महाभारत [संगीत] [संगीत] यह सूर्य अस्त क्यों नहीं हो रहा है कल जब मैं चाहता था कि अस्त ना हो तो य अस्त हो गया था आज जब मैं चाहता हूं कि अस् हो तोय अ क्यों नहीं हो रहा है तुम्हारे लिए भला सूर्यदेव अपनी गति क्यों बदले गांधारी नंदन तुम एक शूरवीर हो सूर्य की ओर मत देखो अपने शत्रुओं की ओर देखो आ [संगीत] [संगीत] [संगीत] किसका किसका लहू गिरेगा पहचाने का [संगीत] कौन लहू लहू में मिल जाएगा मौत रहेगी मौत मौत रहेगी मौत प्रणाम माम श्री क्या बात है मित्र मैं तो सारा दिन युद्ध का कोलाहल सुनता रहा और सोचता रहा कि विजय किसकी हो रही होगी फिर सोचा कि तुम्हारे प्रधान सेनापति ने तो इच्छा मृत्यु का कवच पहन रखा है तो विज निसंदेह तुम्हारी हो रही होगी इसी इच्छा मृत्यु के कवच ने ही तो समस्या खड़ी कर दी है अंगराज समस्या खड़ी कर दी है फ तो पांडवों का वध नहीं करेंगे और कोई और उनका नहीं कर सकता य यह इच्छा मृत्यु का वरदान आड़े ना आ रहा होता तो मैं कब का किसी और को प्रधान सेनापति बनवा चुका होता यह तुम्हारे गंगापुत्र यह भरत शिरोमणी अरे यह हमें हारने तो अवश्य नहीं देंगे भांजो परंतु यह भी निश्चित है कि हमें जीतने भी नहीं दें मासे प्रधान सेनापति का अर्थ ही क्या है जो ना तो हमें हारने देगा और ना ही जीतने मैं तो उन्हें प्रधान सेनापति बनाना ही नहीं चाहता था किंतु आप है के अरे भांजे दुर्योधन कभी-कभी यह किंतु जैसे शब्द सामने आ ही जाते हैं और इन शब्दों का सामना भी करना पड़ता है यदि तुम अपने मित्र अंगराज को प्रधान सेनापति बनवा भी देते तो तुम रणभूमि में अपने भाइयों अपने इस मित्र और अपने मामा श्री के साथ अकेले खड़े दिखाई देते भांजे अकेले खड़े दिखाई देते ये जो भारतवर्ष के इतने ध्वज तुम्हारे ध्वज के साथ दिख रहे हैं ये ना दिखाई देते भान परंतु मैं क्या करूं मामा श्री हमारी विजय के लिए अर्जुन वत आवश्यक है और पितामह भीष्म अर्जुन वध करेंगे नहीं और उस अर्जुन ने शवों के ढेर लगा दिए हैं यदि यह संभव होता तो किसी और को प्रधान सेनापति बनाने के लिए स्वयं मैं मैं पितामह भीष्म का वध कर देता मुझे यह युद्ध जीतना है और मैं यह युद्ध अपने मित्र करण की सहायता के बिना नहीं जीत सकता यदि अर्जुन प्रश्न है तो उस प्रश्न का उत्तर मेरा यह मित्र करण है यदि अर्जुन का उत्तर चाहते हो मामा श्री तो पितामह भीष्म के स्थान पर किसी और को प्रधान सेनापति कैसे नियुक्त किया जाए उस पर विचार करो अरे इस विषय पर तो तुम्हारे मामा श्री को विचार करने की आवश्यकता नहीं है प्रिय भांजे क्योंकि यदि पांडव य युद्ध जीतना चाहते हैं तुहे भी गंगापुत्र को रणभूमि से हटाने का कोई ना कोई उपाय सोचना पड़ेगा तो फिर उनका कार्य हम क्यों करें भांडे हम क्यों करें भला और फिर उनके साथ तो वासुदेव कृष्ण भी है अरे उन्हें ही सोचने दो उनका उपचार यह कांटा तो उनके भी कंठ में अटका हुआ है गंगा पुत्र भीष्म का कांटा महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत] महाभारत महाभारत रा
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