[संगीत] महाभारत पांचाली क्या हुआ पांच शिष्यों के साथ ऋषि दुर्वासा आ गए हैं तो चिंता क्यों वो लोग स्नान करने गए हैं आकर भोजन करेंगे हां भोजन भला किसने कभी यह सोचा होगा कि इंद्रप्रस्थ की सम्राट यह सुनकर चिंता में भी पड़ सकते हैं कि उन्हें पांच छह ब्राह्मणों को भोजन करवाना है और इंद्र प्रस की पटरानी की रसोई में इस चावल के एक दाने के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं हे कृष्ण यह तो यह तो ऋषि दुर्वासा है [संगीत] पांचाली प्रणाम बड़े भैया ओ वासुदेव लगता है आप लोग मेरे आने से कुछ प्रसन्न नहीं हुए नहीं नहीं यह आपने क्या कह दिया हमारे जीवन में आपके आने के अतिरिक्त प्रसन्नता का कोई कारण अब रह क्या गया है मेरी सुभद्रा कैसी है पहले कुछ खिलाओ तब बताऊंगा बड़ी भूख लगी है कृष्ण पात्र में एक चावल का दाना रह गया है उसी में से आधा आप खा लीजिए और आधा संसार को खिला दीजिए [संगीत] [प्रशंसा] यह तो बहुत है कृष्ण अब चलना चाहिए ऋषिवर महारानी भोजन के लिए प्रतीक्षा कर रही होंगी हां ऋषिवर अब तो भूख बहुत तीव्र हो चुकी है चलो ओम नमः शिवाय नमः शिवाय नम शिवाय ओ नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओ नमः शिवाय नम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शिवाय बड़े आश्चर्य की बात है ऋषिवर बिना खाए ही पेट भर गया ऐसा क्यों कह रहे हैं ऋषिवर अभी तो भर पेट खीर ही खाई है मुंह में स्वाद तो खीर ही का है और नींद भी आ रही है नींद की मत सोचो कोई बुलाने आ गया तो क्या करोगे निकल चलो ओ प्रभ स्वा त [संगीत] तुमने बड़ी उत्तम खीर बनाई थी कृष्ण ने नींद आने लगी तो सो जाइए वासुदेव यही तो कठिनाई है बड़े भैया मैं सो ही तो नहीं सकता अनुज सहदेव तनिक देखो तो भैया ऋषिवर का स्नान समाप्त हुआ कि नहीं जी भ्राता श्री अरे बैठो सहदेव उन्हें कोई बुलाता थोड़ी ही है यदि उन्हें आना होगा तो स्वयं ही आ जाएंगे उन्होंने भोजन के लिए कहा था वासुदेव तब उनका यही निर्णय रहा होगा फिर किसी और के अतिथि बन गए होंगे परंतु आप मुझे यह बताइए बड़े भैया कि अर्जुन तो दिव्य अस्त्रों की खोज में इंद्रलोक गए हुए हैं पर यह भीमसेन कहां है भीम की छोड़ो वासुदेव घूम फिर करर लौट आएगा पर यह बताओ तुम कैसे आ गए अचानक बस भूख लगी आ गया महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महा भारत [संगीत]
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