Wednesday, 7 January 2026

हस्तिनापुर के योद्धा युद्ध के लिए तैयार क्यों थे Gautam Rode Suryaputra Karn Episode PenBhakti

[संगीत] संबंध बड़ा ही विचित्र भाव है है ना हम जीवन में आगे बढ़ते हैं अपने संबंधियों के लिए हम परिश्रम करते हैं ताकि वह प्रसन्न रहे जिनसे हमारा संबंध है परंतु कभी-कभी यह आवश्यक हो जाता है कि जिनसे हमारा संबंध है उन्हें रोका जाए उनके मार्ग में बाधा डाली जाए अब आप कहेंगे कि यह कैसी बात जिनसे हमारा संबंध है जिनसे प्रेम उनके मार्ग में बाधा क्यों आवश्यक है नदी की धारा में आया छोटा सा सेत उसके प्रवाह को तीव्र कर देता है जिनसे हम प्रेम करते हैं उनकी आलोचना आवश्यक है ताकि वह अपनी कमियों को सुधारे अपनी शक्तियों के वेग को बढ़ाए और सफलता प्राप्त करें तुम भले ही अभिशा पित हो और संसार के वीर योद्धाओं से कहीं अधिक श्रेष्ठ सिद्ध होंग तुम मृत्युंजय ण बनोगे ण [संगीत] बनोगे आज तक इतिहास मनुष्य को मिले वरदान को स्मरण करते आया परंतु तुम्हारा श्राप वरदान से कहीं अधिक स्मरणीय रहेगा इतिहास यु होगा उसमें रा श्राप सबसे अधिक स्मरणीय रहेगा मनुष्य वरदान पाकर भी विजय पथ की ओर नहीं पढ़ पाते परंतु तुम अभिशप्त होकर भी निर्भय विजय पथ पर आगे पढ़ोगे कण [संगीत] आंखों में इतना स्नेह लिए किसे देखी जा रही हो [संगीत] उर्वशी उस वीर को क्या तेज है उसके मुख पर और बाजुओं में कितना बल यह कौन से देवता है [संगीत] यह देवता नहीं यह देवराज इंद्र के पुत्र है अर्जुन [प्रशंसा] अर्जुन प्रतीत होता है तुम्हारा मन आ गया है इस देवता पुत्र पर पर मैं तो तुम्हें पहले ही सावधान कर चुकी हूं ये देवराज इंद्र के पुत्र है तो मैं भी देवताओं को वश में करने वाली सरा उर्वशी हूं और इस देव पुत्र को भी मैं अपने वश में कर ही [संगीत] लूंगी महाबली कांड की जय महाबली कांड की जय अंगराज काण की जय अंगराज कांड की जय अंगराज कांड की जय महा का की [प्रशंसा] जय [संगीत] पिता महाराज हस्तिनापुर ने आज दिग विजय प्राप्त कर ली है परंतु यह विजय मेरे मित्र अंगराज कण की है इसके द निश्चय इसके बाहुबल और इसके बाणों की धार ने हस्तिनापुर को आर्य वृत का सर्वश्रेष्ठ साम्राज बना दिया है मुझे यह बात कहने में कोई संदेह नहीं जिस प्रकार हस्तिनापुर पिता भीष्म का सम्मान करता है आज उसी प्रकार मैं दुर्योधन अपने मित्र तण का सम्मान करता [संगीत] हूं मैं तो यह तक कहूंगा कि मेरा मित्र कण है मैं सना हूं और वो [संगीत] नहीं मैं अनाथ हू महाराज की जय हो राजकुमार अर्जुन को पशुपतास्त्र प्राप्त हो चुका है और देव राजेंद्र उन्हें अपने साथ स्वर्ग ले गए हैं जो शक्ति तुमने इस दिग जय से प्राप्त की है पुत्र उसका तोड़ केवल एक पशुपतास्त्र में मिल गया है अर्जुन [संगीत] को अब य युद्ध हुआ तो बहुत भयंकर होगा पांडव अपना प्रतिशोध लेंगे पुत्र पांडव अपना प्रतिशोध लेंगे तो हम क्या युद्ध से भयभीत है पिता श्री नहीं मैं युद्ध से भयभीत नहीं हूं पुत्र मैं उन प्रतिज्ञा से भैत हूं जो उन पांडवों ने ली है मैं देख नहीं सकता पुत्र परंतु 12 वर्षों से हर रात्रि मेरे स्वप्न में मुझे द्रौपदी का व श्राप सुनाई देता है ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे वो अग्नि सूता अपने दोनों हाथों में अग्नि लिए हस्तिनापुर की ओर बढ़ रही है पुत्र वो किसी भी क्ण किसी भी क्ण हम सबको भस्म कर देगी भस्म कर देगी हमारे पास भारत की सबसे बड़ी सेना है य भयभीत होने का समय नहीं है तो यह उत्सव मनाने का भी समय नहीं है पुत्र मैं ये युद्ध होने नहीं दे सकता पांडवों का वनवास समाप्त होने वाला है पुत्र कुछ करो गुप चर भेजो यदि आवश्यकता पड़े तो स्वयं जाओ परंतु पांडवों का अज्ञातवास प्रारंभ होते ही उन्हे पकड़कर वनवास भेज दो हसनापुर और मेरे पुत्रों की सुरक्षा के लिए उन पांडवों का सदा के लिए वनवासी हो जाना ही अधिक शकर है [संगीत] पुत्र महाराज व्यर्थ में भयभीत हो रहे हैं हमारे पास विशाल सेना है भारत के सभी मारती या तो हमारे मित्र हैं या हमारे अधीन हमारे पास योग्यता है इतना बल है फिर क्यों ना करें [संगीत] युद्ध क्यों ना संसार को सिद्ध कर दे कि हस्तिनापुर ने पांडवों का राज्य पल से जीता है यूथ के छल से [संगीत] नहीं मान सभी मारती तुम्हारे आधीन है कण परंतु मैं भाग्य को भी अपने पुत्र के आधीन होते देखना चाहता [संगीत] हूं मैं भाग्य को कोई अवसर नहीं देना चाहता और ना ही उन पांडवों [संगीत] को मा मही आप ही बताइए क्या एक वीर योद्धा का लक्ष्य युद्ध और विजय नहीं क्या गुप्त रूप से दृष्टि रखना कृपानो का कार्य नहीं [संगीत] होता इस समय मैं महाराज धृतराष्ट्र से सहमत [संगीत] हूं हमें शीघ्र ही पांडवों का पता लगाकर उन्हें पुन वनवास पर फेर देना [संगीत] चाहिए आप ऐसा कहेंगे यह तो मैं स्वप्न में भी नहीं सोच सकता था मामाही गंगा की धारा को अपने बाणों से रोक देने वाले भीष्म गुरु परशुराम से अपराज रहने वाले भीष्म आज यु से बहत हो गए अंगराज कण तुम एक योद्धा हो यह भली भाति जानते हो कि सर्वश्रेष्ठ युद्ध वही है जो कभी हो ही ना महाराज तराश ने जो निर्णय लिया है वही उचित है मैंने हस्तिनापुर की सुरक्षा का प्रण लिया है जिसम हस्तिनापुर की निर्दोष प्रजा के साथ साथ उसकी सेना भी सम्मिलित है सबके पास मेरी भाति इच्छा मृत्यु का वरदान नहीं यदि बिना युद्ध के वो सुरक्षित रह पाते श्रेष्ठ है और इसमें कोई अन्याय नहीं क्योंकि नियम यही था यदि अज्ञातवास में पांडव पहचाने गए तो उन्हें पुनः वनवास पर जाना होगा परंतु मैंने 12 वर्षों तक जो शक्ति एकत्रित की है व युद्ध के लिए की है हस्तिनापुर की सुरक्षा के लिए की है शक्ति की सिर्जन का अर्थ यह नहीं कि उसे यूंही व्यर्थ जाने दिया जाए तुम्हारे एक अधूरे द्वंद को पूर्ण करने के लिए हस्तिनापुर के अस्तित्व की बली नहीं दी जा [संगीत] सकती शांत महाबली करण शांत हो जाइए महामहिम महाराज यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं कुछ कहूं आज्ञा है महाराज मुझे लगता है कि अंगराज कण का मत तर्क संगत है हमें युद्ध के लिए प्रस्तुत हो ही जाना चाहिए महाराज क्योंकि यही योद्धाओं के लिए उचित होगा मामा श्री अब हां मेरे प्यारे सम्राट कण बिल्कुल उचित कह रहा है और क्या हस्तिनापुर की शक्ति पर तुम्हें तनिक भी विश्वास [संगीत] नहीं अपनी गधा पर दुशासन के बाहुबल पर अंगराज के तेज पर गुरु द्रोणाचार्य के धनुर ज्ञान पर और महामहिम के प्रहार पर तुम्हें तनिक भी विश्वास नहीं है दुर्योधन इन सब वीरों के रहते यदि हमने कायरों की भाति पांडवों को वन में भेज दिया तो क्या [संगीत] लाभ मेरी बात समझो मेरे प्यारे सम्राट कण कण उचित कह रहा [संगीत] है इतिहास यूत में छल करने वाला कृपण समझे उससे अधिक श्रेयस कर इतिहास हमें युद्ध में वीर गति प्राप्त करने वाला वर [संगीत] समझे महाराज क्या आप अपना नाम इतिहास में एक भयभीत पुत्र मही सम्राट के रूप में लिखवाना चाहेंगे 12 वर्ष महाराज 12 वर्ष मैंने कण के समक्ष रहकर बिताए [संगीत] हैं और 12 वर्ष मेरे सम्राट दुर्योधन ने कण के साथ मिलकर जो पराक्रम किए हैं जो जो तपस्या की है उसे हम यूं ही व्यर्थ जाने देंगे महाराज [संगीत] ना उस तपस्या को उस पराक्रम को यूं ही व्यर्थ नहीं जाने दे सकते महाराज हम राजनीति में कूटनीति का बहुत बड़ा स्थान होता है महाराज माना माना परंतु कभी-कभी युद्ध ही एक मात्र त्राण रह जाता [संगीत] है कहीं इतिहास यह कहकर हस्तिनापुर का अयास ना करे महाराज कि उसने अपना अंतिम युद्ध द्यूत की बिसात पर खेल डाला ना विश्वास करो विश्वास करो दुर्योधन यही यही एकमात्र अवसर है मान लो मेरी [संगीत] बात मुझे मुझे स्वीकार है यदि युवराज की यही कामना है यही सेही सभा समाप्त [संगीत] हुई [संगीत] चल मेरा तुनीर कहां गया कब से देखे जा रही हूं वीर अभ्यास पर अभ्यास किए जा रहे हैं ने विश्राम तो कर लो मेरे पास विश्राम का समय नहीं मुझे मेरा तुनीर लौटा दीजिए देवी उर्व उर्वशी नाम है [संगीत] मेरा देवलोक की प्रधान अपसरा हू में हम स्वर्ग भ्रमण पर जा रहे हैं अब चलिए क्षमा चाहता हूं देवी मैं यहां स्वर्ग भ्रमण के लिए नहीं आया मैं यहां इसलिए आया क्योंकि मुझे कुछ पापियों को नरक का मार्ग दिखाना है शीघ्र अपना अभ्यास माप्त करके मुझे अपने भ्राता के पास जाना है जो दूर है उसकी इतनी चिंता और जो समीप है उसका प्रेम और अभिवादन स्वीकार ही नहीं रहे हो मैं तुम पर मोहित हूं वीर मुझे प्रेम दान करो मेरे मन की अग्नि को शांत करो क्षमा कीजिए देवी मैंने 13 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत लिया है प्रणिपात [संगीत] तुम्हें पाना तनिक कठिन है भी और यदि लक्ष्य जितना कठिन हो उसे पाने का आनंद दुगना हो जाता है आपको अपना ब्रह्मचर्य व्रत तोड़ना ही [संगीत] होगा [संगीत] सागर की लहरों का स्वर सुन रहे हैं मा मही युद्ध की रण भेदी सुनाई दे रही है ना आपको आप कितना भी प्रयास कर लीजिए इस य को रोकने का परंतु हस्तिनापुर के द्वार पर 12 वर्ष पूर्व ही युद्ध का शंखनाद हो चुका है जानता हूं इसी कारण इस युद्ध को रोकने का प्रयास कर रहा हूं राज्यसभा में मैंने इस युद्ध का विरोध इसलिए किया क्योंकि क्योंकि बात सिर्फ हस्तिनापुर की सुरक्षा की नहीं यदि युद्ध हुआ तो आपको युवराज दुर्योधन का साथ देना पड़ेगा और आप नहीं चाहते कि आपको पांडवों के विरुद्ध अस्त्र उठाने [संगीत] पड़े और आप यह भी नहीं चाहते भाई भाई के विरुद्ध शस्त्र [संगीत] उठाए मैं नहीं चाहता कि भाई भाई पर शस्त्र उठाए क्योंकि इस युद्ध से विनाश के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलने वाला मिलेगा अवश्य मिलेगा माही परिवर्तन न्याय अधिकार मिलेगा जो इसके योग्य होगा युद्ध तो हो कर रहेगा मा हो रहेगा

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...