[संगीत] महाभारत आरे पुत्र आरे पुत्र क्या हुआ धारी क्या हुआ तुम जाग क्यों गई मैंने बड़ा भयानक स्वपन देखा आर्यपुत्र क्या सपना देखा मैंने देखा कि मैं महादेव की पूजा कर रही हूं कि महादेव एकदम से उठे और तांडव नृत्य करने लगे और उनके माथे की तीसरी आंख खुल गई मैं भय भीत सी खड़ी देखती रह गई मैंने साहस बटोर कर पूछा हे महादेव हे गौरी शंकर हे भूतनाथ मेरे घर में तांडव नृत्य क्यों अरे पुत्र प्रभु ने कोई उत्तर नहीं दिया केवल करुणा भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा और चले गए मैं सन्नाटे में खड़ी रह गई कि किसी ने कहा देवी कांधी मैं पलटी मैंने देखा कि मेरे सामने अग्नि देव खड़े हैं मैंने उन्हें प्रणाम किया वे बोले हे महादेव भक्ति नहीं तुम्हारा यह घर संसार जलकर नष्ट होने वाला है मुझे वचन दो कि तुम मुझे शापित नहीं करोगी मैंने उनसे पूछा मेरे घर संसार का दोष क्या है वे बोले जब स्वयं शिव शंकर ने तांडव का कारण तुम्हें नहीं बताया तो मैं कैसे बताऊं और यह कहकर वह ज्वाला बन गए यह भवन थाए थाए चलने लगा मैं पागलो की भाति आपको और अपने पुत्रों को लेकर उस अग्नि कुंड से बाहर निकलने का मार्ग खोजती रही पर मुझे कोई मार्ग नहीं मिला मैंने इंद्रदेव को पुकारा हे इंद्रदेव मेरी सहायता करो अपने बादलों को आदेश दो कि आकर मेरे घर में लगी इस आग को बुझा दे इंद्रदेव प्रकट भी हुए मेरी पुकार भी सुनी परंतु खड़े देखते रहे और मेरी आंखें खुल गई आरे पुत्र मेरी आंखे खुल गई रे पुत्र रो मत गांधारी रो मत जो आग महादेव ने नहीं बुझाई जो आग स्वयं इंद्र ने नहीं बुझाई वो आग तुम्हारे आंसुओं से थोड़ी बुझेगी और फिर यह भी तो सोचो कि स्वप्न तो केवल स्वप्न ही होता है चाहे उस स्वप्न में आकर स्वयं महादेव ने ही तांडव नृत्य क्यों ना किया हो आर्य पुत्र यह कोई साधारण स्वप्न नहीं है मुझे इसका स्वप्न फल बताइए यदि मैं स्वप्न शास्त्री होता तो क्या स्वयं अपने स्वप्नों का स्वप्न फल ना जान लेता इसलिए सो जाओ गांधार सो जाओ और कोई और स्वप्न देखने का प्रयत्न करो इस स्वपने के पश्चात नींद आना कठिन है कठिन है आर्य पुत्र कठिन है आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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