महाभारत वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की ज वासुदेव कृष्ण की ज वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जयद कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की जय वासुदेव कृष्ण की [संगीत] जय देवकी नंदन वासुदेव श्री कृष्ण पधार रहे [संगीत] हस्तिनापुर में आपका स्वागत है वासुदेव पधार [संगीत] हे शांति दूत वासुदेव कृष्ण मेरी ओर से स्नेह की यह भट स्वीकार करें [संगीत] हे महाराज आपने यह भेंट देकर मेरा मान बढ़ाया है परंतु इसके बदले में आपको देने के लिए मेरे पास शांति के अतिरिक्त और कुछ नहीं है पहले तनिक विश्राम कर लो वासुदेव ताकि यात्रा की थकन मिट जाए जो आया पितामह पुत्र दुशासन जी वासुदेव को अपने भवन में ले जाओ जो आज्ञा नहीं पिता श्री पहले मैं अपने भवन में ले जाऊंगा और भोजन के पश्चात फिर दुशासन इन्ह भले ही अपने भवन में ले जाए नहीं युवराज भोजन केवल दो स्थानों पर किया जाता है या तो अपने अतिथ के निवास स्थान पर या फिर अपने मित्र के निवास स्थान पर और ना आप मेरे अतिथ हैं और ना ही मित्र इसलिए मैं महात्मा विदुर जी के घर जाऊंगा वहां कुंती बुआ भी है आज्ञा महाराज आइए विदुर जी आइए [संगीत] वासुदेव आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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