Sunday, 4 January 2026

शिव जी का नाम चंद्रशेखर कैसे पड़ा था Amit Mehra Sankat Mochan Mahabali Hanuman 340 Pen Bhakti

[संगीत] हरि ओम नारायण [संगीत] हरि और जब समुद्र मंथन पुनः आरंभ हुआ तो वारुणी सुरा के साथ प्रकट हुई [संगीत] यह सुरा हमें ही मिलनी चाहिए हम मिलनी चाहिए हमें मिलनी चाहिए हम मिलनी चाहिए सुरा के सुगंध मात्र से ही असुरों की वृत्ति जागृत हो उठी और वह उसे प्राप्त करने के लिए तत्क्षण लात हो उठे माता सुरा अर्थात मदिरा हां हनुमान सुरा पान मनुष्य की दुष्यंत कर देती है यह पंच महापाप में से एक है मनुष्य के जीवन की सुख शांति ही नहीं उनके जीवन का विनाश का कारण भी होती है सुरा पान इसीलिए कभी भी सरा पान नहीं करना चाहिए हम चाए चाहिए चाहिए चाहिए [संगीत] नहीं असरो शांत यह सुरा हमारा लक्ष्य नहीं है नहीं तराज बली यह समुद्र बंथन से क्लांत हमारी देह को स्फूर्ति से भर देगी हां हां असुरों ये आप लीजिए [संगीत] [संगीत] कर पहले मुझे कराइए सुरा पान मुझे दे श्र करो और सुरा पान कराओ हटो मुझे करने दोरान करूंगा ह ह सुरा देखते ही आसुरी वृत्ति जाग उठी है इन असुरों की [संगीत] बस बहुत हो गया यह सुरा पान करके आपस में ही लड़कर मरना है या फिर अमृत पीकर अमर होना है इस विनाशकारी सुरा की मांग मत करो हमें अमृत मांगना है और कुछ नहीं जिससे कि जब अमृत उत्पन्न हो और हम उसकी मांग करें तो यह देवता विवश हो जाए हमें अमृत प्रदान करने को स्मरण रहे हमें अमृत चाहिए और कुछ नहीं किंतु दराज सुराही नहीं और भी अनेक बहुमूल्य वस्तु है क्या हमन देवताओं को ही दे देंगे मूर्ख हो तुम सब यदि अमृत मिला तो उसका पान करके तुम सब अमर हो [संगीत] जाओगे उचित है महाराज उचित है आरंभ किया जाए तो यह योजना थी दैत्य राज बली के मन में किंतु समुद्र मंथन मात्र अमृत के लिए ही हो रहा था और असुर सारामृत ले गए तो देवता तो ताले मत हो हनुमान प्रतीक्षा करो कथा में अनेक रोचक मोड़ आने वाले हैं वो दैत्य राज बलि के समझाने पर असुर मान गए और समुद्र मंथन से जो अन्य वस्तुएं निकली जिनकी देवताओं ने मांग की वह थी पारिजात वृक्ष पुष्पों से युक्त जिसकी दिव्य आभा कभी क्षीण नहीं होती उसे देवराज इंद्र ने मांग लिया जिसे वे स्वर्ग ले गए हरि ओम नारायण हरि रायण ह रायण ह ह नारायण फिर उत्सर्जित हुआ सर्व कामना पूर्ति करने वा कल्प वृक्ष उसे भी देवता प्राप्त करके स्वर्ग ले गए तत्पश्चात सुंदर अप्सराएं प्रकट हुई असुरों का मन तो ललचाया किंतु दैत राज बलि की बात को स्मरण करके वे पीछे हट गए इस प्रकार अप्सराएं भी देवताओं को प्राप्त हो [संगीत] गई ले जाओ तुम देवताओं इन्ह भी आरंभ किया जाए अप्सराओं के पश्चात इंद्रदेव का ऐरावत हाथी निकला जिसे ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण इंद्रदेव ने खो दिया था वह पुनः इंद्रदेव को प्राप्त होकर स्वर्ग चला [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] गया उसके पश्चात दिव्य अश्व उच्चे शवा समुद्र से निकला असुरों का धैर्य टूटता जा रहा था हा ये हमें मिलना ही चाहिए हा हा य मिल मिलना चाहिए हा हमें मिलना ही चाहिए असुर को धैर्य खोता देख इंद्रदेव ने वो अश्व दैत्य राज बली को प्रदान कर दिया इ हमें मिलना ही चाहिए आरंभ करो ह महादव महादेव श्री हरि श्री हरि नारायण ह मा जो वस्तुएं समुद्र से उत्सर्जित हुई थी वो मात्र सारे देवता एवं असूर को ही प्राप्त हुई थी ऐसा नहीं है हनुमान इसके पश्चात जो उत्सर्जित हुआ वो प्रभु भोलेनाथ को प्राप्त हुआ श्री ह नारायण श्री हरि नारायण श्री हरि नारायण श्री हरि नारायण हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण ह हरि ओम नारायण हरि हरि ओम रा हरि ओम नारायण हरि ओम नारायण हरि दैत्य राज बली अकस्मात ही इतने घनघोर मेघ गिर आए हैं देवराज समुद्र में ऊंची ऊंची लहरें उठ रही है ना जाने क्या होने वाला है [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आ [प्रशंसा] चंद्रमा चंद्रमा चमा चमा यह समुद्र में ऊंची उठती लहरें चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव है दैत्य राज बली देवराज लहर कितनी भी ऊंची हो हम समुद्र मंथन नहीं रोकेंगे चंद्रमा के स्थित रहने से लहरों की षणतावादी आरंभ करो दैत्य राज बली स्थिति बहुत विकट उत्पन्न हो गई है देवों और असुरों को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा तब उनकी समस्या का समाधान सुझाया गुरमा अवतार प्रभु विष्णुदेव ने [संगीत] रक्षा कीजिए महादेव हमारी रक्षा कीजिए [संगीत] महादेव प्रणाम भोलेनाथ भलेनाथ महादेव प्रणाम अपने भक्तों के संकट को दूर करने के लिए आप आ गए प्रभ प्रभु यह आपकी महानता है महादेव प्रभु श्री नारायण के कुर्म अवतार ने मुझे स्मरण किया तो मुझे आना ही [संगीत] था प्रणाम जगत पालक श्री हरि विष्णु [संगीत] देव प्रणाम देवाधि देव [संगीत] महादेव [संगीत] चंद्र गुरु तवा ज्वार उठायो मंथन काज पे संकट छायो तब ह कुर्मा युक्ति लगाई भोल टार विपत्ति आई चंद्र जटा में धारे शंभु खुल गए मेघ विनय हुआ अंबू शिव अब चंद्र शेखर धरि नामा देव करें जयकार प्रणा चंद्रशेखर महादेव की जय चंद्रशेखर महादेव की जय चंद्रशेखर महादेव की जयश मव की ज चंद्रशेखर महादेव की जय चंद्रशेखर महादेव की जय चंद्रशेखर महादेव की चंद्रशेखर महादेव कीय अच्छा तो इस प्रकार भोले बाबा ने चंद्रमा को अपने शीष पर धारण किया और प्रभु चंद्रशेखर कहलाए थे हां उनके ऐसा करने से ही पुनः समुद्र मंधन संभव हुआ और तब समुद्र के गर्भ से जिसका उत्सर्जन हुआ उनकी कृपा प्राप्त करना सब चाहते हैं फिर वह देव हो दानव हो या मानव जय श्री कुरमा अवतार विष्णु देव कीली की हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि ह ओम नारायण हरि ह नारायण ह रायण ह ओम नारायण ह रायण ह नारायण ह अब किसका का उत्सर्जन होने जा रहा [संगीत] हैय सुंदरी तो हम मिलनी चाहिए ये सुंदरी तो हमें मिलनी चाहिए हा यह सुंदरी तो हमें मिलनी ही [संगीत] चाहिए श्री और समृद्धि प्रदाता देवी लक्ष्मी को प्रणाम लक्षमी प्रणाम देवी लक्ष्मी प्रणाम देवी [संगीत] लक्ष्मी ओ श्री ह्रीम श्री कमले कलालय प्रसीद प्रसीद श्रीम ह्रीम श्रीम ओम महालक्ष्मी नमः [संगीत] [संगीत] हमें पुनः श्री संपन्न करने के लिए आपको कोटि कोटि प्रणाम देवी इनके तो इंगित मात्र से ही यह श्री हीन देवता पुना श्री संपन्न हो गए हैं धन की देवी है यह यह देवी लक्ष्मी है यह तो हम मिल मि ही चाहिए चा ही चाहिए अभी तक हम अधरों ने किसी चीज की मांग नहीं की है किंतु हम इनकी मांग करते हैं और सबको हम असरों की ये बात माननी पड़ेगी हां माननी पड़ेगी धन संपदा के लालच में तुम सबको मतिमंद कर दिया है यदि आप नहीं चाहते तो आप इनकी मांग मत कीजिए दैत राज बली किंतु मुझ राहु को जीवन भर इनका दास बने रहना स्वीकार है नहीं राहु मैं तो विवाह करूंगा इससे पटरानी बनाऊंगा इसे बस दैत्य राज बली अपने असुरों को बता दीजिए कि यह देवी लक्ष्मी है प्रभु श्री नारायण की अर्धांगिनी इनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा है हमें यह कोई भी हो परंतु हमारे परिश्रम से इनका आविर्भाव हुआ है मिलना ही चाहिए करेंगे कोई अन्य नहीं हम ऐसा नहीं होने देंगे जैसा करने का प्रयास भी करेगा उसका अंत कर देंगे हम आगे बढ़ने का प्रयास मत करो अ परम भयंकर होगा हट जाओ विनाश कर देंगे कर आगे बढ़ने का प्रयास मत करो अनथा परिणाम भकर माता माता लक्ष्मी जी के प्रति ऐसी दुर्भावना कैसे उत्पन्न हो गई असुरों के मन में यही है असुरी वृति पुत्र हनुमान जिनके मन दूषित होते हैं उन्हें मात्र अपना स्वार्थ दिखाई देता है वह यह भी नहीं समझते कि कौन मां बहन पुत्री समान है ऐसी वृत्ति वाले मनुष्य स्वयं ही अपने विनाश का मार्ग खोल देते हैं सत्य है माता यदि असुर भी देवताओं की ही भाति माता लक्ष्मी जी को पुत्र भाव से प्रणाम करते तो वह भी माता लक्ष्मी जी की कृपा के भागी होते हां हनुमान क्योंकि प्रणाम करने वाला स्वयं ही आशीर्वाद का अधिकारी बन जाता है फिर चाहे वह अपने शत्रु को प्रणाम करें या अपने हितेश को असुरों ने देवी लक्ष्मी को प्रणाम करने के स्थान पर दूषित दृष्टि से देखकर पाप किया था ऐसा ही महापाप भविष्य में लंकेश रावण करेगा और उसके पाप कृत्य का परिणाम होगा उसका विनाश लंकेश रावण माता यह नाम तो हनुमान को सुना प्रतीत हो रहा है हनुमान अभी तुम्हारी स्मरण शक्ति क्षीण हो गई है पुत्र किंतु चिंता मत करो समय आने पर तुम्हें सब स्मरण हो जाएगा परंतु अभी अनियंत्रित असुरों को नियंत्रण करना अवश्य था माता यदि मैं वहां होता तो उसी क्षण उन पापी असुरों को तण दे देता तनिक सा भी नहीं सोचता कि उन मायावी असुरों के समक्ष हनुमान एक साधारण वानर बालक है तुम्हारी भावना में समझती हूं पुत्र विधि का विधान है जैसी करनी वैसी भरनी पाप कर्म का दंड सबको किसी ना किसी रूप में भोगना ही पड़ता है किंतु ईश्वर पापी को तभी दंडित करते हैं जब उसके पापों का घड़ा भर जाता है इसीलिए देवी लक्ष्मी जी शांत रही उन्हें प्रतीक्षा थी मात्र अपने स्वामी प्रभु श्री नारायण की देवी लक्ष्मी हमारी है और हम इन् प्राप्त कर कर ही रहेंगे अगर इनके लिए युद्ध भी करना पड़े तो हम पीछे नहीं हटेंगे नहीं हटेंगे अपने को आमंत्रण मत सुरो अन्यथा तुम सबको भुगतना होगा देवराज इद्र तराज बली के होते हुए असरों का कोई हित नहीं कर सकता इनकी देवी लक्ष्मी को प्राप्त करने की मांग कोई अनुचित नहीं है समुद्र मंथन से जो भी निकल रहा है वो मात्र देवता म का नहीं है असुरों का भी अधिकार है उस पर हां हम असुरों का भी अधिकार है सब पर हम अपना अपना अधिकार लेकर शांत हो जाइए आप सब शांत हो [संगीत] जाइए कन्या कोई भेट की वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी अपना अधिकार जगाने [संगीत] लगे यह अधिकार तो कन्या का होता है कि वो किसे वरण करें आप असुर मेरा वर्णन करना चाहते हैं किंतु यह सत्य सर्वद है कि मैं श्री हरि विष्णु देव की अर्धांगिनी [संगीत] और मैं आज उन्हीं के लिए यहां आई यदि आप विष्णु देव के लिए आई है तो विष्णु देव है कहां अत उचित होगा कि आप हम में से किसी का वर्ण कर ले देवराज यह सुर माता लक्ष्मी और प्रभु नारायण के प्रति ऐसे प्रश्न कैसे कर सकते हैं हम सब समर्थ है शक्तिशाली है अगर वर्ण करना है तो हमारा कीजिए देवी आपको इच्छा अनुसार वर्ण करने का अधिकार देते हैं हम में से किसी एक को चुन लीजिए हा जो यहां उपस्थिति नहीं है उसका वण कैसे कर सकती है आप मुझे विश्वास है मेरे स्वामी विष्णु देव यही [संगीत] [संगीत] है किंतु यहां विष्णु देव है कहां तो हमें दिखाई देते परंतु यहां तो मात्र कुर्म है जिसे सभी देवता का अवतार मान रहे [संगीत] हैं स्वामी श्री हरि के कुर्मा वकार को प्रणाम देवता जो मान रहे हैं वो सत्य है इनकी उपस्थिति का अर्थ है कि मेरे स्वामी श्री हरि विष्णु देव यही उपस्थित है तो क्या आप हम महाबली असुरो को छोड़कर इस कुर्मा अवतार विष्णु का वण करेंगी बताइए यह असुर देवी लक्ष्मी के साथ अभद्रता का व्यवहार कर रहे हैं स्वामी विष्णु देव की प्रतीक्षा करके आप समय व्यर्थ में नष्ट कर रही है आपके समक्ष एक से बढ़कर एक महावली योद्धा महा ऐश्वर्य शली असुर उपस्थित है वरण कर लीजिए किसी भी असुर का स्वामी यह कैसी परीक्षा ले रहे हैं आप मेरी यह प्रतीक्षा की घड़िया असज होती जा रही है मैं यहां आ गई हूं अब आप भी आ जाइए श्री हरि नारायण [संगीत] देवेश्वरी प्रणाम श्री हरि आप अचानक [संगीत] यहां देवी लक्ष्मी उपस्थित हो चुकी है फिर आप उन्हें इतनी प्रतीक्षा क्यों करा रहे हैं उन्होंने भी तो मुझे बहुत प्रतीक्षा कराई है देवेश्वरी श्री हरि ये बालकों की भाति हट है आपका या कोई लीला आप जो चाहे समझ लीजिए देवी अच्छा तो एक बहन के हट से आपका परिचय नहीं हुआ है आपको स्मरण है ना मेरे विवाह में भ्राता की सभी रीति आपने निभाई थी तो यह आपकी बहन पार्वती आपको हटात भी देवी लक्ष्मी के समक्ष ले जा सकती है तो आप चल रहे हैं भ्राता विष्णु देव या मैं अच्छा अच्छा चलता हूं सत्य तो यह है कि मैं अपनी बहन देवेश्वरी की ही प्रतीक्षा कर रहा था बिना बहन के भाई कैसे जा सकता है विवाह के लिए स्वामी क्यों प्रतीक्षा करा रहे हैं मुझे मत कीजिए प्रतीक्षा विष्णु देव नहीं [संगीत] प्रभु मेरे स्वामी [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम देवी लक्ष्मी को लाने में हमने श्रम किया है विष्णुदेव कैसे ले जा सकते हैं इन्ह मुझे चाहिए मुझे चाहिए हां मुझे चाहिए शांत शांत क्या हुआ कहां खो गई बहन लक्ष्मी आपके स्वामी आपके समक्ष है [संगीत] [संगीत] अद्भुत अलौकिक मंगल बेला होत पुनः लक्ष्मी हरि मेला विष्णु कमला दो मुदिता देव ब्रह्मा शिव सब हर्षिता वरमाला जब दार परस्पर बरसाए सब पु युगल पर व्यापत है कण कण में उल्लासा आई पुनः करवे श्री [संगीत] वासा कैसा अद्भुत एवं मनोरम होगा वो दृश्य प्रभु श्री हरि नारायण का विवाह माता लक्ष्मी के साथ भोले बाबा तथा समस्त देवगण एवं देवियां भी [संगीत] उपस्थित माता कितने भाग्यशाली होंगे वो जो इस सुनहरे पल के साक्षी होंगे माता कितना असीम आनंद का सुख प्राप्त हुआ होगा जब माता पार्वती जी ने अपने भ्राता श्री हरि नारायण एवं माता लक्ष्मी जी का मिलन करवाया होगा सत्य हनुमान बिछड़े परिजनों को मिलाने के आनंद की तो कोई कल्पना ही नहीं होती ऐसे मिलन के परम आनंद का अनुभव तुम्हें भी होगा हनुमान जब भविष्य में तुम भी इनका मिलन कराओ ग फिर क्या हुआ माता देवी लक्ष्मी के आने से देवता पुनः श्री संपन्न होकर नई ऊर्जा से भर उठे पुनः सागर मंथन तीव्र गति से प्रारंभ हो गया फिर वह क्ण आ ही गया जिसकी प्रतीक्षा देव एवं दानव दोनों समुदाय बड़ी व्यग्रता से कर रहे थे [प्रशंसा] जय श्री हरि विष्णुदेव जय श्री हरि [संगीत] [संगीत] विष्णुदेव धनवंतरी देव आयुर्वेद के [संगीत] साथ प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता और कर्मानुसार ही ईश्वर फल देते हैं

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