Friday, 2 January 2026

माता कुंती ने कर्ण से क्या प्रार्थना की थी Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 211 Pen Bhakti

[संगीत] प्रत्येक मनुष्य सफलता पाने के लिए कार्य करता है कुछ सफल होते हैं कुछ नहीं होते और जो सफल नहीं होते वह सदा अपनी असफलता का कारण या तो अपनी परिस्थितियों को बताते हैं या अपने सहयोगियों को दोषी ठहराते हैं परंतु क्या वास्तविकता में ऐसा ही होता है क्या कोई परिस्थिति या कोई व्यक्ति किसी की असफलता का कारण बन सकते हैं उत्तर हां भी है और ना भी कैसे आप इस तितली को देख रहे [संगीत] हैं आपने एक मक्खी को भी भी देखा हो प्रकृति ने दोनों को समान गुण दिए हैं रस पान करने का एक तितली फूलों पर जाकर उसका रस लेती और इस अवस्था में नए फूल खिलने की व्यवस्था भी करती है और मक्खी घाव पर बैठती है घाव को सड़ती है और रोग भी फैलाती है यदि इसमें किसी बात का अंतर है तो केवल सोच का यदि आप उचित मार्ग चुनेंगे तो आपको सफलता मिलेगी आप में उत्साह बढ़ेगा और यदि आप अनुचित मार्ग चुनेंगे तो आपको असफलता मिलेगी निराशा मिलेगी अब उचित मार्ग चुनना है या अनुचित मार्ग यह निर्णय तो आप पर निर्भर करता है मैं सदर राध करण ही कह [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लाऊंगा मेरा [संगीत] पुत्र कहां जा रहे हो पु उनके पास जो मेरे प्रश्नों से भयभीत होकर छिपकर बैठे हैं सूर्यदेव के पास मेग के आवण से बाहर निकलिए [संगीत] सूर्यदेव अब आप मुझसे और नहीं छिप सकते मेरे समक्ष आइए [संगीत] सूर्यदेव जीवन के आरंभ से हर प्रता मैंने आपको तर्पण किया उसके लिए बाहर आइए मैंने सदा आपका समान कि उसके लिए भार आए आपके कारण जो मेरा अपमान हुआ उस पर लिए भर आइए य कवज कुंडल मुझे देकर भी मेरे मन को जो भदा है आपने उस पीड़ के कारण [संगीत] आइए [संगीत] सं प्राप्त भास्कर हर सूर्य वीर्य कीय पुत्र जान गया कि मैं आपका पुत्र हूं आगे कहिए सूर्यदेव पुत्र मैं विवश था तुम्हारे जन्म के लिए भी और तुम्हारी पहचान छुपाने के लिए भी महा ऋषि दुर्वासा ने देवी कुंती की सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें य आशीर्वाद दिया कि वो जिस भी देवता का आवाहन करेंगी व उन्हें पुत्र देंगे देवी कुंती बालिका थी उन्हें लगा कि कहीं वरदान मिथ्या तो नहीं और उन्होंने खेल-खेल में मुझे य आवान दिया और वरदान से विवश होकर मुझे उन्हें अपना अंश देना पड़ा विवस थे या क्या आज विवश नहीं है माता कुंती को मुझे अपनाने में समाज का भय था परंतु आपको किस बात का भय था आपने मुझे सत्य क्यों नहीं बताया संसार भर को प्रकाश देने वाले ने अपने ही अंश को अंधकार में रखा क जब संसार मुझे सूत पुत्र कहकर नीचा दिखाता रहा तब आपकी दृष्टि क्यों नहीं झुकी जब सब मुझसे मेरा अधिकार छीन रहे तब आपके अहंकार को ठेस क्यों नहीं पहुची क तब तक आपरी प्रतीक्षा करते रहे जबक मुझे स्व हो मैं आपका पुत्र हूं क्यों मुझसे सत्य को दूर रखा आपने क्यों मैं मानता हूं कि मैंने तुम्हें सत्य से दूर रखा परंतु मैं सदैव तुम्हारे साथ था मैं नहीं चाहता था कि समाज को इस बात का ज्ञान हो मैंने तुम्हें यह कवच और कुंडल इसलिए दिए ताकि तुम अपने हृदय को और भी अधिक बलशाली बना सको तुम्हे समाज की कठोरता को सहने की शक्ति मिले मुझे क्षमा कर दो आपके अश्रू मुझे सां फना नहीं दे रहे अभी त भान कर आ रहे हैं कि मैं आपके लिए केवल एक फूल के अतिरिक्त और कुछ नहीं था हे [संगीत] ईश्वर मेरे पुत्र की सहायता [संगीत] करना जो स्वयं की सहायता करना जानते हैं ईश्वर भी उन्हीं की सहायता करते हैं [संगीत] भुआ मैं सदा आपकी पूजा करता रहा आपको र्पण देता रहा और भविष्य में भी मैं ऐसा ही करूंगा मैं सदा आपका सम्मान करूंगा क्योंकि मेरे लिए आप सदैव सबसे शक्तिशाली रहे हैं मेरा मन मलीन है आज परंतु मेरे मन में आपके प्रति कोई मेल [संगीत] नहीं एक बार अपने मुख से आपके जाने का समय आ गया है कल प्रात आपको सबके जीवन को अंधकार से निकालना विश्राम कीजिए पिताश्री [संगीत] कल्याण हो तुम्हारा ऐसी अवस्था में भी तुमने अपने पिता को तृप्त किया धन्य हो तुम दानवीर [संगीत] कर अब आप और कितना व्यथित रहेंगी बुआ आप अपने कर्मों को संसार से छिपा सकती हैं परंतु अपने कर्मों के फल को आप स्वयं से और कितना छि पाएंगे अपने कर्मों का सामना प्रत्येक को एक ना एक दिन करना ही पड़ता है बुआ परंतु उसका सामना कैसे करूंगी क्या कहूंगी उसे इसके समक्ष [संगीत] कर मैं कैसे उसे समझूंगी काना क्या यह सब इतना सरल है यदि सब कुछ इतना सरल होता तो जीवन जीवन नहीं होता बुआ मनुष्य को अपने भय का अपने अतीत का सामना करना ही पड़ता है और यह भीड़ जितनी शीघ्र हो मन से बोझ उतनी ही शीघ्र उतर जाएगा वोह जाइए [संगीत] समय आ गया है सत्य का सामना करने का समय आ गया आपको आपके जेष्ठ पुत्र से मिलने [संगीत] का दान चाहिए पुत्र [संगीत] दोगे सुना है राता काल सूर्य को अर्ध दे दे समय यदि तुमसे कोई कुछ भी मांगे तुम कभी मना नहीं करते उसकी इच्छा पूरी करते हो इसलिए मैं भी कुछ मांगने तुम्हारे समक्ष आई हूं क्या इस दुर्भाग्य शली माता को शबा दन दे पाओगे [संगीत] पुत्र [संगीत] क्षमा प्रार्थी तो मैं हूं राज माता राज माता मत क क्यों या अनुचित कह दिया मैंने यह कि सत्य जानने के पश्चात [संगीत] भी आपको राजमाता की क्यों कह रहा हूं मैं आपके गले क्यों नहीं लग रहा हूं आपके चरण स्पर्श कर आपको माता और जननी क्यों नहीं पुकार रहा हूं कहिए क्या अनुचित कर रहा हूं मैं राज माता मैं आपको माता कहकर इसलिए नहीं पुकार रहा क्योंकि यह आपका कर्म फल है आपने भी तो इसी भांती वर्षों तक ऐसा ही व्यवहार किया मेरे साथ आशीष दिया पर तु कभी अपना पुत्र कहकर नहीं पुकारा अश्रू बहाए परंतु कभी मुझे गले से नहीं लगाए कभी मुझे ममता नहीं थी और आज वही माता मेरे समक्ष प्रेम जताने के लिए आ गई है अधिकार का भाव कर्तव्य पूर्ण करने से मिलता है आपने अपना कर्तव्य कभी पूर्ण नहीं [संगीत] किया आज जताने क्यों आ गए मुझ पर आरोप लगाने से पूर्व मेरी व्या तो सुनलो पुत्र मैं विवश थी जब तुम्हारा जन्म हुआ मैं अविवाहित थी पुत्र क्या करती मैं मुझे तुम्ह त्यागना पड़ा विश्वास [संगीत] पुत्र अंजाने में हुए अपराध का भ मैं आज तक कधे प लिए [संगीत] हूं आपने अपनी था तो कह दी परतु मैं मेरा क्या दोष था एक बालक जिसने अपनी आंखें भी पूरी तरह नहीं खोली थी उसके जीवन में अने सदा के लिए अंधकार कर दिया एक नवजात को गंगा मां की भेट चढ़ा दिया आपने क्या आपने यह भी नहीं सोचा क्यों कि वो जीवित रहेगा या वो मर यदि वो बच गया तो संसार उसे किस नाम से पुकारेगा समाज उसे कितने ताने देगा कि उसका जीवन जीते जी नरक बन जाए ये भी नहीं सोचा आपने गंगा में इसीलिए बहाए ना क्योंकि गंगा मा पाप होती है मैं आपके लिए पापी था ना केवल एक पाप एक अभिशाप जिसे आप गंगा में बहाकर भूल गए आश्चर्य की बात यह है कि कभी आपने मुझे खोजने का प्रयास नहीं किया कभी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि मैं कि मैं जीवित हूं या मर गया आपको पता है कि जब भी मैं आपके समक्ष आता था आपको प्रणाम करता था तो एक विचित्र स्नेह एक अनोखा बंधन अनुभव करता था मैं क्या कभी ऐसा अनुभव नहीं करती थी तुम मेरे ही पुत्र इसका ज्ञान मुझे रंग भूमि में हुआ पर फर भी आप मन यह जानने के पश्चात आप समझा कितना बा आपके समक्ष एक और प्रश्न आकर खड़ा हो गया युवराज पथ की होड़ में प्रदा कर रहे अपने सारे पुत्रों को कैसे बताए जिसके कुल का वो अपमान कर रहे हैं वह उनका जेष्ठ भ्राता है हस्तिनापुर के समक्ष यह सत्य कैसे [संगीत] बताए कि मैं आपकी प्रथम संतान [संगीत] हूं बोलिए राजमाता कि आज अचानक क्या हो गया समत को पुत्र मैं नहीं चाहती कि मेरे पुत्र एक दूसरे का रक्त बए मुझसे सहन नहीं होता पुत्र मुझसे सहर नहीं होता समझ गया कि आप यहां मेरे लिए नहीं अर्जुन के लिए आई कि आप मुझसे क्षमा दान मांगने नहीं अर्जुन का जीवन दान मांगने आई क्या आप मुझसे क्षमादान मांगने [संगीत] नहीं अर्जुन का जीवन दान मांगने आई आप यहां इसलिए आई कि मैं अर्जुन का वत ना कर ऐसा मत क पुत्र मैं नहीं चाहती मेरा कोई भी पुत्र एक दूसरे का व करें ठीक है समस्त हस्तिनापुर के समक्ष यह स्वीकार कर सकती है कि मैं आपका जेष्ठ पुत्र हूं पता था मुझे कि कोई उत्तर नहीं मिलेगा मेरे जीवन पर अनेक बार संकट आया तब आपकी ममता नहीं जागी परंतु आज जब अर्जुन के जीवन पर संकट आया अपनी लजा अपनान [संगीत] सत्य [संगीत] में अर्जुन बहुत भाग्यशाली [संगीत] उसे आपकी ममता मिली मैं भले ही अर्जुन को युद्ध के द्वंद में हरा दू परतु आज उसने [संगीत] मुझे अता के द्वंद में हरा दिया तुम्हारी अपराध नहीं हूं [संगीत] मैं अपरा भत को और मत बढ़ इस य में भाग मत लो पुत्र अपने अनुज से युद्ध मत लखो पुत्र बस एक बार कह दो कि तुम मेरे पुत्र हो मैं आपका पुत्र हूं किंतु आप मेरी माता नहीं सदा स्मरण रखिएगा राजमाता इस सूत पुत्र की माता का नाम राधा है मैंने अवश्य कोनते बनकर जन्म लिया परंतु संसार मुझे सदा राधे करण के नाम से जानेगा मैं सूर्य पुत्र करण हूं किंतु मेरे पिता का नाम अधिरथ है मुझे स्वयं को सूर्य पुत्र के स्थान पर सूत पुत्र कहने में अधिक गर्व अनुभव होगा आप माता है अर्जुन की सभी पांडवों की क्योंकि आपने उन्हें बाला पोसा बड़ा किया प्रेम दिया और आश्चर्य की बात तो यह है कि आप आज भी उन्हीं की माता बनकर इस सूत पुत्र राधे करण के पास आई है यह आश्वासन पाने कि आपके पुत्र सुरक्षित रहे मेरे द्वार पर आए किसी भी याचक को रिक्त हाथ लौटने नहीं दे सकता मैं राजमा माता मैं आपको रिक्त हाथ लौटने नहीं दूंगा मैं वचन देता हूं कि इस महाभारत के पश्चात आपके पांच पुत्र जीवित रहेंगे केवल पांच यदि अर्जुन ने मेरा वध किया तो भी और मैंने अर्जुन का वद किया तो भी यदि अर्जुन मेरे हाथों वीर गति पाता है तो मैं सब कुछ छोड़कर आपके पास आ जाऊंगा मैं वचन देता हूं कि अर्जुन के अतिरिक्त आपके किसी पुत्र का वद नहीं करूंगा [संगीत] मैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...