Wednesday, 31 December 2025

बाली का उद्देश्य हनुमान को ज्ञात हुआ Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 296 Pen Bhakti

[संगीत] किष्किंधा के सेना सुमेरू में क्या कर रही है सुग्रीव भैया वाली भैया से मुझे दूर क्यों करना चाहते थे मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा [संगीत] है पिता श्री पुत्र [संगीत] हनुमान पुत्र हनुमान तुम्हारे आलिंगन से सुखद मेरे लिए क्या हो सकता [संगीत] है मंगल कर घर हनुमन पिता मिलन आनंदित उन मन गृह आगमन महा सुखारी नेत्र मुदित निज लाल निहारी मात पिता से मिलन सुयोग प्रेम प्रबल ममता कर योग भरि आए जल व्याकुल नैन मन प्रबोध नहीं नि करत बैन पिता श्री मेरे लिए भी आपके साथ से अधिक बहुमूल्य और कुछ भी नहीं [संगीत] है [संगीत] हनुमान पिताश्री किष्किंधा के कोक जी यहां क्यों उपस्थित है और उनकी सेना भी दिख रही है पिताश्री जब मैं प्रवाल द्वीप से लौट रहा था तो वाली भैया मुझे मार्ग में मिले थे बड़ा ही विचित्र सा व्यवहार कर रहे थे मेरी शक्ति परखने के लिए ने अनेकों वार किए मुझ पर तब सुग्रीव भई आए उन्होंने शीघ्र ही मुझे यहां आने के लिए कहा महाराज वाली तुम्हारी शक्ति परख नहीं रहे थे वह तुम्हारा वध करने के लिए तुम पर वार कर रहे थे हमारे यहां किष्किंधा की सेना का सुमेरू में होने का एकमात्र उद्देश्य है सुमेरू को किष्किंधा के अधीन करना यदि सुमेरू ने महाराज वाली की अधीनता स्वीकार नहीं की तो किष्किंधा की सेना सुमेरू पर आक्रमण कर देगी तुम्हारा भविष्य तो निश्चित है महाराज बाली के हाथों तुम्हारी मृत्यु होगी वो तुम्हें जीवित नहीं छोड़ेंगे [संगीत] हनुमान मर्कट मैं तुम्हें जीवित नहीं छोडूंगा तुम मुझसे कितना भी दूर भाग लो परंतु मैं तुम्हें ढूंढ निकालू आ रहा हूं मैं सुमेरू और यदि तुम भी सुमेरू में हो तो मैं भी वही आकर तुम्हारा बध कर दूंगा ककट जी अवश्य ही वाली भैया परिहास कर रहे होंगे वो ऐसा कदा नहीं कर सकते सत्य क्या है तुम्हें ज्ञात नहीं है हनुमान बस को कट हनुमान को ज्ञात कराने की कोई आवश्यकता नहीं महारानी अंजना कोक हनुमान मां मां मां मेरा [संगीत] लाल [संगीत] [संगीत] कितने निष्ठुर हो तुम तुम्हें ज्ञात है ना तुम्हारी मां तुम्हारे बिना नहीं रह सकती [संगीत] फिर भी तुमने संदेशा तक नहीं भिजवाया अपनी कुशलता का मां आपकी बिना तो हनुमान भी नहीं रह सकता यदि मेरा बस चले तो मैं आपके आंचल से कहीं भी दूर नहीं जाऊ मेरे [संगीत] लाल अरे इतने दुर्बल दिखाई दे रहे हो प्रतीत होता है भोजन नहीं किया तुमने इतने दिनों नहीं मां यह तो आपकी ममता भरी दृष्टि को लग रहा है कि मैं दुर्बल हो गया हूं किंतु जैसा हनुमान पहले था वैसा ही है बस बस चलो आज मैं तुम्ह अपने हाथों से भोजन बनाकर खिलाऊंगी तुम पहले जाओ और स्नान करलो आज तो बड़ा ही आनंद आएगा मां बनाएंगी पकवान जी भर खाएगा हनुमान मां बनाएंगी पकवान मन भर खाएगा हनुमान मैं जानती हूं आप सबके लिए मेरा पुत्र एक योद्धा है रक्षक है संकट मोचन है सुमेरू का युवराज है किंतु एक मां के हृदय से पूछी उसके लिए तो व अब भी उसका नन्हा सा पुत्र ही [संगीत] है हनुमान सदैव जगत के कल्याण के लिए अपनी मां से दूर रहता है उसे अपनी माता से मिलने का अवसर बहुत कम प्राप्त होता है अत हनुमान को उसकी मां के साथ रहने दे उसे इस प्रकरण से दूर [संगीत] रखें आज हनुमान बहुत दिन पश्चात अपनी मां के पास लौट कर आया [संगीत] है य मां अपने एक मातृ पुत्र पर अपनी ममता अपना स्नेह लुटाना चाहती इसीलिए हनुमान को इस राजनीति दूर ही रखिए इस मां पर बड़ी कृपा होगी आप [संगीत] सबकी मां की ममता ऐसी ही होती है भले ही पुत्र जगत के संकट हरने वाले संकट मोचन महाबली हनुमान ही क्यों ना हो मां की दृष्टि में तो पुत्र सदैव अबोध बालक ही होता है पुत्र भले ही बड़ा हो जाए किंतु मां का निस्वार्थ प्रेम पुत्र की कुशलता की चिंता सदैव ऐसे ही बनी रहती है जैसे बाल्यकाल में बनी रहती थी मां की यही कभी ना क्षय होने वाली ममता उन्हें देवताओं से भी उच्च स्थान पर स्थित करती है अतः कभी मां का अनादर नहीं करना चाहिए जप तप व्रत से अवश्य पुण्य मिलता है परंतु उससे भी अधिक पुण्य मिलता है मां की सेवा से खीर तैयार हो गई हो रही है महारानी जी सुगंध तो बहुत अच्छी आ रही है इसमें मैं थोड़ा और मीवा डाल देती हूं अच्छा अब इसे कुछ क्षण तक ऐसे ही चलाते हैं और फिर शीतल करने के लिए रख देना ठीक है जी अरे अरे लड्डू नहीं बने अभी तक शीघ्रता से हाथ चलाओ हनुमान स्नान करके आता ही होगा उसके आने से पूर्व लड्डू बन जाने चाहिए चलो मैं भी मदद करती हूं आज इतने दिनों पश्चात हनुमान मेरे हाथ के बने हुए लड्डू [संगीत] खाएगा अरे यह आम फल ऐसे क्यों पड़े हैं इनका आम रस कब बनाओगी तुम चलो शीघ्रता से बनाओ आप चिंता मत कीजिए महारानी जी आमरस में बना दूंगी अंजना रस मैं लूंगी हनुमान स्नान कर चुका होगा तुम जाओ उससे जाकर सज्जित करो बालकों को अपनी मां के हाथों से सज्जित होने में बड़ा आनंद आता [संगीत] है जी [संगीत] मां मां हनुमान के आते ही निष्प्रभ वन में चैतन्य सी आ जाती है उमंग और उल्लास छा जाता है हां माजर का और अंजना का उल्लास तो देखने योग्य होता है आशा है इस बार अंजना को अनुमान पर अपनी ममता लुटाने के लिए अधिक समय मिल जाए निश्चित निश्चित ही वह मर्कट सुमेरू गया होगा परंतु मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं [संगीत] इतनी शक्ति वाली भैया में पूरी गुफा ही ढह गई वह सुमेरो की दिशा में गए हैं कहीं कुछ अनर्थ ना कर दे मेरा उन्हें रोकना आवश्यक [संगीत] है [संगीत] [संगीत] हम आहा कैसी सुगंध भोजन की नहीं मेरी मां के हाथ के बनाए हुए भोजन की सुगंध मां अब तो एक क्षण भी नहीं रुका जाता बहुत भूख लगी है अभी भोजन परोस [संगीत] हूं कहां गया [संगीत] भोजन हम तुमने किया [संगीत] ना मां हनुमान से रहा नहीं जा रहा था इतने दिनों के पश्चात आपके हाथ से बनाया हुआ भोजन जो मिलने वाला था कहां है सारा [प्रशंसा] [संगीत] भोजन [संगीत] सखा [संगीत] क्या हुआ हनुमान भोजन आरंभ करो [संगीत] पुत्र [संगीत] यह पहला ग्रास चिड़िया का आनंद अति आनंद मां यह द्वितीय ग्रास गैया का गौरी की गैया का मां आपके यह स्नेह भरे स्पर्श से भोजन अमृत बन जाता है स्वर्ग के दिव्य भोजन में भी ऐसा आनंद कहां जो इस भोजन में है और यह ग्रास मां के लिए हन का और यह ग्रास हनुमान के लिए मां [संगीत] का ये क्या हो रहा हैली अ यहां [संगीत] हां [संगीत] यह धरती में कैसा बकप हुआ सर पर राज मुकुट राज सिंहासन पर आसीन काका केसरी जी इसका अर्थ यह हुआ कि मुझ महानतम वाली के आदेश की अवज्ञा हुई है आपके सुमेरू की राजसभा में काका केसरी जी मेरी अधीनता स्वीकार नहीं की आपने या सुगरी को अधीनता स्वीकार कराना आया ही नहीं बोली काका केसरी जी स्वर मध्यम और कहां है वह भीरू सुग्रीव और आपका पुत्र हनुमान जो मुझ महानतम वाली के भय से भाग कर यहां कहीं छुपने आ गया होगा मां अवश्य ही कोई अनहोनी घटी है मां मैं अभी जाकर देखता हूं किंतु हनुमान कहां छुपकर बैठा है हनुमान और वो सुग्रीव जिसके लिए उस हनुमान की मित्र मुझ महानतम वाली के आदेश से भी बड़ी हो गई है ऐसा नहीं है भैया वाली भैया मैं तो आपको समझाना चाहता था कि अपनों से वैर अपना ही वि मुझ महानतम वाली के आदेश का उल्लंघन कर कर मुझे ही समझाओ ग तुम यह इतना साहस आया कहां से तुम में भैया मैं तो मेरे आदेश की अवहेलना करने का दंड मिलेगा तुम्हें [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान

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