हरता श्री गणेशा श्री गणेशा [संगीत] श्री यह क्या कर दिया तुम दोनों ने गणेश कार्तिके का उत्त्सव ऐसे मनाया जाता है प्रतीत होता है आनंद और उत्साह में हमसे बहुत बड़ी भूल हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] गई होली ऐसे मनाई जाती [संगीत] है होली है होली है बुरा ना मानो होली है हर हर महादे महादेव होली के अवसर पर कार्तिकेय और गणेश के परिहास के उत्तर में मैं भी मिथ्या क्रोधित होकर परिहास कर रहा था किंतु प्रतीत होता है कैलाश वासियों को वैकुंठ की होली की छटा दिखाकर होली खेलना सिखाना [संगीत] [हंसी] होगा शिव गौरी संग होगी होरी कैलाश में शिव गौरी संग होगी होरी शिव शंभू क्यों गणेश क्यों कुमार कार्तिके बुरा ना मानो होली है शिव शंभु संग होग होरी कैलाश में शिव शंभू संग होगी होरी शिव शंभू संग होगी होरी कैलाश में शिव शंभू संग होगी होरी आपको होली और बसंत उत्सव की बहुत बहुत [संगीत] शुभकामनाए आपको भी देवी [संगीत] पार्वती होली की शुभकामनाए भ्राता [संगीत] नारायण आपको भी देवी पार्वती पुत्र कार्तिके गणेश इधर आओ तुम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] दोनों रंगोत्सव की तुम दोनों को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं और ढेर सार आशीष इस गुलाल का लाल रंग तो तुम्हारी शोभा और बढ़ा रहा है पुत्र गणेश गुलाल तो हम भी लगाएंगे मामी जी क्यों भैया हां अनुज किंतु चरणों [संगीत] पर मामा जी मामी जी रंगोत्सव के रंग स्वीकार कीजिए आप दोनों को [संगीत] प्रणाम गणेश रुको गणेश अभी तुम्हें होली के रंग दिखाता ह पकड़िए मुझे एक बार मेरे हाथ तो पड़ जाओ तुम नहीं आऊंगा प्रभु ब्रह्मदेव और माता सरस्वती पधार रहे हैं बस बस बस भैया अभी तो फूफा जी और बुआ जी का स्वागत करना है हमें चलिए ना लीजिए ब्रह्मदेव और देवी सरस्वती का भी आगमन हो चुका है परंतु देवराज इंद्र और अन्य देवगण कहां है अब तक पहुंच जाना चाहिए था उन्हें भी ऋषि दुर्वासा के समक्ष नहीं आने में य हमारी भलाई है क्या हुआ नाथ हम यहां रुक क्यों गए और आप आप सभी इतने चिंतित क्यों है देवी शज ऋषि दुर्वासा है जब अपने य क्रोध के आवेग में बहते हैं तो जब तक किसी को श्राप नहीं दे देते शांत नहीं होते इस में संभवत सबसे अंतिम में हमें ऋषि दुर्वासा ही मिलेंगे हां इस समय भी वो ध्यान में मगन है हमें कैलाश पर जाने के लिए उनके स्थान से होकर जाना [संगीत] पड़ेगा इसमें उनका ध्यान भंग हुआ तो वह अवश्य क्रोधित हो उठे और फिर हम सभी उनके श्राप के भागी बनी यदि हम उन्हें कारण बताएंगे तो वह अवश्य समझेंगे स्वामी श्राप क्यों [संगीत] देंगे नहीं देवी संज्ञा ऋषि दुर्वासा जब क्रोधित होते हैं तो कुछ नहीं समझते उन्होंने तो महादेव को भी शाप दे दिया महादेव को भी हां महादेव और माता पार्वती के विवाह के समय कैलाश में महादेव की बारात की तैयारी चल रही थी तभी ऋषि दुर्वासा अपनी माता अनुसया के साथ वहां पहुंचे और देवर्षि नारद की दृष्टि उन पर [संगीत] पड़ी ऋषि दुर्वासा माता अनसूया के साथ यहां प्रणाम माते प्रणाम देवर्षी प्रणाम ऋषिवर आप यहां यह कैसा प्रश्न है महर्षि मैं यहां अर्थात अर्थात मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि महादेव की बारात की धूमधाम कदाचित आपको भागी नहीं समझा आप माता अनसु या को यहां छोड़ने आए हैं तत्पश्चात आप पुनः प्रयाण करेंगे मां को छोड़ने आया हूं जी चला जाऊंगा सत्य वचन क्यों भला अब कैसे कहूं जिससे ऋषिवर को बुरा ना लगे क्योंकि इनका कोई विश्वास नहीं किसी भी बात पर क्रोधित होकर किसे भी श्राप दे दे इनको यहां से लौटा कैसे आप कहना क्या चाहते हैं देवर्षी मैं यहां से प्रस्थान क्यों करूं महादेव माता पार्वती से विवाह करने जा रहे हैं यह भव्य और दिव्य दृश्य देखने से हम वंचित क्यों रह जाए देवर्ष कदाचित आप इनको लेकर सशंकित है कि कहीं दुर्वासा अपना नियंत्रण ना खो बैठे क्रोधित होकर किसी को श्राप ना दे दे किंतु आप निश्चिंत रहिए हमारे पुत्र ने हमें वचन दिया है कि महादेव के विवाह के समय वह क्रोधित कदापि नहीं हो ऋषि दुर्वासा का क्रोध तो विख्यात है किंतु उन्होंने अपनी माता को वचन दिया है तो देवऋषि माता अनुसया का अनुरोध कैसे टाल सकते थे तो उन्होंने ऋषि दुर्वासा को रोका नहीं उन्होंने नंदी से माता अनुसया को स्त्रियों के विशेष कक्ष में ले जाने के लिए कहा और स्वयं ऋषि दुर्वासा को महादेव के पास ले गए आइए ऋषिवर आ [संगीत] मुझे जाने दो मुझे देव के दर्शन करने [संगीत] हैं महादेव के ये गण मुझे उनसे मिलने नहीं दे रहे हैं मुझे मार्ग दो मुझे महादेव के निकट जाना है बस बस एक ऋषि के साथ ऐसा दुर्व्यवहार तुम सब गण प्रेत होकर मुझे महादेव के पास पहुंचने के लिए आगे नहीं बढ़ने दे रहे हो और मेरे ऊपर गिर रहे हो जाओ मैं तुम सब गणों को शाप देता हूं जब तुम सब बारात लेकर महाराज हिम वान के द्वार पर पहुंचो ग तो कन्या पक्ष के लोग तुम्हें देखते ही अपनी चेतना खो [संगीत] बैठेंगे और महादेव आप आप शांत बैठे यह सब होते हुए देख रहे हैं अर्थात आपको मेरा अपमान स्वीकार है तो मैं आपको वि श्राप देता हूं कि आपका इस रूप में देवी पार्वती के साथ विवाह कदापि संभव नहीं हो सकेगा ऋषि [प्रशंसा] दुर्वासा [संगीत] ऋषि दुर्वासा आपकी उपस्थिति मात्र से मुझे आभास हुआ था कि अवश्य यहां कोई अघ घटना घटने वाली है महादेव के विवाह के दिन है उन्हें दे दिया श्राप ऐसे ही है आप क्षण भर भी विचार मात्र नहीं किया कि कितनी कठिनाई पश्चात शिवजी तैयार हुए हैं इस विवाह के लिए यह यह क्या हो गया मुझसे ऋषिवर महादेव के विवाह के लिए उनके माता पार्वती से मिलन के लिए अत्यंत प्रसन्न थे हम सभी ग इसीलिए महादेव को उपहार रहे थे नाच गा रहे थे एक गण आपसे टकरा क्या गया आपने स्वयं महादेव को श्राप दे [संगीत] दिया यह तो उचित नहीं हुआ अपनी माता को वचन दिया था आपने ऋषि दुर्वासा कि आप नियंत्रण रखेंगे अपने क्रोध पर तत्पश्चात आपने वचन भंग किया अर्थात विनय भंग किया अर्थात स्वयं आपने अपनी माता का अपमान किया यह मैंने क्या कर दिया अपनी माता को दिए हुए वचन की भी लाज नहीं रखी मैंने जो हुआ है वह विधि के विधान के अनुसार ही हुआ [संगीत] है मेरा क्रोध विध का विधान कैसे अर्थात महादेव का विवाह देवी पार्वती से इस रूप में नहीं अभी तो उनके मनोरम रूप में ही होना नियती [संगीत] है हर हर महादेव हर हर महादेव सज लगाए और जब महादेव की बारात महाराज हिबान के द्वार पर पहुंची तो देवी मैना महादेव के जटाधारी रूप और उनके अस्तव्यस्त दिखने वाले कणों को देखकर अचेत रह गई तब महादेव ने अपना मनोरम रूप धारण [संगीत] किया [संगीत] प्रभु आपके इतने भव्य मनोरम दर्शन पाकर मैं तो धन्य हो [प्रशंसा] गया अब आपको ज्ञात हुआ देवी शची हम सब क्यों रुक गए क्यों हम सब ऋषि दुर्वासा के स्थान को पार करने के लिए इतने भयभीत सत्य है ऋषि दुर्वासा का क्रोध तो भयंकर है इन ऋषि का अपने क्रोध पर कोई नियंत्रण नहीं हमारा सावधान रहना ही उचित [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है किंतु इंद्रदेव हमें शीघ्र कुछ करना होगा वहां कैलाश में होली के रंगोत्सव में सब हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे तुम संपूर्ण दिवस यहां खड़े नहीं रह [संगीत] [संगीत] सकते [संगीत] [संगीत] आप सभी अपने अपने स्थान पर स्थिर रहिए बिलकुल मत लिए [संगीत] प्रतीत होता श्वर पुनः ध्यान में चले गए शीघ्र तक कीजिए और चलिए यहा से हमें शीघ्र कैलाश पहुंचना [संगीत] होगा [संगीत] रुकिए आप [संगीत] सभी नहीं यह उचित नहीं हुआ ऋषिवर का ध्यान भंग हो ही गया अब क रिवर के मुख से हमारे लिए श्राप ना निकल [संगीत] [संगीत] जाए [संगीत] [संगीत] [संगीत] ध श्वर के मुख पर तो क्रोध छाया है अब इनके शप से कोई हमारी रक्षा नहीं कर सकता आपको क्या लगा आप मेरे तप स्थल से आगे बढ़ जाएंगे और मुझे ज्ञात भी नहीं होगा प्रणाम ऋषि दुर्वा सा मेरा विश्वास कीजिए आपके ध्यान में व्यवधान डालने का हमारा कोई उद्देश्य नहीं था वो तो हम यहां से जाने के लिए विवश थे उस पर हम बाद में विचार करेंगे सर्वप्रथम यह बताइए समस्त देवी देवताओं की टोली जा कहां रही है हम सब कैलाश जा रहे हैं कैलाश अर्थात मेरी माता जगत जननी का निवास [संगीत] ऋषिवर कैलाश में वसंत उत्सव होली मनाई जा रही है इसीलिए महादेव देवी पार्वती कुमार कार्तिके और प्रथम पूज्य श्री गणेश जी ने हमें उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है ऋषिवन यदि हमारे कारण आपकी तपस्या भंग हुई हो तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी किंतु कैलाश जाने के लिए हमें आपके स्थान से होकर जाना आवश्यक था हमने बहुत प्रयास किया कि हम आपके ध्यान में कोई बाधा ना डाले ऋषिवर क्रोध को शांत कर हमें कैलाश जाने की अनुमति दे महादेव और माता पार्वती को अधिक प्रतीक्षा करवाना उचित नहीं [संगीत] होगा उचित है जाइए [संगीत] आश्चर्य सुरक्षित है हम ऋषि दुर्वासा का क्रोध फूटा नहीं ऋषिवर आपका कोटि कोटि धन्यवाद आपका कोटि कोटि [संगीत] धन्यवाद शीघ्रता कीजिए और चलिए यहां से हमें शीघ्र लाश पहुंचना होगा कैलाश में वसंत उत्सव होली मनाई जा रही है इसीलिए महादेव देवी पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश जी ने हमें उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है कैलाश में वसंत उत्सव होली मनाई जा रही है हमें उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है आज महादेव और माता पार्वती के दर्शन करने की बड़ी प्रबल इच्छा हो रही है कैलाश जाना चाहिए मुझे एक ही समय में दो विपरीत परिस्थिति आ सकती है हमें धैर्य पूर्वक उसका सामना करना चाहिए
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