Saturday, 27 December 2025

दुर्योधन ने पितामह से क्या प्रार्थना की थी Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत प्रणाम पितामह प्रणाम गुरुवर इस समय कैसे आए पुत्र मैं आपके पास एक निवेदन लेकर आया हूं पिता मा अब और क्या चाहते हो ब यह तो आप जानते ही हैं पिता मा कि युद्ध की तो ठहर चुकी है इसलिए मैं आपसे अनुरोध करने आया हूं कि आप हसते ना सेना का प्रधान सेनापति बनना स्वीकार करें इस सम्मान के लिए अपने गुरु आचार्य द्रोण को आमंत्रित क्यों नहीं करते पुत्र अब आपके होते हुए पुत्र दुर्योधन भला किसी और के विषय में कैसे सोच सकता है ता श्री पिता मा जब तक आप स्वीकृति नहीं देंगे मैं आपके चरणों को नहीं छोडूंगा उठो व उठो मुझे ये उत्तरदायित्व स्वीकार है अरे अब तो तुम्हारी विजय में संदेह ही नहीं है भांजे दुर्योधन परंतु एक बात अभी ध्यान से सुन लो पुत्र दुर्योधन पांडव भी मुझे तुमसे कम प्रिय नहीं है फिर भी मैं इस युद्ध में तुम्हारे साथ हूं मैं प्रतिदिन उनके 100 हज योद्धा और सैनिकों का वध भी करूंगा किंतु अर्जुन फिर अर्जुन हैव व मुझे पराजित भी कर सकता है और मेरी मृत्यु का कारण भी बन सकता है आप अर्जुन की चिंता ना कीजिए गंगापुत्र उसके शफ पर मेरा अधिकार है मुझे अपनी बात समाप्त करने दो अंगराज किंतु जिस सेना का सेनापति मैं हूं दुर्योधन उस सेना में अंगराज करण के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता वैसे भी हमारे बीच कड़वाहट की एक नदी है मैं नहीं चाहता कि इस नदी का पाट और बढ़े यदि ऐसा है तो मन मैला ना करो मित्र मैं तो स्वयम गंगापुत्र भीष्म के ध्वज तले युद्ध नहीं कर सकता इनके होते हुए तुम्हें मेरी आवश्यकता नहीं पड़ेगी युद्ध में क्योंकि यह तो मेरे गुरु के सर्वश्रेष्ठ शिष्य है परंतु मैं तुम्हें यह वचन अवश्य देता हूं कि यदि यह वीरगति को प्राप्त हो गए तो मैं अपना धनुष लेकर रणभूमि में आ [संगीत] जाऊंगा तो मुझे आज्ञा है पितामह अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है व अभी भी कुछ कहने को रह गया है ता श्री हां गंधार नरेश अभी भी कुछ कहना रह गया है मैं पांडु पुत्रों के प्राण नहीं लू यह तो बड़े आश्चर्य का विषय है गंगापुत्र क्या आप सेनापति होंगे और शत्रुओं के प्राण नहीं लेे दुर्योधन के शत्रु वे सैनिक नहीं है जो युधिष्ठिर के ध्वज तले युद्ध कर रहे होंगे दुर्योधन के शत्रु वे राजा महाराजा योद्धा भी नहीं होंगे जो युधिष्ठिर की ओर से युद्ध करने आएंगे दुर्योधन के शत्रु पाच पांडव है और आप उन्हीं पर वाण नहीं चलाएंगे मान लो मित्र दुर्योधन पितामह की यह बात भी मान लो परंतु मुझे आज्ञा दो गंगा पुत्र क्योंकि मुझसे तो इस कक्ष में सांस भी नहीं लिया जा रहा है [संगीत] अंगराज कौरव सेनापति बनू अगर शर्त लो मान पांडव धर्म प्रतीक है हरू ना उनके प्राण महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत]

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