[संगीत] [प्रशंसा] महाभारत तुमने अपने केश खुले क्यों छोड़ दिए पांचाली अब यह अपमानित केश खुले ही रहेंगे कि तुम लोग जब इन खुले केशों को देखो तुम्हें यह याद आ जाए कि दुशासन ने भरी सभा में इनका कैसे अपमान किया था इन्हें ठीक से देखो सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन इन्ह ठीक से देखो सर्वश्रेष्ठ गदाधर भीम यह केश तब तक खुले रहेंगे जब तक तुम में से कोई अपनी अंजुली भर दुशासन की छाती का लह लाकर मुझसे यह ना कहेगा कि पांचाली य लो की छाती का लो और इनसे अपनी केशों का अपमान दो [संगीत] डालो वह अनुज है पांचाली अनुज उसे क्षमा कर [संगीत] दो आप तो धर्म के प्रतीक है आप चाहे दुर्योधन और दुशासन को भले ही क्षमा कर दे परंतु मैं नारी जाति के स्वाभिमान का प्रतीक हूं मैं उन्ह कभी करूंगी प्रिय भीम तुम तनिक समझाओ ना पांचाली को मैं तो स्वयं अपने आप को नहीं समझा पा रहा भ्राता श्री तो पांचाली को क्या समझाऊ और समझाने के लिए है भी क्या भ्राता श्री हम में से कौन पांचाली से यह कहने का साहस कर सकता है कि जो कुछ हुआ उसे भूल जाओ यह भूल जाओ कि दुशासन ने तुम्ह बालों से पकड़कर खींचता हुआ इस भरी सभा में लाया था ये भूल जाओ कि उस सूत क ने तुम्ह पेशिया कहा था यह भूल जाओ कि दुर्योधन के कहने से दुशासन ने तुम्हारा फस्त्र हरण किया था क्षमा की बात और है भता श्री और है परंतु स्वयं क्या यह सब कुछ आप भूल सकते हैं बोलिए भ्राता श्री ये सब कुछ आप भूल सकते हैं भ्राता श्री के सामने ऊंचे स्वर में बोलने की शिक्षा किसने दी तुम इतने योग्य कब से हो गए कि भ्राता श्री से प्रश्न करने लगे महावीर की पहचान तो यह है कि उसमें सहन शक्ति अधिक होती तो कृपया मेरे सामने अपनी वीरता का प्रदर्शन भी ना करो मैं तुम में से किसी को का तो नहीं कह सकती पर मेरे लिए तुम सब को अपनी वीरता सिद्ध करनी पड़ेगी मेरे यह खुले हुए केश देखो या तो आंखें झुका लो या अंजली भर दुशासन की छाती का लाहू ले आओ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] और अब कृपया मुझे अपने इस हस्तिनापुर से ले चलिए यहां की हवा में मुझसे सांस नहीं ली जा रही है जब सांस लेती हूं तो मेरे आत्म सम्मान के जीवित जलाए जाने की दुर्गंध आती [संगीत] है चलो पाली चलो महाराज का संदेशा आया है कि विद्युत क्रीड़ा भवन में आपकी प्रतीक्षा कर रहे [संगीत] हैं क्षत्रिय धर्म का पालन करने के लिए अब तो आपको द्यूत कड़ा भवन में जाना ही पड़ेगा जेष्ठ पिता श्री की आज्ञा का पालन करने के लिए वहां जाना ही होगा पांचाली बड़े भैया यदि आपको वहां जाना ही है तो आप यह वचन दीजिए कि आप वहां चौसर नहीं खेलेंगे क्या मैं इसे प्रतिबंध मानू प्रिया अनुज प्रतिबंध नहीं बड़े भैया प्रार्थना मैं यह वचन नहीं दे सकता क्योंकि यदि ज्येष्ठ पिता श्री ने आज्ञा दी तो मुझे वहां खेल नहीं होगा क्या आप यह वचन दे सकते हैं कि अब आप अपने भाइयों के शस्त्र और अस्त्र दाव पर नहीं लगाएंगे हां मैं यह वचन देता हूं और क्या आप यह वचन दे सकते हैं कि अब आप उनकी स्वाधीनता को दाव पर नहीं लगाएंगे हां मैं यह वचन भी देता हूं और क्या आप यह वचन भी दे सकते हैं कि यदि अब द्यूत हुआ तो आप मुझे दा पर नहीं लगाएंगे पांचाली तुम यह वचन लेकर भता श्री का अपमान मत करो श्रीराम यह जानते थे पांचाली कि मृग सोने का नहीं होता फिर भी वो उसके आखिर पर चले ही गए तो क्या वह केवल लोभ था क्या स्वयं सीता जी भी ये नहीं जानती थी कि स्वर्ण मृग चकारे जैसा कोई पशु नहीं होता तो क्या उन्होंने जानते बुझते श्री राम को एक अनजान आपत्ति के मार्ग पर भेज दिया था जो होने वाला होता है पांचाली वह हमारे कर्मों का परिणाम होता है उसे ना तुम रोक सकती हो और ना मैं उसे ना भीम की गदा रोक सकती है और ना अर्जुन के बाण इसलिए चलो क्योंकि जेष्ठ पिता श्री को प्रतीक्षा करवाना सभ्यता का उल्लंघन है महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत] महा महा
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment