[संगीत] द्वंद दो मनुष्यों के मध्य होता है परंतु विजय सदैव एक ही मनुष्य को मिलती है जबकि समान रूप से दोनों शक्तिशाली होते हैं सामान ज्ञान प्राप्त करते हैं कारण दो प्रकार के लोहे होते हैं एक ठंडा एक गर्म कभी सोचा है लोह का लोहे को लोहे से ही काटता है परंतु सदैव ठंडा लोहा ही गर्म लोहे को काट पाता है और यही नीति मनुष्यों पर भी लागू होती है जब युद्ध होता है तो जिसके मन में ईर्षा होती चलन होती आक्रोश होता है वह गर्म लोहे के समान और जिसका मन शांत होता है जिसका मन संयम से बंधा होता है वह ठंडे लोहे के समान और वही ईर्षा और द्वेष नामक गर्म लोहे को काट सकता है इसलिए यदि जीवन के संग्राम में विजय प्राप्त करनी तो अपने मन को शांत रखे क्योंकि गर्म लोहे की भाति ईर्षा और क्रोध जैसे भाव को रखने वाला मनुष्य सदैव शांत स्वभाव के मनुष्य के समक्ष निर्बल है शक्ति ईर्षा और क्रोध में नहीं शांति और संयम में है द्वारका में जो घटित हुआ वोह केवल दुर्योधन और अर्जुन ही जानते हैं दुर्योधन को केवल आपने भ्रम दिया और शक्ति दी अर्जुन को नारायणी सेना को चुनना दुर्योधन का चुनाव था मैंने तो उसे केवल विकल्प दि अब दुर्योधन ने क्या चुना यह तो उसका निर्णय इसमें मैं क्या कर सकता था आप जो कर सकते थे आपने किया माधव और उसका परिणाम वही हुआ जो आप चाहते थे यदि आप पक्षपाती नहीं होते तो अर्जुन को देखते ही आप उससे पूछते हैं कि वो युधिष्ठिर के व क्या कर रहा [संगीत] है परंतु आपने ऐसा नहीं किया यदि तुम दुर्योधन के चुनाव पर निराश तो खेल मैंने नहीं उसके दम उसके लालच उसके अहंकार ने खेला है आप भी भली बाती जानते हैं कि दुर्योधन युधिष्ठिर से कहीं अधिक सक्षम शासक है इस समय भारत को शासक की नहीं धर्म की आवश्यकता है धर्मराज की आवश्यकता है फिर मैंने तुम्हारे तथाकथित सक्षम शासक को विकल्प य मित्र जो विकल्प चुनने में ही चूक गया वह कैसा सक्षम शासक मित्र और मेरे विकल्प का आपने मुझे विकल्प क्यों नहीं दिया कौरवों और पांडवों के [संगीत] मध्य आपने मुझे क्यों छोड़ दिया क्या आपकी दृष्टि में मेरा कोई महत्व नहीं कि मैंने तो सदैव तुम्हें विकल्प दिए मित्र अब तुमने ही मुझे नहीं चुना तो उसके लिए तुम स्वयं उत्तरदाई मैंने तो वर्षों पहले तुम्हारा सार्थी बनना स्वीकार किया था मित्र परंतु तुमने ही अलग मार्ग चुना मैं तुम्हें सदा धर्म के लिए लड़ते देखना चाहता था परंतु तुमने सदैव दुर्योधन के छल का साथ [संगीत] दिया परंतु अब भी कुछ नहीं बिगड़ तुम्हारे लिए अब भी अवसर शेष है मित्र तुम मनुष्य श्रेष्ठ परंतु अनुचित स्थान पर उचित स्थान का चुनाव करो विकल्प नहीं है माधव और यदि आप इसी को विकल्प कहते हैं तो आप ऐसा विकल्प मुझे अनेक बार दे चुके और मैंने सदा आपसे कहा ऐसा संभव नहीं है मुझे इस बात का खेद रहेगा आप मेरे साथ नहीं होंगे परतु य खेद में अपने मित्र को नहीं होने दूंगा जिस मित्र ने मुझ पर विश्वास किया आप अपना धर्म निभाए और मैं अपना ऋण चुकाऊंगा [संगीत] वासुदेव युद्ध में भेट होगी प्रणिपात वासुदेव [संगीत] मस् ह नहीं मित्र युद्ध से पूर्व हमारी भेंट होगी और मैं तुम्हें एक और अवसर दू तुम्हें आभास कराऊंगा कि जितना सम्मान तुम्हें चाहिए उसे कहीं अधिक सम्मान के योग्य हो तुम अगली भेंट में तुम्हारी वास्तविकता से भेंट करवाऊं मित्र तुम्हे ज्ञात होगा कि तुम वास्तव में कौन हो आशा है कि उस दिन तुम उचित विकल्प चुनो के [संगीत] मि श्री [संगीत] कहां थे तुम मैं कब से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूं बताओ क्या हुआ द्वारका में और उस छलिए के रहते तुमने नारायणी सेना को कैसे अध्यन किया आपने अब बैठिए तो बै अम आज तक आप अपनी चालों से मुझे आश्चर्य में डालते थे परंतु आज मैंने इतनी बड़ी विजय से आपको और सबको आश्चर्य में डाल [संगीत] दिया सब इतने प्रसन्न है मेरे इस ने से सवाय मेरे मित्र कण के समझ में नहीं आता उसे अभी भी ऐसा क्यों लगता है कि कि मुझे मुझे सेना को छोड़ के उसने हते कृष्ण को चुनना चाहिए [संगीत] था आज वासुदेव हमारे साथ है तो इसका सारा श्रे पांचाली को जाता है तुमने अर्जुन को ना भेजा होता तो कदाचित य संभव ना होता आपका मेरे प्रति इतना विश्वास मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है आर्य और मुझे भी पूर्ण विश्वास है कि आप हस्तिनापुर के लिए अधिक योग्य शासक सिद्ध हो अरे कोई कोई जाओ समझाओ बताओ उसे कि कितनी बड़ी भूल कर रहा है वो तो तुम कर रहे हो [संगीत] दुर्योधन आज पहली बार मैं कर्ण से सहमत हूं तुम्हें नारायणी सेना के स्थान पर कृष्ण को ही चुनना था यह क्या कर लिया तुमने अरे मैंने क्या किया मामा श्री उस उस कृष्ण ने वहां वचन दिया कि व युद्ध में अस्त्र नहीं उठाएगा तो फिर मैं नारायनी सेना को छोड़कर उस उसने हते कृष्ण को चुनकर क्या कर लेता अब हमारे विरुद्ध पूरी नारायणी सेना होगी जो हर प्रकार की ू रचना में निपुण है हमें अपने सैनिकों को श्रेष्ठ प्रशिक्षण देना होगा जब तक माधव हमारे साथ है नकल हमें किसी बात की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं यदि आज व हमारे पक्ष में होता तो पांडवों के लिए नहीं आज वह हमारे लिए रणनीति बनाता हमारे लिए उसका वास्तविक अस्त्र तो उसकी नीति ही है वो कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं है ना अरे महा मायावी है वो महा मायावी वो समय को अपने मुताबिक चलाना जानता है और इतना ही नहीं वो अपने पक्ष के अनुसार परिस्थितियां भी बदल देता है समझ गए इसीलिए हम आराम से चाहते थे कि पांडवों से कैसे अलग कर दिया जाए उस छलिए को परंतु तुमने इतना बड़ा अवसर गवा दिया क्या किया ये क्या कर दिया ये तुमने अरे समझ में नहीं आता है मुझे क्यों क्यों सब उस कृष्ण से इतना भेत है क्यों कुछ नहीं कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा वो अब उसकी उसकी सेना भी मेरे अधीन है कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा वो देखो दुर्योधन अब इस बात पर वाद विवाद करके समय व्यत करने से कोई लाभ नहीं जो हानि होनी थी वो तो हो चुकी अब इस हानी की भरपाई करने का समय आ गया है उचित कहा आर्य अब चाहे जो हो जाए कौरवों की पराजय निश्चित है क्योंकि यह धर्म युद्ध विजय धर्म की ही होगी और वासुदेव के हमारे पक्ष में आने के साथ-साथ न्याय और धन भी हमारे पक्ष में विजय हमारी होगी ये महाभारत भारत का नव निर्माण करत का नव निर्माण करें [संगीत] [संगीत] अच्छा हुआ क तुम आ गए हम तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे थे हां सभा का आरंभ में सबसे पूर्व महाराज राष्ट्र को राजकुमारी लक्ष्मणा के विवाह की बधाई देकर करना चाहता हूं बधाई हो महाराज और हां अत्यंत खेत के साथ मुझे यह भी कहना पड़ रहा है कि यह अंतिम शुभ अवसर था जिसमें सारे गुरुकुल ने भाग लिया हां क्या पता इस युद्ध के पश्चात कौन जीवित रहेगा और कौन नहीं स्पष्ट रूप से कहिए गंधा राज आपका तात्पर्य क्या है अब से पूर्व तो आपने इस प्रकार के विचार कभी प्रकट नहीं किए और अब जब दुर्योधन ने कृष्ण को ना चुनकर नारायणी सेना को चुना है तो अब इस प्रकार के विचार क्यों आपका प्रश्न उचित है महामहिम परंतु यदि मैं अपनी भूल स्वीकार भी करता हूं तो क्या वो भूल मैं सुधार सकता [संगीत] हूं क तुम्हारा इस विषय में क्या कहना है मेरा मानना है कि हमें वार्तालाप में समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए हमें अपनी सेना को प्रशिक्षण देकर उन्हें और शक्तिशाली बनाना [संगीत] होगा अपनी सेना में अधिक से अधिक महान योद्धाओं को एकत्रित करना होगा मेरा एक और मानना है कि हमें युद्ध के लिए तत्पर रहना [संगीत] चाहिए क्या तुम्ह भी य उपस्थित होने के लिए कहा गया हां बत मुझे पहरी ने निंद्रा से उठाकर संदेश दिया कि हमें शीघ्र ही यहां उपस्थित होना है परंतु क्यों और किसके आदेश पर यह आदेश मैंने दिया [संगीत] है [संगीत] पांचाली इतनी रात में तुम यह क्योंकि यह समय सोने का नहीं है धर्मराज जागने का [संगीत] है और जो बात मैं कहना चाहती हूं उसके लिए सूर्योदय की प्रतीक्षा नहीं कर सकती ऐसा क्या है [संगीत] [संगीत] पांचाली पांचाली तिथि [संगीत] कैसी यह व तिथि है आर्य जिस दिन हम कौरवों के विरुद्ध युद्ध आरंभ करेंगे यदि यह युद्ध हुआ तो कितने योद्धा और कितने सैनिक मारे जाएंगे महाराज इस तथ्य से सभा में उपस्थित सभी मनुष्य अवगत है हां यह भी तो हो सकता है कि हम में से किसी को युद्ध में जाने की आवश्यकता ना पड़े महामहिम जैसे पुराणों में मैंने पढ़ा है कि स्वयं भगवान भी अपने शत्रुओं को एक अंतिम अवसर देते हैं तो क्या हम अपने शत्रु को अंतिम अवसर नहीं दे सकते दे सकते हैं ना महामहिम गंधराज युद्ध होना निश्चित है और होकर ही रहेगा और इसकी उल्टी गिनती प्रारंभ हो चुकी है मैं तुम्हारे विचारों से सहमत नहीं हूं जितना असहमत मैं गंधार देश की सोच से हूं उतना ही असहमत मैं इस निष्कर्ष से हूं हर परिस्थिति में संधि युद्ध से श्रेष्ठ होती है हमें पांडवों से संधि वार्ता कर लेनी चाहिए युद्ध अभी प्रारंभ नहीं हुआ है महाराज हम इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं हमें पांडवों से शांति वार्ता करनी चाहिए [संगीत] मैं जानता हूं कि आप भी यह युद्ध रोकना चाहते हैं हम भी नहीं चाहते कि य युद्ध हो हमारा प्रयास है कि हस्तिनापुर के मस्तक पर इस महा विनाशी युद्ध का कलंक ना लगे ठीक है ता श्री यदि यह हस्तिनापुर के भविष्य का प्रश्न है तो हम अपने दूत को पांडवों के समक्ष भेजने की आज्ञा देते हैं हमें उन तक संदेश देना है कि हस्तिनापुर भी इस युद्ध के विरुद्ध है और युद्ध के अंतिम दिन मैं अपने अपमान का प्रतिशोध [संगीत] लूंगी जिस दिन दुर न [संगीत] का अंत होगा महाराज ऐसे ये मेरा अंतिम निर्णय है करण हमें अपनी ओर से एक प्रतिनिधि चुनना होगा क्या आपके मस्तिष्क में कोई नाम है महाराज [संगीत] [संगीत] संजय प्रणिपात 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