[संगीत] [संगीत] महाभारत और मुझे अपने दासो के सर पर ये मुकुट अच्छे नहीं लग रहे अपने अपने ये मुकुट उतार कर मेरे चरणों में रख दो रख दो उतारो ये मुकुट और रख दो मेरे चरणों में यह पांच तो तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाए इसलिए आकर मेरे मित्र दुर्योधन की गोद में बैठ जाओ पांच पतियों वाली तो तुम पहले ही से हो तो छठे का हाथ पकड़ लेने में हानि क्या है एक दिन मैं तुम्ह इस अपमान का दंड अवश्य दूंगा कारण अवश्य दूंगा हे च मेरे मित्र से बात करने का साहस करता है मैं तेरी जीभ काट लूंगा इसे बोल दो मित्र नया नया दास हुआ है धीरे धीरे सीख जाएगा जो स्त्री पांच पांच पुरुषों के साथ रहती हो वह पत्नी नहीं व होती और व्या का मान क्या और अपमान क्या यह यहां नगन भी लाई जाती तब भी अनुचित ना होता [संगीत] पार्थ आइए केशव किन विचारों में खोए हुए थे अपने क्रोध की अग्नि में यादों की लकड़ियां डाल रहा था केशव यादों की लकड़िया डाल रहा था युद्ध की प्रतीक्षा युद्ध से कहीं अधिक दुविधा पूर्ण होती है अब रणभूमि सामने है इसलिए मैं अपने क्रोध की अग्नि को भड़का रहा था केशव अपने क्रोध की अग्नि को भड़का रहा था मैं महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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