[संगीत] महाभारत सहज होता है आइए अंगराज आइए प्रणाम आचार्य आयुष्मान भाबा विराज आज यह ब्राह्मण आपको कैसे याद आ गया सच तो यह है आचार्य कि मैं सोते जागते आप ही के विषय में सोचता रहता हूं कारण अंगराज कारण यह है कि आपने तो मुझ पर शिक्षा के द्वार बंद कर दिए थे क्या आप वास्तव में यही सोचते हैं कि किसी सूत पुत्र या शूद्र का शिक्षा पर कोई अधिकार नहीं नहीं अंगराज शिक्षा पर सबका अधिकार है परंतु तुम जिस शिक्षालय में आए थे वह केवल राजकुमारों का था मान लिया किंतु क्या आप अपने उस इनकार का परिणाम जानते हैं परिणाम यह है कि तुम्हें मुझसे अच्छा गुरु मिल गया है तुम परिश्रम शिष्य हो गए हो य आधा परिणाम है आचार्य पूरा परिणाम तो यह है कि यह परशुराम शिष्य अपने गुरु के शाप की छाया में जी रहा है शाप जी हां शाप और अब जबक अर्जुन के अज्ञात वास का बरस समाप्त होने वाला है मैं आपसे यही कहने आया हूं कि मेरे गुरु का शाप भी वास्तव में आप ही गति शप और मैं इस शाप को स्वीकार करने के पश्चात भी आपसे यही कहने आया हूं कि मैं इस बात से अति प्रसन्न हूं कि मेरे मित्र दुर्योधन के गुच पांडवों का ज्ञात वास नहीं तोड़ पाए अर्थात युद्ध निश्चित है उस युद्ध में आप भी होंगे और अर्जुन से युद्ध करने के उपरांत मैं वही उसी रणभूमि में आपसे यह पूछूंगा कि सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कौन है वह कुंती पुत्र अर्जुन क्या यह सूत पुत्र करण और अर्जुन से मैं यह जानते हुए भी युद्ध करूंगा कि उसके हाथ में मेरे गुरु के शाप की ढाल भी हो सकती [संगीत] है यह भाषा तो क्षत्रियों की अंगराज क्षत्रियों की मेरे गुरु ने भी यही कहा था अंतर केवल यह है कि आप भाषा की बात कर रहे हैं और उन्होंने सहन शक्ति की बात की [संगीत] थी तुम्हारी शिक्षा तो समाप्त हो चुकी है वत्स अब गुरु से बिछड़ने का समय आ गया है आपने तो यह कह दिया था गुरुवर कि मैं गुरु दक्षिणा दिए बिना ही चला जाऊं परंतु मैं गुरु दक्षिणा दिए बिना कैसे चला जाऊं तुम्हें शिक्षा देने में जो मुझे आनंद मिला उसी को गुरु दक्षिणा मान लो बत तुम्हारे जैसे योग्य शिष्य कहां मिलते हैं आजकल किसी गुरु को किंतु यह सदैव याद रखना कि तुम एक ब्राह्मण हो और क्षत्रिय धर्म की रक्षा करना तुम्हारा कर्तव्य है और यदि तुम यह देखो कि क्षत्रिय अपने धर्म का उल्लंघन कर रहे हैं तो उनका विरोध करो जैसे मैंने किया [संगीत] था [संगीत] [संगीत] और [संगीत] और और [संगीत] [संगीत] [संगीत] तुमने अपनी रक्षा क्यों नहीं की यदि मैं अपनी रक्षा करता तो आपके विश्राम की रक्षा नहीं कर पाता गुरुवर विद्या अपने गुरु से झूठ बोलने वाले के काम नहीं आती काण मैं मैंने क्या झूट बोला गुरुवर तुम ब्राह्मण नहीं हो सकते क तुम क्योंकि ब्राह्मणों में यह सहन शक्ति हो ही नहीं सकती तुम क्षत्रिय हो और ब्राह्मण बनकर मुझसे शिक्षा ग्रहण करते रहे मैं तो एक सूत पुत्र हूं नहीं तुम फिर झूठ बोल रहे हो यह सहम शक्ति क्षत्रियों के अतिरिक्त किसी और में हो ही नहीं सकती तुम क्षत्रिय हो और तुमने अपने गुरु के साथ कपट किया है इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूं कि जब तुम्हें मुझसे प्राप्त की हुई शिक्षा की सर्वाधिक आवश्यकता होगी तब यह विद्या तुम्हारी किसी काम नहीं आएगी [संगीत] अंगराज अंगराज कहां चले गए थे गुरुवर के दर्शन करने चला गया था गुरु के दर्शन तो वास्तव में आराधना है अंगराज माता-पिता और गुरु के आशीर्वाद को महादेव का वरदान समझो माता-पिता का आशीर्वाद आचार्य या केवल ब्राह्मण और क्षत्रिय माता-पिता का आशीर्वाद माता-पिता की कोई जाति नहीं होती या फिर उनकी अपनी ही एक जाति होती है यूं पूछो तो गुरु की भी कोई जाति नहीं होती स्वयं भगवान की भी कोई जाति नहीं होती हां माता-पिता अच्छे भी हो सकते हैं और अच्छे नहीं भी हो सकते गुरु अच्छा भी हो सकता है और नहीं भी हो सकता पर यह सदैव आदरणीय है और तुम तो बड़े भाग्यवान हो कण कि तुम्हें व गुरु मिला है जिसे प्रणाम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है रणभूमि की ओर जाने से पहले अपनी माता और अपने गुरु का आशीर्वाद लेना ना भूलना यद्ध आशीर्वाद के शस्त्रों या अस्त्रों का उपयोग नहीं करता है आचार्य वह अपने बहुबली और धनुष के बूते पर रणभूमि में उतरता है मैं आपसे यही कहने आया था आचार्य कि अब आप अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को अपने आशीर्वाद का कवच पहना दीजिए प्रणाम महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment