[संगीत] महाभारत पुत्री पांचाली मेरे निकट आओ मेरे निकट आओ पुत्री [संगीत] पुत्री यदि तुमने अपने ज्येष्ठ पिता श्री को क्षमा कर दिया हो तो कुछ वरदान मांगो पुत्री मांग ले पुत्री मांग ले जो चीज चाहे मांग ले यदि जेष्ठ पिता श्र मुझे कुछ देना ही चाहते हैं तो मैं सम्र य दष्ट के लिए दा सत्व से मुक्ति मांगती हूं कि हमारे पुत्र दास पुत्र ना कहलाए जाए मैंने प्रिय युधिष्ठिर को दासत से मुक्त किया कल्याणी कुछ और मांगो अब मैं शेष पांडवों के लिए भी यही मांगती हूं और मुक्ति के साथ-साथ उनके शस्त्र अस्त्र और रत भी मैंने यह भी दिया कल्याणी पर तुम्हें देने से मेरा जी नहीं भरा है कुछ और मांगो लो और धर्म में आग और पानी का बैर है महाराज क्षत्रिय नारी को दो से अधिक वरदान मांगने का अधिकार भी नहीं होता महाराज परंतु ज्येष्ठ पिता को देने का अधिकार तो होता है पुत्री प्रिय युधिष्ठिर आज की इस द्यूत क्रीड़ा में जो कुछ भी हारा है वो सब देता हूं यह तो आप अपने पुत्र ही से पूछिए कि वे हारा हुआ राज्य यूं ही लेना चाहती भी है या नहीं महादेव की सौगंध माम श्री मैंने बहुत सी सुंदर नारियां देखी पर यह धार किसी में नहीं जो इसमें है क अब हम दुर्योधन के दास नहीं रहे इसलिए चुप हो जाओ मैं तुम्हारे मुंह से पांचाली की प्रशंसा भी नहीं सुनना चाहता यदि आप भी चुपना तो पटक पटक मार प्रिय भीम यहां इतने चे स्वरों में बोलकर जेष्ठ पिता श्री का अपमान ना करो चलो चल के आज्ञा ले लो [संगीत] हमारे लिए क्या आज्ञ है जेष्ठ पिता श्री इंद्र प्रस्थ जाकर अपना राज्य संभालो अनुज पुत्र यही मेरा आदेश है परंतु जाते जाते इस बूढ़े की एक बात सुनते जाओ बस कुल्हाड़ी पत्थर को नहीं वो केवल लकड़ी को काटती है इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो प्रतिशोध की अग्नि में ना चले इसलिए जो कुछ भी आज हुआ है उसे भूल जाना ही ठीक है बस और जब कभी तुम्हें आज का दिन याद आए और प्रतिशोध की अग्नि भड़के तब तुम सब अपने इस नेत्रहीन जेष्ठ पिता को याद में लाना अपनी बड़ी मां गांधारी को याद करना यदि तुमने ऐसा किया तो यह याद तुम्हारी प्रतिशोध की अग्नि को ठंडा करने में सहायता करेगी महाभारत महाभारत [संगीत]
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