Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने बताई कुरुक्षेत्र की विशेषता Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 214 Pen Bhakti

[संगीत] जब भी आपने यात्रा की होगी तो अवश्य अपने मार्ग के आसपास कुछ रिक्त स्थान देखे होंगे कुछ खेत देखे होंगे कोई ना कोई भूमि का टुकड़ा अवश्य देखा होगा कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहां पेड़ लगे होते हैं जहां मालिक बड़े प्रेम से उन्हें बोता है उन्हें सीच होता है और कुछ स्थान ऐसे भी होते हैं जहां बिना माली के खर पतवार उग जाते हैं कुछ अन्य पौधे उग जाते माली द्वारा उगाए वृक्ष हमें ठंडी छाया देते हमें फल देते हैं ईंधन के लिए लकड़िया देते हैं और बिना परिश्रम के उपजत घर पतवार यदि कुछ करते हैं तो यह कि वह भूमि को बंजर बनाते हैं हमारा मन भी रिक्त भूमि की भाति होता है यदि अपने परिश्रम से उसमें सु विचारों के बीज डालोगे तो फलदायक विचार उपज और यदि उसे रिक्त छोड़ दिया तो खर पतवार की भाति अनुपयोगी विचार आपके मन को अपना घर बना लेंगे आपके मन को मैला कर देंगे उसे बंजर कर देंगे अब निर्णय आपका है कि आपको सुविचार देने वाला मन चाहिए या कुंठा देने [संगीत] [संगीत] वाला [संगीत] साखा देख टने स्वयं कोख पाप अभिमान की होई देने को चली पुत्र को आश मामता सु महा विश की अगनि का महाशा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] सहि पाप है बीमार निकला धर्म है अब जाय ा दिया बहाता ने है जो हर अवसर जाए [संगीत] चुका महा भारत महा भारत महा [संगीत] भारत महा भारत महा भारत महा भारत [संगीत] [संगीत] [संगीत] ज कामम सम यादा म हो लक्ष भेद अर्ज समागम [संगीत] मैं नहीं चाहती कि मेरा कोई भी पुत्र एक दूसरे का वध करे यही युद्ध की वि [संगीत] [संगीत] श चाहे जो भी पक्ष जीते परंतु हानि दोनों ही पक्षों को होती [संगीत] [संगीत] है युद्ध की हानि तो उन्हें होती ही है जो युद्ध में भाग लेते और उन्हें भी होती जो युद्ध में भाग नहीं लेते और अब जो मैं बताने जा रहा हूं यहां उपस्थित कुछ लोगों को यह ज्ञात है और जिन्हें ज्ञात नहीं वह इस बात को [संगीत] जान [संगीत] इस युद्ध के लिए यह कुरुक्षेत्र की भूमि उचित क्यों है सर्वप्रथम यह धरती कुरुवंश के अधिकार में आती इसलिए धरती पर कौरव और पांडव इन दोनों का समान [संगीत] अधिकार यह भूमि यह पवित्र स्थल देव नदी सरस्वती के दक्षिण और दृश्य वाही की उत्तर दिशा में आता है यह भूमि यह भगवान परशुराम के यज्ञ कुंडों से घिरा हुआ है और उन भगवान परशुराम के तीन शिष्य इस युद्ध में भाग ले रहे हैं महा ऋषि कुरु ने वर्सों तक इस भूमि को जोता और देवों से यह वरदान प्राप्त किया कि जो भी इस भूमि पर मृत्यु प्राप्त करे उसे मुक्ति मिले स्वर्ग मिले और जिसे विजय प्राप्त हो उसे न्याय मिलेगा यह भूमि न्याय दात्री पाप नाशिनी और यह युद्ध भी न्याय के विजय के पापों के नाश के लिए हो रहा [संगीत] है मुझे विश्वास है युद्ध का परिणाम चाहे जिस पक्ष में क्यों ना हो धर्म स्थापना अवश्य [संगीत] हो श्र आज से एक सप्ताह के बाद युद्ध की तिथि निर्धारित हुई दोनों ही पक्षों के पास युद्ध की तैयारिया करने के लिए एक सप्ताह का समय है दकम धर्म लक्षण और उसके पश्चात दोनों ही पक्ष यहां पुन उपस्थित [संगीत] हो युद्ध के नियम निर्धारित करें फिर आरंभ होगा महाभारत का [संगीत] [संगीत] महाभारत मारत [संगीत] महाभारत हेरो अर्जुन [संगीत] युद्ध से पहले भी आप हमारे श्रद्ध युद्ध में भी होंगे और युद्ध के पश्चात प्रण भक्त आयुष्यमान भ ज अर् ज काम ज मो ज र्म ज अर्थ ज कावे च मोक्ष च यशस्वी भव हस्ति दन्य य हस्ति तत्व [संगीत] ह य क्या था पिता जिन्ह हम युद्ध में परास्त करके उनका अंत करना चाहते हैं उन्हे आप लंबी आयु का आशीर्वाद दे रहे य दुर्योधन जब छोटे आशीर्वाद मांगे तो उनको आशीष देना बड़ों का कर्तव्य है तुम यदि अपने जेष्ठ युधिष्ठिर से आशीर्वाद मांगोगे तो अवश्य तुम्ह आशीर्वाद देगा इतनी बड़ी सेना है तुम्हारे पास मेरे केवल एक आशीर्वाद देने से तुम अपना आत्मविश्वास खो बैठे तुमने जो चाहा तुम्हें मिला वो सब कुछ तुम्हारे पास है जो तुम्हें चाहिए मैं तुम्हारे पक्ष में इस युद्ध में खड़ा हूं परंतु पांडवों को भी मेरे आशीर्वाद का अधिकार [संगीत] हैमा धर्म अं मानो [संगीत] [संगीत] फव [संगीत] माते प्रकट होइए माते आपका गंगा पुत्र भीष्म आपके समक्ष उपस्थित है क्या मेरी आवाज आप तक नहीं पहुंच रही समूचे संसार को अपने जल से शीतलता प्रदान करती हैं आप आज अपने पुत्र के जलते हुए हृदय को शीतलता प्रदान करिए माते प्रकट होइए समझ गया मैं आप मुझसे रुष्ट है संतुष्ट है आप कर भी क्या सकती इस पथ का चयन अपने लिए मैंने स्वयं किया यही मेरा दोष है मेरा दोष वो प्रारब्ध है जिसने मुझे इच्छा मृत्यु का श्राप दिया है मेरा दोष मेरी व प्र [संगीत] जिसे तोड़ नहीं [संगीत] सका आज आपका यह पुत्र आपके आशीर्वाद के बिना ही युद्ध में भाग लेने जा रहा अपनी भूल के लिए भाग्य को दोष देना उचित नहीं है गंगा [संगीत] [प्रशंसा] एक योद्धा को इस अवस्था में देखना भी तो उचित नहीं [संगीत] वासुदेव मेरे समक्ष केवल एक योद्धा ही कहां खड़ा है मैं तो उस पुत्र को उस पितामह को देख रहा हूं जिसकी दृष्टि में अपराध बोध है और मन में पश्चाताप की अग्नि सत्य कहा आपने आप एक योद्धा को नहीं एक अभागे को देख रहे हैं मुझसे बड़ा अभागा इस संसार में कौन होगा एक ऐसे युद्ध में भाग लेने जा रहा हूं जहां मेरे ही वंश के लोग एक दूसरे के रक्त के प्यासे हैं भाइयों में प्रेम की जगह प्रतिशोध है अहंकार है बाण किसी और से भी चले छाती मेरी ही लनी होगी रक्त किसी का भी बहे हृदय मेरा रोएगा और मैं इस अनर्थ को रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर सकता जब आप रोक सकते थे तब आप मौन रहे [संगीत] गंगापुर इस युद्ध को संभव बनाने में आपका भी योगदान है गंगापुत्र उस अधर्म के आप भी भागीदार थे भागीदार नहीं वासुदेव विवश था मैं अपने वचन से अपनी प्रतिज्ञा से बंधा हुआ था आपकी प्रतिज्ञा हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा करना और हस्तिनापुर एक वस्तु एक राज्य नहीं एक सोच थी जो भारत में धर्म का उदय कर रही थी वचन या प्रतिज्ञा कभी उस कारण से अधिक बड़ी नहीं होती जिसके लिए प्रतिज्ञा ली गई है आपकी प्रतिज्ञा का कारण था हस्तिनापुर की सुरक्षा अपने वंश का यश और आज आपकी प्रतिज्ञा हस्तिनापुर को आपके वंश को कहां ले आई है गंगापुत्र आपने हस्तिनापुर को ऐसा राजा दिया जो अपनी ही प्रजा के अश्र नहीं देख सकता ऐसा युवराज दिया जो अपने ही भ्राता की संपत्ति से द्वेष रखता है आपके इस वचन ने एक स्त्री का भरी सभा में सबके समक्ष मान मर्दन होने दिया माता-पिता अपनी संतान को वचन देते हैं कि वो उनका साथ देंगे परंतु अपनी संतान को सही मार्ग पर रखना माता-पिता का कर्तव्य होता है यदि उचित समय पर आपका धनुष उठा होता आपने अपना स्वर उठाया होता तो आज संपूर्ण भारत महाभारत की चौखट पर ना खड़ा होता गंगापुत्र आपकी इस प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए कितना बड़ा मूल्य चुका रहा है यह संसार समय आ गया है कि उस प्रतिज्ञा को तोड़ दिया जाए क्योंकि उचित और अनुचित की परिभाषा प्रतिज्ञा से नहीं अंतर आत्मा की पुकार से बंधी होती है गंगापुत्र यह चुनाव आप का था और इसका फल भी आप ही भोग अपने चुनाव के लिए आप स्वयम उत्तरदाई है गंगापुत्र ना कि आपकी प्रतिज्ञा और ना ही आपका प्रारब्ध ठीक कहा आपने वासुदेव मैं अपने चुनाव का उत्तरदायित्व अपने सर लेता हूं मेरा चुनाव है कि मैं अपना वचन तोड़ नहीं सकता निराशा हुई मुझे यह जानकर कदाचित इसके लिए पांडव आपको क्षमा करते कदाचित याज्ञ सेनी आपको क्षमा कर दे कदाचित मैं आपको दोषी ना मानू परंतु इतिहास आपको इसके लिए कभी क्षमा नहीं करेगा गंगापुत्र [संगीत] रुकिए वासुदेव मैं नहीं चाहता कि मुझे क्षमा मिले वचन पूर्ण करने का पुण्य मुझे मिले ना मिले परंतु मौन रहने का दंड मुझे अवश्य मिलना चाहिए मैं अपने निर्णय से असंतुष्ट हूं परंतु इस बात का मुझे संतोष है कि पांडवों के पास वह अस्त्र है जो मुझे मेरी प्रतिज्ञा और मेरे श्राप से मुक्ति दिला सकता है आप भली भाति जानते हैं कि मैं किसके विषय में बात कर रहा हूं किंतु पांडवों को इसका ज्ञान नहीं उनका मार्गदर्शन आपको करना होगा वासुदेव भीष्म नामक समस्या का समाधान आप उनको सुझाए समाधान अपने गंतव्य तक पहुंचने को है गंगापुत्र [संगीत] नी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] पाथ

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