[संगीत] बोलो वानर कौन हो तुम मेरी अनुमति के बिना तुम लंका में प्रवेश नहीं कर सकते शांत माता शांत आप के इस क्रोधित और विकराल रूप के पीछे छिपे हुए सौम्य एवं शांत रूप से मैं भली भाति परिचित हूं वह सुंदर और मनोहर रूप जिससे महा जोगी भगवान शिवशंकर भी सदैव मोहित रहते [संगीत] हैं [संगीत] स्वामी स्वामी कहां है आप देखिए हमारी रक्षिका देवी अधिक क्रोध में स्वामी अनिष्ठा के संकेत मिल रहे हैं कहां है आप [संगीत] स्वामी [प्रशंसा] महारानी [संगीत] मंदोदी अग्नि तेरा यहा [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी मारानी मत्री आज आप प्रात काल से ही कुछ व्याकुल सी है लकनी गोचा सबको सतर्क कर दिया है मैंने यहां तक कि मैं स्वयं भी यहां उपस्थित हूं फिर आप किसलिए इतनी चिंतित है क्यों महारानी मदी स्वामी स्वामी प्राथ काल से अशकन हो रहे हैं और और अब तो देवी चामुंडा के मंदिर में उनका रूप दहकती हुई अग्नि की तरह दिखाई दे रहा है स्पष्ट है कि देवी अति अधिक क्रोध में है स्वामी स्वामी अनिष्ट के संकेत मिल रहे हैं आप स्वयं मंदिर चलकर देख [संगीत] लीजिए माता जिस पर आपकी कृपा हो वह तो आपको किसी भी रूप में पहचान लेगा मैं हनुमान हूं एक समय प्रभु महादेव और स्वयं आपने वैद वदनी का रूप धारण करके मेरा मिलन प्रभु श्री राम से करवाया था उसी क्षण मैंने आपके उस रूप के दर्शन किए थे माता जिसे महादेव भी अब अलग देखते [संगीत] हैं अपने उस रूप के दर्शन दीजिए माता अपने उस रूप के दर्शन देकर हनुमान को कृतार्थ कीजिए माता [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रणाम माता पार्वती आइए स्वामी स्वयं अपने नेत्र से माता का रौदत रूप देख लीजिए लंकेश दशानन रावण का आपको प्रणाम है देवी चामुंडा ये कैसे हो गया स्वामी मेरा विश्वास कीजिए मैं सत्य कह रही हूं अभी अभी कुछ क्षण पूर्ण इन इन दीप की ज्योति ज्वालामुखी भाती भक रही थी और माता के चारों ओर उनकी क्रोध की अग्नी जलती हुई दिखाई दे रही थी हा ये देवी के क्रोध की नहीं आपके भ्रम की अग्नी है जो बारबार भड़क रही है हूरों की महारानी को यह शोभा नहीं देता महारानी मंदोदरी मैं आपको एक बात याद दिला दूं कि आप उस लंकेश की पत्नी है जिससे नवग्रह भया क्रांत रहते हैं जिसका नाम सुनते ही देवता कंपित हो जाते हैं जिसका कुछ भी हित नहीं कर सकता आप उस रावण की पतनी है माता मैं यहां किसी का कोई अहित करने के उद्देश्य से नहीं आया हूं मैं तो मात्र इसलिए तुम्हारे यहां आने का उद्देश्य मैं भाप चुकी हूं हनुमान तुम यहां देवी सीता को ढूंढने आए हो ना जिनके विषव में तुम्हारे प्रभु श्रीराम व्याकुल है यह कार्य लंकेश रावण का ही है आर्य है माता जब आपको सब ज्ञात है तो आपने मुझे क्यों रोका उस दुष्ट रावण और उसके इस पाप की नगरी लंका की रक्षा क्यों कर रही हैं आप माता भगवान शिव की अर्धांगिनी और जगत जननी माता पार्वती को यह सब क्यों करना पड़ रहा है [संगीत] माता यह व्यवस्था है मेरी विवशता आपको कोई कैसे विवश कर सकता है माता तुम जानना चाहते हो तो सुनो हनुमान रावण कुशल संगीतज्ञ एक समय महादेव के भक्त रावण ने स्वामी को प्रसन्न करने के लिए संगीत और स्तुति को माध्यम बनाया ऐसा मधुर संगीत था उसका कि संपूर्ण ब्रह्मांड संगीतमय हो उठा जटा गल जवल प्रवाह पावितस्थले गले वलम लंब बिता भुजंग तुंग मालिका टम मड मड मन निनाद मव वयम चक जंड तांडव तरो तुन शिव शिवम चटा कटा हस भ्रम भ्रमण लिंप निर्झरी विनल बज वल्लरी विराजमान मर्तनी भगत थग थग जवल ललाट पट्ट पाव के किशोर चंद्र शेखरे रति प्रतिक्षणम मम धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधु बंधुर स्फुरद दिगंत संतती प्रमोद मान मान से कृपा कटाक्ष धरणी निरुद्ध दुर्धरा पदी क्वज दिगंबरा मनो विनोद मेत वस्तु नि प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंच कालि म प्रभाव कंठ कंद रचि प्रव कंध स्मर दम पुरम भव दम मदम गजदा कदम समत कदम भजे जयव विभ्रम भ्रम भुजंगम सत वि निर्गम क्रम पुर कराल भाल हवा धिम धिम धिम नन मतंग ंग मंगल अनि क्रम प्रवर्तित प्रचंड तांडव शिव कदान लिंप निर्झरी निकुंज कोटरे वसन विमुक्त दुरमति सदा शरथ मंज लिम वहन लोल लोल लो चनो ललाम लवेति मंत्र मु चरण कदा सुख भवा [संगीत] रावण मेरे प्रभु यह सत्य है माता संगीत के माध्यम से शीघ्र ही आत्मा परमात्मा से एकाकार हो जाती है इसीलिए महादेव शिव भी संगीत के स्वरों से प्रसन्न होकर खींचे चले आए हां हनुमान रावण ने स्वामी को प्रसन्न तो किया ही उनसे वरदान के रूप में प्रभु का आत्मलिंग मांग लिया आत्मलिंग हां हनुमान आत्मलिंग स्वामी का ही एक रूप है जो सदैव उनके हृदय में विराज है रावण उसे यहां लंका में लाकर प्रतिष्ठित करना चाहता था जिससे उसकी लंका सदैव के लिए अजय एवं अभेद हो जाए प्रभु तो भोलेनाथ हैं उन्होंने अवश्य ही रावण की इच्छा पूर्ण कर दी होगी प्रभु तो आशुतोष है अवघड़ दनी है अपने भक्त को कुछ भी प्रदान करने में उन्हें कोई संकोच नहीं होता वरदान स्वरूप उन्होंने रावण को आत्मलिंग प्रदान तो कर दिया परंतु साथ में एक प्रावधान भी कर दिया तुम्हारे अद्भुत स्तुति और संगीत ने मुझे प्रसन्न कर दिया है रावण मैं तुम्हें अपना आत्मलिंग प्रदान करूंगा किंतु ऐसी किसी भी पवित्र वस्तु को ले जाने के लिए उस भक्त को उस वस्तु के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा एवं निष्ठा का प्रमाण देना होता है प्रभु मेरे इट मेरे आराध्य आपका परम भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति का कोई भी प्रमाण देने के लिए प्रस्तुत है तो सुनो रावण लंका पहुंचने से पूर्व मार्ग में कहीं भी तुम आत्मलिंग को पृथ्वी या किसी अन्य स्थान पर नहीं रखोगे और दक्षिण समुद्र तक पहुंचने से पूर्व तुम पुष्पक विमान का प्रयोग भी नहीं करोगे प्रभु आपके श्रेष्ठतम भक्त रावण की भुजाओं में इतना बल है कि आपके पवित्र आत्मलिंग को में लंका तो क्या समस्त ब्रह्मांड में अपनी भुजाओं में लेकर भ्रमण कर सकता हूं अब लंका तक आपका पवित्र आत्मलिंग मेरी भुजाओं में आरूढ़ होकर जाएगा ऐसे पृथ्वी पर रखने की मुझे आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी [संगीत] [संगीत] महादेव [संगीत] महादेव आपके कथन अनुसार ही अब आपका यह भक्त रावण आपके आत्मलिंग को बिना भूमि पर रखे ही उसे लेकर लंका पहुंचेगा स्मरण रहे रावण यदि लंका पहुंचने से पूर्व मार्ग में तुमने कहीं भी लिंग को पृथ्वी पर रख दिया तो यह वहीं स्थित हो जाएगा और फिर तुम्हें रिक्त हाथ ही लंका लौटना पड़ेगा माता रावण तो महाबली था वह कैलाश से दक्षिणी समुद्र तक बड़ी सहजता के साथ प्रभु का आत्मलिंग लेकर जा सकता था हां पुत्र रावण स्वामी के आत्मलिंग को उठाए हुए वन नदिया पर्वत आदि पार करता हुआ लंका की ओर बढ़ता चला गया तब देवताओं ने उसके मार्ग में अनेकों बाधाएं उत्पन्न की वायु देव ने झूल भरी आंधियां चलाई पर चरावत सतत आगे बढ़ता चला गया ओम नमः शिवाय पर देव तीव्र जल धाराओं का प्रयोग किया जिससे रावण गिर जाए और आत्मलिंग का पृथ्वी से स्पर्श हो जाए परंतु तीव्र जल धाराए भी रावण के मार्ग को अवरुद्ध नहीं कर सकती सूर्यदेव ने अपना ताप बढ़ाया और अग्निदेव ने रावण के पग के नीचे की चलाओ को इतना अधिक तपाया कि वे कोयला बन गई परंतु रावण की इस यात्रा को कोई नहीं रोक सका [संगीत] तो क्या ऐसा कोई भी नहीं था माता जो रावण को लंका जाने से रोक सके जब शक्ति असफल हो जाए तो युवती से कार्य करना चाहि रावण की यात्रा को रोकने वाला भी था कोई यदि आत्मलिंग लंका पहुंच गया तो अनर्थ हो जाएगा अजय हो जाएगा और उसे पराजित करना असंभव हो जाएगा उसके अत्याचार और अधिक बढ़ जाएंगे राक्षसों के दुराचार और पापा चार से सब हिमाम हो उठेंगे यहां तक कि प्रभु श्री राम के लिए भी रावण को परास्त करना असंभव हो जाएगा हम सभी देवताओं के समस्त प्रयास असफल होके अब आप ही हमारी अंतिम आशा है पार्वती नंदन आप सब चिंता मत कीजिए पिताश्री के आत्मलिंग को लेकर लंका तक रावण को नहीं जाने देगा ये [प्रशंसा] गणेश प्रणाम देव [संगीत] गणों आप सब चिंतित ना [संगीत] हो [संगीत] उस समय तक रावण कोंकण क्षेत्र में स्थित एक समुद्र के निकट पहुंच चुका था उसके संध्या वंदन का समय हो रहा था [संगीत] लंकेश यदि भक्ति भावना के साथ पिताश्री के आत्मलिंग को ले जाते तो मैं कदापि ना रोकता किंतु अजय होकर संसार को प्रताड़ित करने की भावना से पिता श्री के आत्मलिंग को ले जा रहे हो जो अनुचित [संगीत] है [प्रशंसा] सूर्यस्त हो रहा है और मेरे संध्या वंदन करने का भी समय हो रहा है महादेव ने तो पृथ्वी पर शिवलिंग को रखने से मना किया था लंका पहुंचने से पूर्व मार्ग में कहीं भी तुम आत्मलिंग को पृथ्वी या किसी अन्य स्थान पर नहीं रखोगे फिर मैं संध्या वंदन कैसे करूंगा प्रतीत हो रहा है कि कोई [संगीत] है आप यह प्रभु का शिवलिंग लिए यहां कहां जा रहे हैं [संगीत] है मैं कहीं भी जाऊ उससे तुम है [संगीत] क्या ब्राह्मण बालक मैं कौन हूं यह तुम्हें अभी गत नहीं हुआ है उचित होगा कि तुम मेरा पीछा करना बंद कर दो अन्यथा तुम संकट में पड़ जाओगे मैं तो महादेव का भक्त हूं प्रभु का शिवलिंग देखा तो तुम जो भी हो अरे कहा ना पीछे हट जाओ मेरा पीछा ना करो फिर क्या हुआ माता क्या गणेश जी महादेव के आत्मलिंग को रावण द्वारा लंका ले जाने से रोक पाए भक्ति से ईश्वर को प्रसन्न तो किया जा सकता है पर निजी स्वार्थ के लिए की गई भक्ति से कभी फल नहीं प्राप्त होता
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
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