Wednesday, 31 December 2025

बाल हनुमान ने माता लक्ष्मी की आराधना की Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 323 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] कल सूर्योदय होने तक की ही समयावधि है हनुमान के पास ऋषि दुर्वासा और उनके शिष्यों के आने से पूर्व मुझे कल्पवृक्ष को ढूंढकर उसे यहां पर स्थापित करना [संगीत] [संगीत] होगा प्रणाम सूर्यदेव कल्याण हो गुरुदेव आपका शिष्य हनुमान आपसे एक सहायता प्राप्त करने आया है बोलो पुत्र आप दिवस भर पृथ्वी पर होने वाली घटनाओं के साक्षी रहते हैं किंतु क्या आप यह बता सकते हैं कि पृथ्वी पर किसी को उ कल्पवृक्ष अपने स्थान से हटाते हुए या कहीं ले जाते हुए आपने देखा है नहीं पुत्र फिर क्या कोई कल्प वृक्ष को स्वर्ग लोक में ले गया है स्वर्ग लोक का कोई निवासी ऋषि दुर्वासा के कार्य में बाधा उत्पन्न करने का दुस्साहस कदापि नहीं करेगा हनुमान पुत्र हनुमान यदि कल्प वृक्ष ना तो पृथ्वी मार्ग से और ना ही वायु मार्ग से कहीं ले जाया गया है तो फिर वह कहां लुप्त हो सकता है [संगीत] हनुमान पाताल लोक गुरुदेव समझ गया जिसने भी इस कल्प वृक्ष को अपने स्थान से हटाया है वह उसे अवश्य पाताल लोक ही ले गया होगा हनुमान अभी पाता लोक जाकर उस दिव्य कल्पवृक्ष को ढूंढ कर ले आएगा धन्यवाद गुरुदेव प्रणाम रुको पुत्र वो दिव्य कल्प वृक्ष पाताल लोक में दुष्ट असुर यूपा के पास हो सकता है यह वही यूपा है जिसको वरदान प्राप्त है कि वरदान प्राप्त है मुझे मातृ नारायण या उनसे वरदान प्राप्त कोई उनके समान कोई अन्य शक्तिशाली योद्धा मात्र वरा रूप में मेरा संघार कर तुम्हें मुक्ति दिला सकता है कल्पवृक्ष परंतु नारायण क्यों आएंगे तुम्हारे लिए इसीलिए अब अनंत काल तक तुम मेरे बंदी हो कल्पवृक्ष और तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम मेरी समस्त इच्छाओं की पूर्ति करो राह रूप धारण करने के लिए तो मुझे प्रभु नारायण के पास जाकर उनसे वरदान प्राप्त करना होगा शस्त्रों वर्षों के कठिन तप के बाद प्रभु नारायण प्रसन्न होते हैं पुत्र उनके दर्शन प्राप्त करना इतना सरल नहीं किंतु हनुमान के पास तो बहुत अल्प समय है मात्र ऋषिवर दुर्वासा के तब के आरंभ होने के महूरत तक की ही समय अवधि है हनुमान के पास ऐसी स्थिति में हनुमान क्या करें [संगीत] गुरुदेव गुरुदेव हनुमान के पास प्रभु श्री नारायण के पास जाने की और एक युक्ति सोच रही है सर्वप्रथम मुझे माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना होगा मेरी मां कहती है कि पूर्ण निष्ठा से और सच्ची श्रद्धा से उनका पूजन करता है तो वह शीघ्र ही प्रसन्न होकर इच्छित र दे देती है यदि माता लक्ष्मी प्रसन्न हो गई तो भगवान नारायण को प्रसन्न होना ही होगा तुम उचित कहते हो हनुमान परंतु माता लक्ष्मी जी की पूजा विधि पूर्वक बिना किसी व्यवधान के करनी होगी तभी वो पूर्ण होगी और और उसके लिए तुम्हें कमल कमल गट्टा शंख कौड़ी शहद नारियल पान पुष्प और फल इत्यादि का प्रबंध करना होगा सच्चे हृदय और शुद्ध भावना से उनकी पूजा कर यह सब देवी मां को समर्पित कर देना तो वह अवश्य प्रसन्न होंगी [संगीत] प्रभु मुझे प्रसन्न करने के लिए हनुमान को एक परीक्षा देनी [संगीत] होगी अब और परीक्षा मत लो यपा के संयम की पहले तुम्हें विनम्रता से कहा फिर तुम्हें आदेश दिया फिर भी तुमने नहीं सुना परंतु अब मैं तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं मेरी समस्त इच्छाएं पूर्ण करो अन्यथा मैं तुम्हें जला दूंगा कल्प वृक्ष तुम्हारी प्रत्येक टहनियां पत्ते भस्म हो जाएंगे नष्ट हो जाओगे [संगीत] तुम कर् प्रक्ष की रक्षा करने के लिए मुझे अति शीघ्र अपनी पूजा से माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना [संगीत] होगा [संगीत] ॐ लक्ष्मी शिरस प्र राज तनया श्रीरंग धाम श्वरी दासी भूत समस्त देव वनि थाम लौकिक दीपा कोराम श्रीमन मं कटाक्ष लब्ध विभावा ब्रह्मेंद्र गंगाधरा तवाम त्रैलोक्य कुतुब निम सरस जाम वंदे मुकुंद प्रियम वंदे मुकुंदा प्रिया [संगीत] कोई रक्षा करो कोई रक्षा करो मेरी मेरे प्राण निकले जा रहे हैं कोई चल ला दो मेरे [संगीत] लिए माता लक्ष्मी जी की पूजा विधि पूर्वक बिना किसी व्यवधान के करनी होगी तभी वह पूर्ण [संगीत] होगी माता की पूजा ऐसे ही छोड़कर चला गया तो माता को प्रसन्न नहीं कर पाऊंगा और किसी असहाय की सहायता करना भी सर्व धर्म है मैं उसे खंडित भी नहीं कर सकता कोई जल दे दो [संगीत] मुझे [प्रशंसा] मुझे क्षमा करना माता कोई जल दे दो मुझे कोई जल दे दो लीजिए माता जल लीजिए पीज [संगीत] तुम्हारा कल्याण हो पुत्र तुमने जल देकर मेरे प्राण रक्षित किए मैं इसी मंदिर में रहकर इनकी सेवा करती हूं बहुत दिनों से यहां कोई नहीं आया इसलिए ना मुझे भोजन मिला ना जल और मेरी अवस्था ऐसी हो गई माता मैंने ऊपर मंदिर में भोजन आदि एकत्रित कर रखा है आप चलिए और इनका आहार कीजिए आइए माता मैं आपको ले चलता [संगीत] हूं मेरा जी माता [संगीत] यह लीजिए माता भोजन ग्रहण करना आरंभ [संगीत] कीजिए [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] पुत्र तुम यहां देवी मां की पूजा कर रहे [संगीत] थे यह तो अनर्थ हो गया पुत्र तुम अपनी पूजा बीच में छोड़कर मुझे देखने की क्यों चले आए और देवी माता को अर्पित करने के लिए एकत्रित जल एवं फल आदि तुमने मुझे क्यों दे दिए तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था पुत्र मेरे कारण तुमने माता लक्ष्मी जी की उपेक्षा कर दी अब तो मैं भी तुम्हारे इस पाप की भागीदार बन गई जगत की सारी नारियां माता लक्ष्मी जी की ही स्वरूप नहीं है यदि मैं आपकी सेवा करता तो माता लक्ष्मी जी को कोई उपेक्षा नहीं होती यदि मैं आपकी सेवा ना करता तो उनको कष्ट होता और यह मुझ पर अत्यंत कपित हो जाती परंतु इसमें व्यवधान पढ़ने से तुम्हारी पूजा तो अपूर्ण रह गई माता मेरी मां कहती है कि किसी नि आश्रय और असहाय प्राणी की कोई सेवा करें उसे भी भगवान की ही आराधना ही कहते हैं मेरी पूजा और अपनी पूजा की सामग्री में पुनः एकत्रित कर अपनी पूजा संपन्न कर सकता हूं माता मुझे ज्ञात है मेरे पास बहुत अल्प समय है परंतु समय पर आपकी सेवा करना भी आवश्यक था यदि मैं आपकी सहायता ना करता मेरी पूजा पूर्ण होकर भी अपूर्ण रह जाती [संगीत] पुत्र हनुमान तुम धन्य हो तुम्हारी पूजा सफलता पूर्वक संपन्न हुई है ये आप क्या कह रही है माता हां पुत्र मेरी पूजा का अर्थ केवल मेरी आरती करना नहीं है उसका अर्थ है मेरे प्रत्येक रूप का सम्मान करना सर्व जीवन की सेवा करना सबके दुख हरने की चेष्टा करना तुमने सही अर्थों में मेरी पूजा का मर्म समझकर मेरी अर्चना की [संगीत] है [संगीत] [संगीत] माता प्रणाम माता ल [संगीत] जी हनुमान ने जो किया वह किसी भी मनुष्य द्वारा किया जाने वाला सर्वोत्तम कृत्य है अपनी पूजा पूर्ण करने के लिए उन्होंने नि निराश प्राणी के जीवन का तिरस्कार नहीं किया अपितु वण किया सर्वप्रथम उनके प्राणों की रक्षा की और यह प्रमाणित कर दिया कि अन्य प्राणियों की सेवा करना उनके दुखों को दूर करना प्रभु की पूजा के समान [संगीत] है हनुमान की यह मान्यता भी पूर्णतः सत्य है कि प्रत्येक नारी में लक्ष्मी पार्वती एवं सरस्वती त्री देवियों के रूप का अंश छिपा होता है [संगीत] इसलिए किसी भी नारी की अवहेलना और अपमान स्वयं त्रि देवियों का अपमान है इसलिए जिस समाज एवं गृह में नारी का सम्मान होता है वहां समृद्धि आती है और जहां अपमान होता है वहां पतन और विनाश होता है इसीलिए प्रत्येक नारी का समान ही सही अर्थों में देवी की पूजा है कल्याण हो पुत्र हनुमान मैंने ही तुम्हारा प्रसाद और जल ग्रहण किया है तुम मेरी परीक्षा में सफल हुए हो मैं तुम्हें वरदान देती हूं पुत कि तुम्हें प्रभु की कृपा प्राप्त होगी और उस असुर का वध करने के लिए तुम अपने जीवन में एक बार वराह रूप दे पाओगे [संगीत] धन्यवाद माता [संगीत] प्रणाम माता आपकी कृपा पाकर हनुमान कृतार्थ हो गया अब हनुमान निश्चिंत होकर कल्प वृक्ष की रक्षा करने के लिए पाताल लोक जा सकेगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] हा [संगीत] इस अनंत अंधकार और इस गुफा के अनेकों द्वार और अनेकों गुफा द्वारों के मध्य हनुमान को कुछ नहीं सूझ रहा कि दिव्य कल्पवृक्ष कहां है हनुमान अब कौन सा मार्ग ले देव्य कल प्रक्ष को ढूंढने का ऋषि दुर्वासा जी शिष्यों के संग किसी भी क्षण मानसरोवर से लौट कर आ सकते [संगीत] हैं किंतु अभी तक कल्पवृक्ष मिला नहीं है क्या करूं मैं यह कल्प वृक्ष दिव्यता खो चुका है अपनी सूख कर निर्जीव हो गया है ये अब यह मेरे किसी लाभ का नहीं किसी को कुछ नहीं दे सकता यह तुम इसे शीघ्र ही जलाने की व्यवस्था करो

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...