Wednesday, 31 December 2025

भीष्म और परशुराम जी का विराट युद्ध Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत प्रणाम आयुष मान भव स्थान ग्रहण कीजिए मैं महर्षि परशुराम का संदेश लेकर आया हूं गुरु परशुराम का क्या आदेश है गुरुदेव उन्होंने कहवा है कि किसी विशेष कार्य से यहां आए हैं और उनकी इच्छा है कि आप उनका यह कार्य कर दें गुरु की इच्छा भी आदेश है कार्य क्या है यह तो वे स्वयं ही बताएंगे जब तुम्हें विवाह नहीं करना था तो तुमने काशी की राजकुमारी अंबा का हरण क्यों किया और जब हरण कर ही लिया था तो उसके किस अपराध के आधार पर तुमने उसे त्याग दिया इसका परिणाम यह हुआ कि वह अकेली और असाय रह गई यही कारण था कि शाल नरेश ने उसे अस्वीकार कर दिया अ अगनि को साक्षी मानकर तुम उसे ग्रहण करो और अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करो भगवन अब तो मैं उसे अपने भाई के साथ भी नहीं ब्या सकता क्योंकि स्वयं अंबा ने मुझसे कहा कि वह तो शाल वराज की हो चुकी है और मैं उसे आदर के साथ शाल वराज के पास भेजकर अपने क्षत्रीय धर्म का पालन कर चुका हूं हे गंगापुत्र देवव्रत यदि तुमने हमारी आज्ञा का पालन नहीं किया तो तुम्हें हमसे युद्ध करना होगा मैं आपको समझाने का प्रयत्न करके शिष्य की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहता नहीं गंगापुत्र तुम इस मर्यादा का भी उल्लंघन करके देख लो हे भगवन आप मेरे गुरु है आप अपने शिष्य के साथ क्यों युद्ध करना चाहते हैं शिष्य को उसकी सभ्यता पर कठोर दंड देना गुरु का परम कर्तव्य है देवव्रत मैं फिर कहता हूं को ग्रहण कर लो हे ब्रह्म यह तो संभव ही नहीं है और यदि आपने युद्ध का आदेश दे ही दिया है तो आपका यह शिष्य उस आज्ञा का पालन अवश्य करेगा मैं जानता हूं कि आपने अकेले ही इस पृथ्वी के सारे क्षत्रियों को पराजित किया है पर हे गुरु श्रेष्ठ य आप भी जानते हैं कि उन क्षत्रियों में से आपके इस शिष्य जैसा कोई क्षत्रिय नहीं था जो आपके युद्धभूमि को कैसी शिक्षा दी है जो आज्ञा गुरुदेव जो [संगीत] आज हे गुरु श्रेष्ठ आप भूमि पर खड़े हुए हैं मैं रथ पर चढ़कर आपसे युद्ध नहीं कर सकता यदि आप मुझसे युद्ध करना चाहते हैं तो कवच धारण करके रथ पर आइए यह भूमि मेरा रथ है वेद अश्व है पवन सारथी है वेद माता गायत्री सावित्री और सरस्वती मेरा कवच [संगीत] है [संगीत] हे गुरु श्रेष्ठ मुझे अपने साथ युद्ध करने की आज्ञा दीजिए और यह आशीर्वाद दीजिए कि विजय मेरी हो हे गुरु श्रेष्ठ मैं तुम्हारी नम्रता से अति प्रसन्न हूं सफलता चाहने वाले पुरुष को ऐसा ही करना चाहिए अपने से बड़ों के साथ युद्ध करने वालों का यही धर्म है यदि तुम इस प्रकार नहीं आते तो मैं तुम्हे श दे देता जाओ और इस प्रकार युद्ध करो कि तुम्हारा गुरु लज्जित ना [संगीत] हो सावधान [संगीत] सावधान [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ऋषिवर यह तो प्रस पास्त्र है इस अस्त्र से क्या होगा यह तो अचूक अस्त्र है पुत्री और इसके प्रयोग की विधि गंगापुत्र के अतिरिक्त और कोई नहीं जानता यदि उन्होंने इस अस्त्र का प्रयोग परशुराम जी पर कर दिया तो उनकी पराजय निश्चित है ठहरो हे गुरु नंदन हे भरत श्रेष्ठ प्रवा पास्त्र का प्रयोग ना करो इसके प्रयोग से तुम्हारे गुरुदेव का अपमान होगा इसका प्रयोग ना करो [संगीत] और [संगीत] हे शिष्य श्रेष्ठ हे गंगापुत्र हे अधिरथ हे भीष्म आज तुमने अपने गुरु को परास्त कर दिया अब संसार में किसी गुरु को तुम जैसा शिष्य नहीं मिलेगा परंतु हे पुत्र अब मैं रणभूमि में पीछे नहीं हट सकता इसलिए या तो मेरा वध करो या फिर लौट [संगीत] जाओ [संगीत] हे गुरु श्रेष्ठ मैं युद्ध आपकी आज्ञा पालन के लिए कर रहा था और अब यदि आपका आदेश यह है कि मैं लौट जाऊ तो मैं लौट जाता हूं [संगीत] आ सारथी [संगीत] चलो महा भारत महा भारत महाभारत महाभारत हो महा भारत

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