई बात नहीं अंगराज मनुष्य का मन जब व्यथित होता है तो कई बार वह अपने आसपास की वस्तुओं को देख नहीं [संगीत] [प्रशंसा] पाता मैं व्यथित हूं य आपको कैसे ज्ञात हुआ लगता है तुम भूल गए अंगराज सारथी हूं योद्धा का मन पढ़ लेता हूं अभिमन्यु को देखकर तुम्हें वृष सेन का स्मरण हु आया ना ना कहूंगा तो असत्य होगा पिता पुत्र का संबंध बड़ा विचित्र होता है दोनों जन्म से जुड़े होते हैं साथ होते हैं परंतु कई बार साथ आने में बड़ा समय लग जाता है अपने संतान के उज्जवल और स्वतंत्र भविष्य के लिए एक पिता अपने पुत्र से दूर रहता है परंतु उस दूरी को समाप्त करने में उसे ही वर्षों लग जाते हैं परंतु मुझे तो भय है कि कहीं अधिक विलम ना हो जाए यह तो समय ही बताएगा [संगीत] अंगराज अच्छा वासुदेव साम कैसा है वह आपके साथ नहीं आया वह अच्छा है अंगराज उसका यहां आने का मन नहीं था इसलिए साथ नहीं आया परंतु मन की गति बड़ी चंचल होती है अंगराज क्या पता कब बदल जाए वासुदेव क्षमा कीजिएगा परंतु मेरे पूछने का एक और तात्पर्य है आपका आपके पुत्र से संबंध कैसा है मैंने कहा ना अंगराज पिता पुत्र का संबंध बड़ा विचित्र होता है मेरी दशा तुमसे भिन्न नहीं और मैं भी प्रारब्ध नहीं बदल [संगीत] सकता रुक क्यों गए मित्र अभी विराट नगर दूर है परंतु मेरा साथ यहीं तक था मित्र सां अर्थात तुम चाहते हो कि मैं वहां अकेले सबके समक्ष प्रस्तुत होऊ नहीं मित्र तुम मेरा साथ नहीं छोड़ सकते मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ रहा हूं मित्र मैं यही तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगा परंतु ऐसा क्यों जब तुम यहां तक आ ही गए हो तो मेरे साथ क्यों नहीं चल सकते क्या बात है मित्र क्योंकि आने वाले पल तुम्हारे प्रेम लक्ष्मणा से तुम्हारे मिलन के सुखद पल है मित्र मैं उसे बिगाड़ना नहीं चाहता परंतु ऐसा क्यों होगा तुम भला कोई बाधा क्यों डालोगे क्योंकि कौरव वहां आए तो मेरे पिता भी अवश्य आए होंगे मेरे पिता भी वहां है हमें उन्हें अनदेखा करना है कुछ बातें अनदेखी नहीं की जा सकती मैं उनसे अंतिम भेंट करके आया हूं यदि अब भेंट होगी तो विद्वंस होगा और मैं यह नहीं चाहता ऐसा नहीं है न ऐसा ही है मित्र अब यहां से तुम्हें अकेले ही जाना होगा परंतु विश्वास करो यदि कुछ भी भी अशुभ होता है तो पीछे पलट कर देखना मुझे समक्ष पाओगे जाओ साभ लक्ष्मणा तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है और हा शांत रहना मित्र स्वयं किसी संकट को आमंत्रण मत दे देना प्रयास करना कोई समस्या उत्पन्न ना हो जाए मैं समस्या उत्पन्न करने नहीं मित्र समस्या का अंत करने जा रहा हूं और एक नए जीवन का प्रारंभ आपके लिए वो महत्व रखते रहे जिन्होंने आप पर उपकार किया या जिन्ह आपने वचन दिया परंतु मेरे लिए सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मेरा परिवार आपने कभी सोचा है कि वर्षों के पश्चात जब आप अपने परिवार के पास लौटो ग तो सब आपकी व्याकुलता से प्रतीक्षा कर रहे ह परंतु मैं भिन्न हूं आपकी भाति मैं अपने परिवार को उनके हाल पर नहीं छोड़ [संगीत] सकता ईश्वर से प्रार्थना है कि अब जब कभी भी हम एक दूसरे के सामने आए तो एक दूसरे के विपक्ष में ना हो क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो हम दोनों में से कोई एक ही जीवित [संगीत] बचेगा तुम्हारे मन की व्याकुलता मैं समझ सकता हूं लक्ष्मणा परंतु किसी की प्रतीक्षा में द्वार पर इतनी देर भी दृष्टि नहीं रखनी चाहिए कि सबकी दृष्टि तुम पर पड़ जाए अवश्य कोई महान नीति का ज्ञान अपनी नातिन को दे रहे होंगे गांधार [संगीत] नरेश रनी पाद तुम्हारी मनोकामना पूर्ण हो पुत्री प्रणिपात करने का एक लाभ यह होता है कि आशीर्वाद स्वतः मिल जाता है है ना गांधार नरेश वैसे यह बताइए आपको उत्सव का प्रबंध कैसा लगा अति उत्तम वासुदेव आप ही की कृपा है बस मेरी कृपा उत्सव विराट राज का है और आप प्रशंसा मेरी कर रहे हैं और किसकी करूं वासुदेव आप जहां जाते हैं वहां सब कुछ आप ही के मन से तो चलता है भिक्षुक पांडवों को ऐसा राज संबंध दिलाना हारे हुए योद्धाओं को फिर से स्फूर्ति दिलाना यह आपके अतिरिक्त कौन संभव कर सकता है वासुदेव भला आप ही बताइए कौन सोच सकता है कि जो कौरव विराटनगर की से ईट बजा देने का स्वप्न लिए बैठे थे व विराटनगर का आतिथ्य स्वीकार करेंगे यह योजना बना पाना उसे सफल करना आप ही के तो बस में है वासुदेव इसीलिए आप प्रशंसा के पात्र हैं योजना के भवन तो आपने भी बनाए हैं गांधार राज और उत्सवों का प्रबंध भी आपने बहुत किया है उसमें सफलता भी मिली योजना के भवन तो आपने भी बनाए हैं गांधार राज वह बात और है कि उसके लिए आपको प्रशंसा नहीं मिली परंतु एक बात के लिए मैं आपकी प्रशंसा अवश्य करूंगा कि हस्तिनापुर के इतने महान दिग्गजों को यहां कोई सरल कार्य नहीं है युवराज दुर्योधन महामहिम भीष्म जैसे दृढ़ पुरुषों को यहां लाना बड़ा कठिन कार्य है जिसे आपने बड़ी सरलता से पूर्ण कर दिया हस्तिनापुर को आप विराट नगर ले ही आएगा अंधार नरेश भले ही उसके पीछे आपका कोई व्यक्तिगत कारण अवश्य रहा हो मेरा मेरा क्या कारण होगा वासुदेव क्या कारण होगा मेरा ना अरे हां मैं मैं यहां सबसे मिला परंतु आपका पुत्र साम कहीं दिखाई नहीं दे रहा है क्या वह आमंत्रित नहीं है यहां जिसे आना हो उसे आमंत्रण की क्या आवश्यकता और यद आपको सांप की कमी अनुभव हो रही है तो तनिक उधर देखिए गांधार [संगीत] राज जिसके लिए आप बड़ी व्याकुलता से पूछ रहे थे या यह कहूं बड़ी व्याकुलता से प्रतीक्षा कर रहे थे प्रतीक्षा तो करूंगा ना वासुदेव जब जब सारी अगली पीढ़ी यहां प्रस्तुत है तो आपके पुत्र शाम से भी मिलने का मन हो आया और विराट नगर के लिए हस्तिनापुर से जो भेंट आई है उसका आनंद अधिक लोग उठा सके उतना अच्छा है और आशा है कि मेरी भेंट सबको आनंदित ही करेगी वासुदेव आज्ञा दीजिए वाससुदेव मैं उत्तरा से मिलके आती हूं [संगीत] जाओ [संगीत] [संगीत] साम तुम वहां जहां मैं हूं आश्चर्य हुआ तुम्हें देखकर आश्चर्य नहीं सौभाग्य है आपका पूजनीय पिता श्री यह मत समझिए कि आपको लेकर मेरे विचार परिवर्तित हो गए बात केवल इतनी है कि आज मेरा मन आनंद में था बस उसे बांटने के लिए मैं अपने संबंधी के विवाह में चला आया तुम उनमें से नहीं हो सांप जो केवल अपने मन के आनंद के लिए कुछ कर जाए यदि तुम यहां आए हो तो अवश्य कोई छिपे हुए मंतव्य के साथ आए हो पुत्र हो मेरे इसे मेरी मंत्रणा समझो या चेतावनी परंतु कुछ भी ऐसा मत करना जो अनिष्ट कारी हो वैसे पूरा भारतवर्ष एक महायुद्ध के ज्वालामुखी के मुख पर बैठा हुआ है उस युद्ध को प्रारंभ करने का कलंक अपने सर पर मत ले [संगीत] ले
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