Monday, 29 December 2025

धृतराष्ट्र को सपने देखना क्यों पसंद था Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

महा [संगीत] भारत गांधारी आरे पुत्र लौटने में इतना विलंब क्यों भ्राता शकुनी आग्रह करने लगे कि मैं उनके साथ उनके भवन चलू तो उनके साथ चला गया था उनके साथ जाने में तो कोई क्षति नहीं पर किंतु ऐसा ना हो आप वहां जाकर स्वयं अपने भीतर का मार्ग भूल जाए मेरे भीतर अब है ही क्या कि वहां लौट आने को मन चाहे मेरा हृदय तो सूखे वृक्षों का एक वन है धूप ही धूप तृष्णा ही तृष्णा आशा की एक ओस भी नहीं है जिसे चाट करर मेरी अभिलाषा जीवित रहे मैं मन ही मन सोचकर प्रसन्न हो रहा था कि शिक्षा समापन समारोह में प्रिय दुर्योधन सर्वश्रेष्ठ निकलेगा और यह मुकुट उसके द्वारा मेरे पास लौटा आएगा परंतु आज तो मेरी आंखों में बसा हुआ अंधकार और भी गहरा हो गया है घना हो गया लगता है मेरे भाग्य में कोई सूर्योदय है ही नहीं यदि कहीं मुझे मेरा भाग्य मिल जाए तो उसे मैं अपनी इन भुजाओं में जकड़ कर मार डालू आप थक गए हैं विश्राम कर लीजिए और किसी के विषय में तो कुछ नहीं कह सकता परंतु मैं सपने देखने से कभी थकता नहीं क्योंकि सपनों के अतिरिक्त तो मैं कुछ और देख ही नहीं सकता इसलिए जो मैं देख सकता हूं वो देख लेने दो मुझे अरे पुत्र जेष्ठ गुरु पुत्र को यह कहना शोभा नहीं देता मत क मुझे जठ गुरु पुत्र येय मुझे व्यंग लगता है भाग्य ने मेरे साथ बहुत बड़ा न्याय किया है गांधारी तुम भी बताओ मैं न्याय मांगने कहां जाऊ कहां न्याय तो नारायण ही दे सकते हैं महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत] महाभारत महा h

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