Saturday, 27 December 2025

दुर्योधन ने अपनी पुत्री से भेट क्यों की थी Gautam Rode Suryaputra Karn Episode Pen Bhakti

[संगीत] अपराध वो भावना है जिसके कारण संसार में सदा दुख ही व्याप्त रहता है हम सब अपराधियों से घृणा करते उन्हें कोसते हैं परंतु क्या कभी विचार किया है कि कोई भी जन्म से अपराधी नहीं होता तो ऐसा क्या कारण है कि कोई इतना बुरा बन जाता है कि वह बुराई की सीमाएं ही पार कर जाए कारण है कामना यदि कामना पर नियंत्रण ना रखा जाए यदि कामना को पूर्ण करने के लिए परिश्रम ना किया जाए तो वो तृष्णा में बदल जाती है और तृष्णा लालच में और लालच छल में और छल करते ही मनुष्य अपराध की ओर अपने पग बढ़ा देता है इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि मन की कामनाओं पर नियंत्रण रहे यदि मन पर नियंत्रण रहेगा तो अपराध पर स्वयं ही नियंत्रण हो [संगीत] जाएगा [संगीत] मामा श्री ने मेरे परिचय में एक बात कम कही माता जैसा तेज भी है मज [संगीत] रपा पुत्र [संगीत] अभिमन्यु [प्रशंसा] तम अर्थम मनुष तम अर्थम [संगीत] प्रत प्रण पात [संगीत] श्री बलराम मुझे समझ में नहीं आता कि मैं आपका ऋण कैसे चुकाऊंगा आपने और माधव ने अभिमान को अद्भुत प्रशिक्षण दिया है ऋ मैं हूं अर्जुन कि मुझे अभिमन्यु जैसा कुशल शिष्य [संगीत] मिला आपका पुत्र सांप कहां है सखा उसे नहीं लाए साथ [संगीत] में क्या वो हमसे नहीं मिलना चाहता वो यहां आने के लिए उत्साहित था परंतु एक विशेष कार्य आ जाने के कारण उसे भेजना पड़ा इसलिए वो यहां नहीं आ [संगीत] पाया मेरे प्रिय मैंने सदा ईश्वर से यही मांगा कि फिर से एक बार आपसे भेंट करने का अवसर मिल सके और देखिए ईश्वर ने मेरी इच्छा सुन ली हमें मिलाने का अवसर निकाल ही लिया विराटनगर में भ्राता अभिमन्यु और राजकुमारी उत्तरा का विवाह है जहां सम्मिलित होने के लिए निमंत्रण आया है हमें आशा करती हूं कि पिताश्री को मना पा कि वह अपने साथ साथ मुझे भी विवाह में ले चले बहुत प्रेम करते हैं वह मुझसे कदाचित साथ ले जाने के लिए तैयार हो जाएंगे और मैं तुमसे मिल पाऊंगी प्रिय [संगीत] सांप मैं हमेशा से चाहती थी कि मैं और तुम ऐसे ही किसी विवाह में मिले और साथ-साथ स्वप्न देखे कि हमारा भी विवाह ऐसे ही जल्द से जल्द हो समझे मैं जानती हूं कि आप इस विषय में गंभीर है आप क्यों ना एक बार अपने पिता श्री वासुदेव कृष्ण से बात करें मुझे विश्वास वो अवश्य स्वीकारें मैंने सुना है कि आपके पिता सबके मन की बात समझ लेते हैं तो भला अपने ही पुत्र के हृदय की बात व कैसे ना समझेंगे यदि आपने अपने पिता से बात नहीं की तो मुझे अपने पिता श से बात करनी होगी और यह आप भली भाति जानते हैं कि मेरे पिता की प्रतिक्रिया कुछ अच्छी नहीं होगी इसलिए बात बिगड़ने से पहले ही संभाल लीजिए प्रिय बहुत सारा प्रेम केवल तुम्हारी लक्ष्मणा सावधान युवराज दुर्योधन पधार रहे [संगीत] [प्रशंसा] है [संगीत] लक्ष्मीना [संगीत] निताश सदा प्रसन्न रहो पुत्री [संगीत] प्रवी पाल अरे हमारी पुत्री तो प्रतिदिन और भी ज्यादा सुंदर होती जा रही है लगता है शीघ्र ही स्वयंबर रचना पड़ेगा आपका युवराज की जय हो राजकुमारी की जय हो वो युवराज राजकुमारी पक्षियों को दाना बजवाना चाहती थी इसलिए मैं हां हां दे रहे हैं ना पुत्री इन पक्षियों के साथ में खेलना कम कर [संगीत] दो और अपनी माता से संसार और हरवार की सीख लेनी [संगीत] चाहिए और श्रृंगार करना सीखो आपकी विवाह की आयु आती जा रही है आप भी ना पिताश्री मैं किसी से विवाह नहीं करने वाली मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी विवाह तो हर कन्या को करना ही होता है [संगीत] और और फिर अपने पिता का घर छोड़ के जाना होता है [संगीत] नहीं [प्रशंसा] और मैं इतना मूर्ख भी नहीं हूं [संगीत] [संगीत] लक्ष्मण और आपको लगता है कि आप अपने पिता से कुछ भी छुपाने में सक्षम है आप प्रतिदिन शाक और भात क्यों बनाती है माते शाक भात मेरे करण का प्रिय है उसे यहां आने का समय नहीं मिलता मैं सोचती हूं जब भी वह आएगा शाक भात देखकर उसे संतोष [संगीत] होगा [संगीत] क करण नहीं माता राधे [संगीत] कर कैसी हो सुप्रिया जी ठीक हूं कितना स्मरण किया ं पुत्र परंतु तुम्हें अपनी माता की याद ही नहीं आती माता ऐसा मत कहा बहुत याद आती है आइए [संगीत] माता नहीं मा [संगीत] मुझे विराट नगर शीघ्र ही प्रस्थान करना होगा आने में थोड़ा समय लग जाएगा इसलिए सोचा जाते हुए आप सबसे मिलता [प्रशंसा] जाओ किसे खोज रहे हो [संगीत] पुत्र से इन को खोज रहा हूं [संगीत] माता बहुत समय हो गया उससे मिले बहुत बड़ा हो गया होगा ना मेरा पुत्र हां पुत्र परंतु वह कहीं बाहर गया है याद होता कि तुम आने वाले हो उसे कहीं जाने ही ना देते अच्छा बाहर क्या माता उसे आने में अधिक समय लग जाएगा क्या कदाचित आज तुम उससे मिल नहीं पाओगी नहीं माता मुझे उससे मिलना है पिछली बार भी विराट जु से पहले जब मैं यहां आया था तो उसे नहीं मिल पाया था माता परंतु इस बार मैं उसे अवश्य मिलूंगा ठीक है मैं अपने पुत्र की यही प्रतीक्षा करता हूं अन्यथा यदि आपको पता है कि वह कहां गया है तो आप मुझे बता दीजिए मैं वहीं जाकर उससे [संगीत] मिलूंगा [संगीत] अरे वीना यह मेरे लिए है पिताश्री [संगीत] आपने अपनी माता से यही मांगा था ना पिताश्री सीखने की अनुमति है अवश्य क्यों नहीं आप अपने हर एक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है जो चाहे आप कर सकते हैं पिताश्री व मैं आपसे कुछ मांगना चाहती [संगीत] हूं मुझे भी आपके साथ विराट नगर चलना है [संगीत] प्रश्न ही नहीं उठता [संगीत] लक्ष्मणा वहां वो पांडव [संगीत] है मेरे शत्रु और वो चलि कृष्ण भी [संगीत] होगा जो सदा मेरे सामने कठिनाइया उत्पन्न करता रहता [संगीत] है मैं अपनी पुत्री को किसी भी संकट में नहीं डाल सकता परंतु पिताश्री आप ही ने कहा था कि आप हमारी प्रत्येक इच्छा पूरी करेंगे अवश्य परंतु जानबूझकर आपको में तो नहीं खल सकता ना आपकी सुरक्षा मेरा कर्तव्य [संगीत] है क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूं पिताश्री नहीं संदेह पूछिए क्या पूछना है लक्ष्मीना क्या जानना है आपको कुछ नहीं फिर कभी पिताश्री [संगीत] समझ नहीं आ रहा है आपको सांप के बारे में कैसे बताऊ परंतु कदाचित अभी समय नहीं आया है क्या हुआ आप दोनों इतना विचलित क्यों है कुछ नहीं पुत्र सब ठीक [संगीत] है ऐसा प्रतीत हो रहा है माता कि आप मुझसे कुछ छुपा रहे माता ष सेन कहां है आप मौन क्यों है माता सुप्रिया हमारा पुत्र कहां है बताओ जी पुत्र व शिव मंदिर गया कुछ कुछ पंडित आए थे तीर्थ के लिए उन्हें मार्ग दिखाने गया है बस इतनी सी बात है आप मुझे बता क्यों नहीं रही थी ठीक है मैं उसे वही ढूंढ लूंगा कर पुत्र वहां वहां बहुत भीड़ होगी कोई विवाह का आयोजन चल रहा है उस भीड़ में कहां ढूंढोगे तुम्हें विराट नगर के लिए विलंब हो रहा होगा अगली बार मिल लेना नहीं मता मैं इसी बार उससे मिलूंगा मैं शिव मंदिर जा रहा हूं [संगीत] माता प्रणिपात [संगीत] [संगीत] आवश्यकता पड़ने पर आप और आपकी सेना हस्तिनापुर की सहायता अवश्य करेंगी बकार है [संगीत] वासुदेव हमें बलराम ने समर्थन देने का वचन दिया था और तुमने उन पांडवों को समर्थन देके सब कुछ बिखर दिया वासुदेव कैसे कैसे तुम्हें अपने मार्ग से हटाऊ कैसे तुम्हें पराभूत करूं कैसे तुम्हारा अंत करो वासुदेव कैसे कैसे करो क्या मत हां एक काम कर सकता हूं विवाह में उसके भोजन में विश मिलाकर दे देता हूं व इतने सारे अतिथि होंगे किसी को किसी को संदेह भी नहीं होगा ऐसे ही कता नहीं नहीं नहीं ंध राज यह संभव नहीं है ना ना जब वो छलिया नवजात था तब पतना ने भी विश पलानी का प्रयास किया था जब पतना से कुछ नहीं हो पाया तो मैं कैसे ना कुछ कुछ और करना होगा गांधा राज सोचो सोचो [संगीत] सोचो दासी इधर [संगीत] आओ सुना नहीं तुमने जाओ मेरे लिए मदिरा का प्रबंध करो [संगीत] जाओ अब मैं ध्यान लगाकर सोच पाऊंगा अब मेरा मस्तिष्क चलेगा अभी तक यही खड़े हो तुम सुना नहीं तुमने जाओ मेरे लिए मंदिरा लेकर आओ [प्रशंसा] जाओ [संगीत] कैसे करूं उस वासुदेव का [संगीत] अंत

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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