न हर्ता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] श्री पिता श्री का क्रोध जागृत हो गया है अब पिता श्री उस चल को उचित दंड देंगे महादेव के क्रोध का सामना कोई नहीं कर सकता उनकी क्रोधाग्नि से उत्पन्न हुआ वो अहंकारी जलंधर भी नहीं अंततः मेरा कर्तव्य पूर्ण हुआ अब उस धूर्त दुष्ट जलंधर को पिता श्री के क्रोध का सामना करना पड़ेगा अति पावन सृष्टि के ऊपर हम में से कोई नहीं जलंदर जिसे क्रीड़ा समझ रहा है वो सृष्टि के नियम है और उन्हीं नियमों के साथ कड़ा कर जलंदर ने महापाप किया है जिसका दंड उसे अवश्य मिलेगा आपू से इसका दंड मिलकर ही रहेगा आप से इसका दंड मिलकर ही [संगीत] रहेगा स्वामी का क्रोध क्या प्रलय तांडव का रूप लेने जा रहा है अब उस दुष्ट का संघार होने से कोई उसकी रक्षा नहीं कर सकता पिताश्री की यह हुंकार उनके डमरू का नात संकेत है जालंधर के अंत का महादेव के क्रोध से उत्पन्न हुई इस ऊर्जा को सहन करना कठिन है स्वामी का रोष घातक होगा सृष्टि के शत्रु जलंधर के लिए विता श्री की ऊर्जा तो विकराल रूप धारण कर रही है अदभुत ये ये क्या है यह तीव्र भूकंप मेरे कलाश में कैसे है ब ये सब क्या हो रहा है सब कुछ सब कुछ नश प्रश क्यों हो रहा है मेरे कैलाश पर किसी ने आक्रमण किया है कि कौन है वो दसाज इतना दुस्स तुमने कैसे किया जलंदर सृष्टी के नियमों को भंग कर उसके चक्र को विप दिशा में गतिशील करने का कैसे आदेश दिया तुमने शिष्ट औरस के नियमों के साथ कड़ा का तुम्हें कोई अधिकार नहीं अधिकार तो तुम्हें नहीं है मेरे कैलाश में आकर मुझे भयभीत करने का कौन हो तुम द सासे महादेव हूं मैं और मैंने किसी को अधिकार नहीं दिया कि वो मेरे नियमों को भंग करें फिर भी मैं तुम्हें एक अवसर देता हूं अपने किए का पश्चाताप कर लो मेरे समक्ष प्रस्तुत होकर मुझसे क्षमा मांग लो जलंदर शमा मैं जलंदर सर्वश्रेष्ठ जलंदर करा भी नहीं नहीं रहे तुम्हारे नियम नहीं रहा तुम्हारा समय मैं हूं वास्तविक भगवान और अब मेरे ही नियम स्थिर है क्स बचाइए जिंदा तुम्हें कोई शति नहीं पहुंच दे दूंगा मैं आ [संगीत] यदि यही इा है तुम्हारी तो उचित है आओ युद्ध करो मुझसे विजय प्राप्त करो मुझ पर और देवताओं को आदेश देने के लिए स्वतंत्र हो जाओ यु करूंगा अवश्य करूंगा पराजित करूंगा तुम्ह श अपराज मैं आप ऐसा कदापि नहीं करेंगे शिव से युद्ध नहीं करेंगे आप ंदा सुना नहीं तुमने शेव ने चुनौती दी है मुझे ललका है मुझे स्वीकार करूंगा उसकी चुनौती युद्ध करूंगा उससे हीरू नहीं हूं बंदा सर्वश्रेष्ठ जलंदर हूं मैं पर श्रेष्ठ आप असुर गुरु शुक्राचार्य की चेतावनी को क्यों भूल रहे है जाओ जलंदर किंतु स्मरण रखना कभी भी महादेव या कैलाश के निकट मत जाना महादेव के समक्ष आए उनके हाथों से तुम्हारा अंत होगा आप कैलाश जाकर महादेव के समक्ष नहीं जा सकते मुझे भय है कि भ तुम्हारे भय का कोई कारण नहीं वृंदा यह मत भूलो तुम्हारा पति हूं मैं और जब तक तुम जीवित हो मेरा कोई वद नहीं कर सकता पराजित करूंगा शिव को चुनौतिया नष्ट करूंगा उसकी एक छत्र साम्राज्य होगा हमारा सदा के लिए भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर और शक्ति के रूप में स्थापित होगा और तुम होंगी शक्ति जब तक तुम जीवित हो मुझे कोई भय नहीं मैं संसार पर विजय प्राप्त करना चाहता था इसीलिए तुमने मुझे शुक्र चारे के पास जाने का सुझाव दिया इसीलिए आज भी असुरी वृंदा बनो जिसने मुझे सर्वश्रेष्ठ भगवान जलंदर को अपने वश में कर लिया था ंदा अपने भीतर वही शक्ति जागृत करो और मेरा बल बनो मेरी दुर्बलता नहीं मेरा जाना अनिवार्य है इसलिए मुझे अस्त्र देकर विदा करो मैं चिंतित अवश्य हूं किंतु आपकी प्रेरणा भी तो मैं ही हूं आपकी दुर्बलता नहीं बनूंगी मैं आपकी विजय की कामना करूंगी मेरे प्रिय बल श्रेष्ठ आप ही है संसार के [संगीत] भगवान [संगीत] सावधान रहिएगा बल [संगीत] श्रेष्ठ भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर को सावधान रहने की कोई आवश्यकता नहीं वृंदा मेरे विजय होकर लौटने तकरी यही प्रतीक्षा [प्रशंसा] करना कभी भी महादेव या कैलाश के निकट मत जाना अन्यथा तुम्हारी मृत्यु आलिंगन करेगी तुम्हारा श ने चुनौती दी है मुझे स्वीकार करूंगा उसकी चुनौती य करूंगा उसे कैलाश सदय दूरी रे अ से दूर [संगीत] रगी [प्रशंसा] [संगीत] रुक गई मेरी प्रिय बल श्रेष कदाचित कैलाश जाने का उनका निर्णय बदल दिया है उन्होने मैं तो यही कामना कर रही थी कि वो कैलाश ना जाए [संगीत] ंदा मुझे तो जाना होगा किंतु जाने के पूर्व एक अभेद कवच का निर्माण करूंगा जिससे यह भवन और तुम सुरक्षित रहोगी [संगीत] अब तुम यह पवन सुरक्षित है और जब तक तुम सुरक्षित हो ंदा मैं सुरक्षित हूं प्रय बल श्रेष्ठ जब तक मेरे तन में प्राण है मेरे प्रिय बल श्रेष सुरक्षित है किंतु मैं फिर भी इतनी विचलित क्यों [संगीत] हूं भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर अपने इस अंतिम पादा को भी मिटाएगा दे आ रहा हूं मैं महादेव और जलंधर के मध्य प्रारंभ होने वाला युद्ध बड़ा विनाशकारी होगा सर्वत्र विनाश का कारण भी बनेगा उसके फल स्वरूप सभी प्राणियों को अपार पीड़ा भी होगी किंतु इस कोटिल जलंधर का अंत करने के लिए यह युद्ध अति आवश्यक भी [संगीत] है [संगीत] कैलाश निवासी शेव मार आओ मार आओ मार आओ म आओ आ गया मैं बहुत चुनौतिया दे रहे [संगीत] थे आओ मार आओ ग युद्ध मुसे ग यु मुसे क्या य जलंधर अपनी मृत्यु के मुख में प्रवेश कर चुका है पिता श्री के इस प्रकार शांत होने का अर्थ है शीघ्र उनके क्रोध का ज्वालामुखी फटने वाला है महादेव की एकाग्रता उनकी स्थिरता इस बात का संकेत है कि उनका क्रोध अब इस दुष्ट का संघार करेगा कर य मुसे रे सामने भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर खड़ा [संगीत] है वित हो गए क्या विनाश काले विपरीत बुद्धि मूड मूर्ख बुद्धि का यही परिणाम होता है अहंकार भरा दुस्साहस का परिणाम होता है सर्वनाश अपने बल के ब्रम में महादेव से उसी प्रकार युद्ध करने आ गया है वह [संगीत] मूर्ख जैसे एक मूषक सिंह को चुनौती देने उसकी गुफा में प्रवेश कर जाए दुष्ट धूर्त जलंधर को अब अपने समस्त कुकर्म का फल अवश्य प्राप्त होगा क्या हुआ महादेव तुम्हें तो अवश्य लगा होगा कि तुम्हारी ललकार सुनके मैं भयभीत हो गया आऊंगा तुमसे यद्ध करने नहीं आऊंगा किंतु अनुचित था वो कैसे तुम्हारा ये क्रियाकलाप अनुचित है तुम्हारे सारे विचार अनुचित है किंतु आप कोई चिंता नहीं तुम्हारे सामने भगवान सर्वश्रेष्ठ ज अंदर खड़ा है अनुचित को चित करूंगा मैं जिसका प्रारंभ हमारे इस युद्ध से तुम्हारी पराजय के साथ होगा भैया मुझे ज्ञात है इसके मुख से ये शब्द सुनकर इनके इस दुस्साहस से आप अत्यंत क्रोधित हो रहे किंतु स्मरण रखिएगा भैया हमने जो भी किया इसी परिणाम के लिए तो किया जालंधर जी को कैलाश लाने के लिए किया और अब जब वह यहां है तो हम उनके और पिताश्री के मध्य कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते भैया हमें शांत रहना होगा व्यर्थ गवाने के लिए समय नहीं है मेरे पास तुम बाहर आते हो या मैं भीतर आके तुम्ह पार खीच लू ब बीत हो गया है प्रतीत होता है चल अंदर प्रसन्न [प्रशंसा] हुआ नहीं मुझे महादेव को रोकना ही होगा अन्यथा अनर्थ हो जाएगा रुकिए महादेव मुझे मत रोक नारायण मुझे ज्ञात है कि जलंदर ने आपके प्रति सृष्टि के प्रति बहुत बड़े अपराध किए हैं परंतु यह भी तो स कि उसका जन्म आपकी क्रोधाग्नि से हुआ है महादेव यदि उसमें आपके क्रोध का अंधकार है तो आपकी अच्छाई के प्रकाश का अंश भी अवश्य होगा हां महादेव और अच्छाई और बुराई तो सभी में होती है केवल उसके भीतर की अच्छाई को जागृत कर की आवश्यकता है महादेव मुझे एक अंतिम अवसर दीजिए हो सकता है कि मेरे समझाने पर जालंधर समझ जाए क्योंकि यदि आपकी और जालंधर के मध्य युद्ध हुआ तो आपकी जय तो निश्चित है परंतु उसके पश्चात युद्ध के जो परिणाम होंगे वह अत्यंत भयंकर होंगे युद्ध तो वैसे भी किसी समस्या को सुलझाने का अंतिम उपाय होता है तो जलंधर को समझाने में हानि ही क्या है आपके ही आदेशानुसार सृष्टि का पालनहार हो मैं आप निश्चिंत रही है सृष्टि को कोई हानि नहीं पहुंचने दूंगा जलंधर अपने अज्ञानता अपने अहंकार वश यह सब कर रहा है हो सकता है मेरे समझाने से वह समझ जाए और सृष्टि से इस महायुद्ध का संकट टल [संगीत] जाए अब मैं कैसे हस्तक्षेप करूं पिता श्री और मामा जी के मध्य उचित है नारायण समान रखना यह उसका अंतिम अवसर होगा आप निश्चिंत रहिए महादेव यदि जलंधर मेरे समझाने पर भी नहीं समझा तो सबसे पूर्व उसे मुझसे युद्ध करना होगा और मैं ही उसका शीष विलग भी [संगीत] करूंगा [संगीत] मामा जी मेरे कुछ कहने के पूर्व आपको यह बताने के पूर्व कि जालंधर का वद तो मात्र पिता श्री कर सकते हैं आप प्रस्थान भी कर [संगीत] गए क छिपे हो तुम पार क्यों नहीं आते सर भस्म धारी भस्म करूंगा तुझे भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर का संयम टूटा है भगवान से प्रतीक्षा करवाना उचित नहीं इसका उचित तन दूंगा तुम्हे [प्रशंसा] मैं य विशाल काय प्रति छाया किसकी है कौन है विशाल का एक पक्षी जो मुझ पर मंडराक अपनी मृत्यु को आमंत्रित कर रहा है ओ नारायण अच्छा अब समझ पजे के भय से तुम्हारा व शिव स्वयं नहीं आ सका तो उसने तुम्ह भेज दिया मुझसे युद्ध करने बड़ी विचित्र और हास्य स्पद बात है य मुझे चुनौती देकर रा व शिव स्वयं कहीं जाकर छिप गया अब मैं तो आ गया य किंतु वो मेरे समक्ष आने से संकोच कर रहा है बीत हो गया है लगता है जलंदर प्रसन्न हुआ जलंधर जिन महादेव की क्रोधाग्नि से तुम उत्पन्न हुए हो उन्हीं महादेव का अपमान कर रहे हो सर्वथा अनुचित है यह क्या प्राप्त होगा इससे तुम्हें महादेव ब्रह्मदेव और मैंने वर्षों के तप के पश्चात सृष्टि के नियमों को स्थापित किया और तुम उन्ही नियमों को नष्ट करना चाहते हो और कारण क्या है इसका मात्र तुम्हारे अहंकार की तुष्टि तुम्हारे बल का प्रदर्शन जो तुम कर रहे हो उससे सृष्टि ही नहीं रहेगी तो किस पर अपना अधिकार स्थापित करोगे तुम किसे दिखाओगे अपना बल भूल सभी से होती है जलंधर परंतु महत्त्वपूर्ण है उसे समझकर उचित पथ पर लौटना अभी भी देर नहीं हुई है जालंधर महादेव क्रोधित है तुमसे परंतु यदि तुम उनके समक्ष जाकर उनसे क्षमा मांग लोगे तो वो तुम्हें अवश्य क्षमा कर देंगे भोले भंडारी हैं वो अहंकार त्याग दो जलंधर जाओ उनके शरण में क्षमा मांग लो उनसे टाल दो इस महायुद्ध को और अपने सर्वनाश को सर्वनाश सर्वनाश होगा अवश्य होगा किंतु मेरा नहीं तुम्हारे शिव का पराजित करूंगा शिव को और फिर बक आऊंगा उचित कहाना नारायण शरण में तो आना होगा मुझे नहीं तुम सबको मेरा शरणागत बनना होगा भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर हूं मैं जलंदर हूं मैं जलंदर हूं मैं जलंदर मैं पराजित करूंगा तुम त्रिदेव को मैं जलंधर का अहंकार तो वन की उस अग्नि के समान है जो एक बार प्रारंभ होती है तो फिर सर्वत्र विनाश के बाद ही पूजती है अहंकार रूपी बुद्धि का विकार व्यक्ति को अंधकार की ओर ले ही जाता है और जब उसकी अति हो जाए तो फिर जिसमें अहंकार का वास होता है उसका संघार होकर ही रहता है मैं इस विचार से यहां आया था जलंधर कि तुम्हें तुम्हारी रक्षा का एक अवसर दूंगा परंतु प्रतीत होता है तुमने वो अवसर भी खो दिया है तुम कौन होते हम रक्षा करने वाले तुम करोगे मेरी रक्षा मेरी भगवान सर्वश्रेष्ठ जलंदर की यह कहकर तुमने मुझे अपमानित करने का दु सास किया [संगीत] [प्रशंसा] है गरुड़ आनंद आएगा अब तुम्हें पराजित करने में नारायण जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है जलंधर तुम्हे मैंने तुम्ह एक अवसर दिया था किंतु तुमने वो भी खो दिया अब तुम उसका परिणाम भुगतो [संगीत] फ नारायण ने जालंधर का अंत कर दिया मैंने तुम्हें सुधरने का एक अवसर दिया था किंतु तुम तो सभी सीमा लांग है उसी का दंड है [संगीत] यह गरुड़ [संगीत] भा [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] प्राप्ति देखो मुझे कुछ नहीं हुआ मुझे मृत्यु दान देने चले थे मुझे मैं आमर हूं क्योंकि मैं भगवान सर्वश्रेष्ठ लंगर हूं कुछ नहीं हो सकता मेरे प्रिय बल श्रेष्ठ को जब तक मैं जीवित हूं कुछ नहीं हो सकता प्रभु यह कैसे संभव है भगवान नारायण ने तो जालंधर के उदर में छिद्र रूपी घाव किया था किंतु यह तो कुशल है और फिर वह इतने ऊंचे स्वर में क्यों चिल्लाया प्राप्ति सूर्यदेव असुर गुरु शुक्राचार्य ने जलंदर को अष्ट सिद्धियां प्रदान की है ह मा महिमा गरिमा लगी मा प्राप्ति प्रा कर्म इशिता और वशिता प्रदान करता हूं अष्ट सिद्धि पिताश्री इनके साधक को तो अलौकिक शक्तियां प्राप्त होती है प्राप्ति सिद्धि के बल पर साधक कुछ भी प्राप्त कर सकता है कैसा भी निर्माण कर सकता है चलन ने इसी सिद्धि के बल पर पुन पूर्णता प्राप्त की है उसे पराजित करना अत्यंत कठिन [संगीत] होगा किंतु इतने सशक्त प्रहार के बाद भी वह सिद्धि का प्रयोग करने में सक्षम है इसका आश्चर्य भी है मुझे स्मरण रखो तुम सभी जब तक मेरे प्राण है मेरे प्रिय पल श्रेष का कोई वध नहीं कर सकता कोई मद नहीं कर सकता मेरा कोई नारायण पुन मेरी ओर आने का दसास कर रहा [प्रशंसा] [संगीत] है पिता सिद्धि का प्रयोग किया है इस धूत [संगीत] ने इस दुष्ट जलंदर ने तो अपनी सिद्धि का प्रयोग कर गरुड़ को सम्मोहित कर अपने वश में कर लिया [संगीत] है [संगीत] [संगीत] [संगीत] द [संगीत] अकस्मात प्राप्त शक्तियों का दुरुपयोग क्षणिक लाभ तो दे सकता है किंतु अंततः बड़ी हानि का कारण बनता है
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