Wednesday, 31 December 2025

बृहनलला के रूप में अर्जुन भयभीत क्यों था Gautam Rode Suryaputra Karn Episode Pen Bhakti

[संगीत] आप किसे मित्र मानते [संगीत] हैं उसे जो आपसे मीठा बोले और शत्रु किसे मानते हैं उसे जो आपसे कड़वा बोले नहीं शत्रुता और मित्रता दोनों का निर्णय उनकी बातों से नहीं होता कभी-कभी मीठा बोलने वाला आपका शत्रु हो सकता है और कभी कभी कड़वा बोलने वाला आपका मित्र ठीक उसी भाति जैसे मीठा सोम रस हानिकारक होता है और कड़वी औषधि लाभदायक इसीलिए किसी को भी उसके शब्दों से नहीं उसके कर्मों से पहचानिए क्योंकि मनुष्य के कर्म ही उसकी पहचान होती कि वह शत्रु है या [संगीत] मित्र मत से में आज एक नया सूर्य उदय हुआ है मतस्य का राजा मैं पहले भी था परंतु स्वतंत्रता का आभास नहीं होता था मुझे आज वर्षों के पश्चात यहां की वायु में स्वतंत्रता अनुभव कर रहा हूं मैं अनुभव हो रहा है कि मेरे पास भी शक्ति है अब मुझे हस्तिनापुर से युद्ध होने का कोई भय नहीं जिसके पास तुम्हारे जैसा तशी हो उसे कैसा भय कंक हमारे प्रोत्साहन से आज फिर से मैं स्वयं को एक शक्तिशाली राजा अनुभव कर रहा हूं महाराज मनुष्य को शक्ति आत्मविश्वास से मिलती है यदि आत्मविश्वास है तो मनुष्य स्वयं की और अपनों की रक्षा कर सकता है सावधान आक्रमण हुआ है रा भायो चिता कं प्रतीत होता है हस्तिनापुर ने आक्रमण कर दिया हस्तिनापुर ने बिना चेतावनी के आक्रमण कैसे कर दिया महाराज गत नरेश सु शर्मा ने आक्रमण किया है शर्मा इतना सहस तुम्हें पराजित होना होगा चलो प्रजा को सावधान कर दो सब यु के लिए तत्प है ये जानते हुए भी हिम्मत से दुर्योधन का मित्र राज्य है सु शर्मा ने आक्रमण का साहस किया यह तब तक संभव नहीं जब तक उसे किसी बड़ी शक्ति का समर्थन प्राप्त ना हो इसका अर्थ यह सब दुर्योधन ने [संगीत] करवाया [प्रशंसा] दुर्योधन युवराज सतर्क ध्वनि का स्वर सुन रहे हैं आप हमें उन्हे बताना होगा कि हम मत से पर आक्रमण करने नहीं आए हमें केवल पांडव [संगीत] चाहिए मि उनका सतर्क होना स्वाभाविक है क्योंकि विराट पर आक्रमण हो चुका [संगीत] है सु शर्मा की सेना दक्षिण छोर से विराट पर पहले ही आक्रमण कर चुकी [प्रशंसा] है इस योजना के विषय में हमें बताना तुमने उचित नहीं समझा दुर्योधन मैं हस्तिनापुर का युवराज हूं मुझे अपनी हर एक योजना सबको बताने की आवश्यकता नहीं है आज पांडवों के अज्ञातवास का अंतिम दिवस है विराट नगर के दक्षिण द्वार पर सु शर्मा ने आक्रमण किया है उनका सारा ध्यान विराट के दक्षिण द्वार पर होगा और हम उत्तर दिशा से आक्रमण करके पांडवों को वही घेर लेंगे यह नीति के विरुद्ध है जो राज्य पहले से ही युद्ध में व्यस्त हो उस पर इस प्रकार आक्रमण करना छल है यह छल नहीं है क्योंकि सु शर्मा हस्तिनापुर का ही सहयोगी है मुझे किसी भी मूल्य पर उन पांडवों को सूर्यास से पूर्व पकड़ना [संगीत] है दक्षिण द्वार पर आक्रमण की सूचना सुनते ही वो पांडव उत्तर दिशा से निकलने का प्रयास करेंगे उत्तर द्वार उस दिशा में चले परंतु उन्हे इस बात का फन तक नहीं होगा कि उनका अज्ञातवास भंग करने के लिए हम वहां पहले से ही उपस्थित होंगे पहले से ही दुर्योधन अपने साथी महारथी और सेनापति को इस प्रकार योजना से अवगत ना रखना असम मान माना जाता है और इस प्रकार से छल करके आक्रमण करना अधर्म मैं आपको साथ केवल इसलिए लाया हूं पितामास इस बात के साक्षी हो सके मैंने पांडवों का अज्ञातवास धर्म सम्मत भंग किया [संगीत] है आज आज वो पांडव यहां से यही से वन में जाएंगे अगले 12 वर्ष के वनवास के लिए चलो सार्थी गति बढ़ाओ आगे बढ़ो मामाश्री आपको अपनी योजना पर विश्वास है ना मुझे पूर्ण विश्वास है दुर्योधन पांडव विराटनगर से बाहर निकलने के लिए उत्तरी द्वार का ही प्रयोग करेंगे देख लेना [संगीत] तुम [संगीत] गति बढ़ाओ सार्थी आगे बढ़ो बस सूर्यास्त की देर है उसके पश्चात हमारा अज्ञातवास संपन्न शीघ्र यहां पहुंचते होंगे उसके पश्चात हम यहां से निकल [संगीत] जाएंगे [संगीत] मत से ध्वज को हटाया जा रहा है हमें शीघ्र य से प्रस्थान करना होगा नहीं हम नहीं जाएंगे परंतु क्यों क्योंकि जब हमें एक वर्ष का ज्ञात वास बिताने के लिए स्थान की आवश्यकता थी हमने यहां पर शरण ली यहां का अन खाया है हमने और आज जब विराट नगर को हमारी सहायता की आवश्यकता है तो क्या यहां से जाना उचित होगा ये क्या कह रही हो पंचाली वही जो सत्य है और वही जो मैं तुम सबसे कहना चाहता हूं यदि विराट नगर में हमें छिपने का स्थान नहीं मिलता तो अब तक हम सब पकड़े जाते और फिर से बनवास काट रहे होते यह समय विराट राज का ऋण चुकाने का परंतु जेष्ठ उन्होंने हमें पहचान कर सहायता नहीं की थी उन्होंने हमें काम पर रखा तो इस नाते वह हमारे स्वामी हुए और बिना उन्हें सूचित किए हमारा यहां से जाना भी धर्म धर्म इसी धर्म के कारण हमें दूत में हार मिली इसी धर्म के कारण आपने फिर से द्यूत खेला परंतु अब नहीं जेष्ठ केवल एक बार एक बार हमारी बात मान [संगीत] लीजिए पांचाली के खुले काले केश को देखिए उस प्रतिज्ञा का स्मरण कीजिए जो हम सबने मिलक ली थी अज्ञातवास पूर्ण होने के पश्चात हम विराट नगर को फिर से मु लेस्ट परंतु उस कलंक से स्वयं को कैसे मुक्त करेंगे आर्य कि अपने सहायक को संकट की घड़ी में अकेला छोड़ आए [संगीत] हम यदि जाना है तो जाकर एक बार विराट राज से कह देते उनको बताना पड़ेगा कि हम पांडव वीर पांडु पुत्र कायरो की भाती जा रहे [संगीत] हैं शरी सही कह रहे हैं सदेव यही समय अपने शस्त्रों पर आई धूल हटा ली [संगीत] जाए छोड़ो छोड़ो मुझे छोड़ो छोड़ो छोड़ो मुझे मैं यहां से नहीं जाऊंगी अपने पिता अपने नगर को छोड़ के मैं नहीं जाऊंगी परंतु महाराज को बंधक बना लिया गया है और मेरा कर्तव्य है आपको सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना राजकुमारी जी और मेरा कर्तव्य अपनी जन्मभूमि अपने नगर की रक्षा करना है हा मैं भी अपने स्वामी को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी चाहे सु शर्मा की सेना हमें बंदी क्यों ना बना ले परंतु हम महारानी है हमारे आदेश की अरना नहीं होगी देखा सहदेव एक बालिका युद्ध के लिए प्रस्तुत है एक महारानी अपने बलिदान के लिए तत्पर है और हम यदि योद्धा होकर भी उनका साथ ना दे पाए तो भले ही हम इंद्र प्रस्त परंतु कभी भी अपनी आंखों में देख पाने का साहस नहीं कर पाएंगे आप उचित कहते हैं जे अब चाहे 12 वर्ष वनवास में और क्यों ना रहना पड़े हम य से नहीं [संगीत] जाएंगे भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं है माता श्री मैं आपकी रक्षा करूंगा मेरे होते हुए राज्य पर कोई कुरुद श्री नहीं रख सकता कहां प्रयाण की तैयारी कर रहे हैं युवराज युद्ध के लिए जद है ना मेरे पिताश्री को शत्रुओं ने बंदी बना लिया है मैं एक योद्धा हूं मैं युद्ध करूंगा उनसे विराट नगर का मान बचा हंगा क्षमा चाहती हूं युवराज आप अभी बालक हैं युद्ध कैसे लड़ेंगे क्यों संकट के समय में राज्य की रक्षा करना तो युवराज का धर्म मेरे पिता मतस्य राज अभी संकट में और पुत्र और युवराज होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है निसंदेह युवराज य आपका धर्म है परंतु आपका सुरक्षित रहना भी अत्यंत आवश्यक है और सेना की एक टुकड़ी महाराज की रक्षा के लिए भेजी जा चुकी है सेना नहीं योद्धा की आवश्यकता है मैं युद्ध करूंगा उनसे माता श्री आप ही मुझे बताइए क्या मेरा जाना अनुचित है हमारे राज्य पर आक्रमण हुआ है और हम ऐसे ही बैठे रह सकते हैं तुम उचित कह रहे हो पुत्र परंतु महारानी की जय हो नगर के उत्तरी छोर से भी शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया सु शर्मा ने तो दक्षिण दिशा से आक्रमण किया था उत्तर से किसने आक्रमण कर [संगीत] दिया अब क छुप पांडव पुत्र आज होगा पांडवों का [संगीत] अज्ञातवास यह तो मवे को ले आ रहे हैं विराट की संपत्ति की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है आके दीजिए [संगीत] जेस्ट मुझे विश्वास है नकल और सहदेव विसर संभाल लेंगे हमें शीघ्र विराट राज को खोज कर उन्हें मुक्त कराना होगा भीम वो रे विरा शकता [संगीत] करो बड़ा विराट राजा बनता था कीचक ही तुम्हारी शक्ति थी उसके बिना तू एक बूढ़ा हारा पुरुष है विराट [हंसी] राज उतर ने अपने पिता को इस अवस्था में नहीं देखा यह श्रेयस्कर हुआ परंतु सु शर्मा के पुत्र उसे जिस अवस्था में देखेंगे भूल नहीं पाएंगे क्योंकि मैं सु शर्मा के प्राण ले लूंगा सावधान भीम संभलकर प्रहार करना तुम्हारी शक्ति से तुम्हारी पहचान हो सकती है संभल [संगीत] कर अस य संघर्ष शिक्षण होई श शिक्षा संघर्ष शिक्षण [संगीत] शिक्षा सावदान शर्मा मैं तुम्हे चेता देता हूं कि महाराज को मुक्त कर दो अन्यथा कौन हो तुम वल्लभ महाराज का प्रमुख रसोया हमारे अभी इतने बुरे दिन नहीं आए कि हम एक रसोइए से युद्ध करें वैसे अब तुम हमारे लिए भोजन बनाने का अभ्यास कर लो क्योंकि अब हम यहां के नए राजा है सैनिको बंदी बना लो [प्रशंसा] [संगीत] इसे अ क मासी [संगीत] गता हे ईश्वर दुर्योधन महाबली भीष्म और अंगराज कण जैसे महारथियों का सामना कैसे करेगी हमारी सेना कैसे करेगी युद्ध का वास्तविक आनंद तो महारथियों के साथ लड़ने में ही आता है माता श्री अब आएगा युद्ध का आनंद अब सिद्ध होगा कि आपका पुत्र कितना बलशाली कितना वीर है अब आप देखना कैसे मैं महान [संगीत] धनधरिया का सामना कैसे कर पाएंगे कर सकता हूं परंतु एक समस्या है एक उत्तम सारथी की आवश्यकता है अन्यथा उन कौरवों को मैं धूल चटा दू प्रत्यक्षा किस बात की युवराज आगे बढ़ क्या मैं बताती हूं महारानी बृह नला कुमार की सारथी बनकर जाएगी क्या बनला एक किनर मेरी सारथी बनेगी अरे यह नृत्यशाला नहीं युद्ध भूमि है युद्ध भूमि वीना की तार और अश्व की रास में बहुत अंतर होता है वहा मृत्यु तांडव करती है शर्री तुम इतना मूर्खतापूर्ण सुझाव कैसे दे सकती हो कुमार आपने महान धनुर्धार अर्जुन का नाम लिया इसी कारण वष मैंने बहला को आपकी सारथी बनाने का सुझाव दिया क्योंकि एक समय पर बनला अर्जुन की सारथी रह चुकी क्या यह अर्जुन की सारथी विश्वास नहीं [संगीत] होता ठीक है अब कोई और मार्ग भी नहीं मैं तुम्हें अपने साथ आने की आज्ञा देता हूं यदि तुम महान अर्जुन की सारथी थी तो मैं भी तुम्हें अपनी सारथी बना सकता [संगीत] हूं

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