[संगीत] महाभारत [संगीत] महर्षि प्रणाम महर्षि आयु तो तुम्हारी यं ही बड़ी लंबी है राजन तो क्या आशीर्वाद दू किंतु आयु का लंबा होना सदैव अच्छा नहीं होता यदि कोई होगा ही नहीं तो जीवित रहकर क्या करोगे ऋषि भर ऋषि मोह से मुक्त होते हैं राजन उनके लिए हसना रोना समान होता है इसीलिए वे कड़वे सत्य बोल सकते हैं मैं तुम्हारे पास एक सत्य ही बोलने आया हूं आदेश दीजिए आदेश नहीं राजन परामर्श हितोपदेश राजन द्वार पर खड़े हुए इस महायुद्ध को भीतर आने की आज्ञा ना दीजिए मैं तो स्वयं भी यह युद्ध नहीं चाहता ऋषिवर किंतु क्या करूं मेरे पुत्र मेरे वश में नहीं है तो ठीक है राजन ठीक है मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि दिए देता हूं कि तुम स्वयं यह सर्वनाश देख सक नहीं ऋषिवर [संगीत] नहीं मैं दिव्य दृष्टि लेकर क्या करूंगा मैंने जिन्ह घुट नियों चलते नहीं देखा मैंने जिनकी तरुणाई नहीं देखी उनके शब देखकर क्या करूंगा और देख कर भी क्या कर लूंगा मैं तो शवों को पहचान भी नहीं पाऊंगा कि सब मेरे प्रिय भीम का है या दुर्योधन का मैं तो केवल सुनना जानता रहा हूं ऋषिवर तो हे ऋषिवर संजय को यह दिव्य दृष्टि प्रदान कीजिए कि मैं इससे सुन [संगीत] सकू कि कौन वीर गति को प्राप्त हुआ है जैसी तुम्हारी इच्छा राजन संजय संजय अब तुम भूत भविष्य और वर्तमान सब कुछ देख सकोगे हे ऋषिवर यदि आप इस महायुद्ध का परिणाम बताने की कृपा करें तो मैं कृतज्ञ हूंगा हे राजन वृक्ष केवल छाया ही नहीं देते वोह ईधन भी देते हैं और जिन वृक्षों के पास छाया ना हो उनका कट जाना ही उचित है कि उनके रिक्त किए हुए स्थान पर छाया देने वाले वृक्ष उग सके कटेगा कौन ऋषिवर इस प्रश्न का उत्तर तुम्हें संजय [संगीत] देंगे ये ऋ क्या कह गए संजय हम युद्ध क्यों करते हैं भूमि के एक छोटे या बड़े टुकड़े में ऐसा क्या है संजय कि हम अपने नातो तक को भूल जाते हैं भूमि शक्ति का प्रतिबिंब है महाराज भूमि क्ति का मापदंड है इसीलिए तो लोग उसे पाने के लिए अपना जीवन तक दांव पर लगा देते हैं शक्ति बिन क्षत्रिय का जीवन अर्थहीन भी तो हो जाता है संजय इसलिए अपनी दिव्य दृष्टि का प्रयोग करो और मुझे बताओ इस समय मेरा पुत्र दुर्योधन कहां है वो अपने कक्ष में है महाराज वहां अंगराज कर्ण है गंधार नरेश शकुनी है राजकुमार दुशासन है और गंधार के युवराज उलूक है मभ महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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