Sunday, 28 December 2025

द्रौपदी ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया GautamRode Suryaputra Karn Episode 228 PenBhakti

[संगीत] हमने एक बात अपने माता-पिता अपने बड़ों से अपने बुजुर्गों से सुनी ही होगी कि संगति का प्रभाव मनुष्य पर पड़ता ही है यदि वर्षा की एक बूंद सीप के मुख में जाए तो वह मोती बन जाती है और यदि वही वर्षा की एक बूंद सर्प के मुख में जाए तो विष तो क्या यही सत्य [संगीत] है नहीं आपने कभी चंदन के वृक्ष को देखा है उस पर सर्प विचरण करते हैं विषधर उससे लिपटे रहते हैं परंतु फिर भी चंदन का वृक्ष विषैला नहीं होता वह तब भी सुगंध देता है और पवित्र माना जाता है तो इसका रहस्य क्या है कि वर्षा की बूंद पर संगति का प्रभाव पड़ता है और चंदन के वृक्ष पर नहीं इसका रहस्य है आत्म बल वर्षा की बूंद वातावरण के अनुसार स्वयं को बदल लेती है इसीलिए उसकी संगति ही उसका प्रारब्ध बन जाती परंतु चंदन का वृक्ष अपना व्यक्तित्व अपना गुण नहीं खोता इसीलिए यदि आप में आत्म बल आपका मन दण हो तो बुरी से बुरी कुसंगति भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ [संगीत] सकती महाराज राष् का जेष्ठ पुत्र दुर्योधन आपको आपके कर्तव्य से मुक्त करता हूं बता है क्यों पिता क्योंकि आपसे कहीं अधिक विश्वास मुझे मेरे मित्र कण पर है उसकी प्रबलता पर है क्योंकि आपका हृदय तो सदैव पांडवों के हित में ही सोचता आया है और मैं सेनापति को अपनी समस्त सेना का उत्तर दायित्व नहीं दे सकता जो शत्रु तुहे सोचता हो यदि कण इस युद्ध में भाग नहीं ले सकता तो आप भी इस युद्ध में भाग नहीं लेंगे यदि तुम्हारा यह निर्णय है दुर्योधन तो यही सही मैं स्वयं को इस युद्ध से विरक्त घोषित करता हूं मुझे आपकी आवश्यकता नहीं दुर्योधन ये क्या कह रहे हो तुम मूर्खता मत करो और मित्रता की मोह में नेत्रहीन ना बनो दुर्योधन हमें कण से अधिक पितामह की आवश्यकता है समझ गए तुम मैंने आपसे सुझाव मांगा मांगा तो जाइए और जाकर अपना स्थान ग्रहण कीजिए मुझे याद है कि मैं क्या कर रहा हूं [संगीत] जा नहीं माई युवराज ने जो कहा क्रोध में आकर कहा इस विषय में उनसे बात करूंगा सब ठीक हो जाएगा मा नहीं कते करण अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता मेरी बात सुनिए माही मुझे एक सूत पुत्र की बात नहीं सुननी [संगीत] कुरुक्षेत्र में तुम्हारे विरुद्ध खड़ा प्रत्येक योद्धा तुम्हारा शत्रु है पा जिसका तुम्हें वध करना है अन्यथा आज तुम भीष्म से भयभीत हो कल तुम कर्ण से हो परसों तुम यह कहोगे कि मैं आचार्य द्रोण का सामना कैसे करू यदि ऐसा ही रहा तो कैसे पूर्ण करोगे अपने साथ हुए अन्याय का प्रतिकार कैसे लोगे पांचाली के अपमान का प्रतिशोध क्या बात है आरे बड़ी गहन सोच में डूबे हुए हैं कोई समस्या है समस्या क्या है मैं नहीं जानता परंतु एक विचित्र भय की अनुभूति हो रही है [संगीत] मुझे मन मन बड़ी दुविधा में है कैसा भ और कैसी [संगीत] अनुभूति मैं और मेरा मन इस दुविधा में है [संगीत] कि क्या यह युद्ध उचित है क्या अपनों का वद करना आवश्यक [संगीत] है मन में संशय है कहीं हमको अनर्थ तो नहीं करने जा रहे अनर्थ तो उन्होंने किया था आर्य भूल गए लक्ष आग्रह भूल गए वो द्यूत सभा भूल गए मेरा चीर हरण करने का प्रयास वो वनवास अज्ञात वा स्मरण नहीं आपको यह अनर्थ नहीं अभी त इस समय का सबसे अर्थवा कार्य है [संगीत] आर [संगीत] यह धर्म युद्ध उनके विरुद्ध जिन्होंने अधर्म किया और उनके विरुद्ध जो मौन रहकर इस अधर्म के साक्षी बने य एक प्रयास है आर आने वाली पीढ़ियों के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करने का कि जो अधर्म करता है और जो चुप रहकर उसे होते हुए देखता है व दोनों ही नाश के भागी है आप अनावश्यक रूप से स्वयं के मन पर बोझ डाल रहे हैं आर आप योद्धा है और यह महायुद्ध आपके जीवन का लक्ष्य आपका कर्तव्य और आपका धर्म धर्म अपने पितामह पर शस्त्र उठाना कैसा धर्म है गुरु का व करना कैसा कर्तव्य विराट युद्ध में जब यही लोग आपके विरुद्ध धनुष बां आने खड़े थे तो क्या यह उनका कर्तव्य था प्रतिज्ञा से बंदे होने का बहाना बनाकर अपनी कुल वधु की लाज लुटते हुए देखना क्याय उनका धर्म था और ये मत भूलिए आर्य आचार्य द्रोण ने अपना प्रतिशोध पूरा करने के लिए पिता श्री के विरुद्ध आप सबको युद्ध में झोक दिया था आप तो अधर्म का प्रतिकार ले रहे [संगीत] हैं कहीं ऐसा तो नहीं आरे कि आपको ऐसा लग रहा है कि जो कुछ भी उन्होंने किया वो वो धर्म था उचित था नहीं पांचाली नहीं [संगीत] जो उन्होंने किया वह सर्वथा अनुचित था परंतु मन में दुविधा यह है कि जो हम करने जा रहे हैं वह उचित है यदि हम भी उनकी भाषा में उन्हें उत्तर देंगे तो फिर हम में और उन में क्या अंतर रह जाएगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ आप थक गए हैं आर विश्राम कीजिए सो जाए सो जाओ कैसे सो जाऊं पांचाली जबक मुझे ज्ञात है कि कल प्रातः मुझे बन संधान करने हैं जो मेरे परिजनों को मृत्यु की नींद सुला देंगे तो कैसे सो जाऊ मैं [संगीत] कैसे [संगीत] साम दाम दंड भेदन अमाम विजयम निश्चित साम दाम दंड भेदन अमाम विजय निश्चित कहा कैसे होगा अपने मित्रता के भावेश में बहकर तुम बहुत बड़ी भूल कर रहे हो दुर्योधन बहुत बड़ी भूल अंगराज वो कण नहीं जिसे अस्त्र बनाकर तुम पांडवों पर प्रयोग करना चाहते थे नास सारी शक्ति उसके कवच और कुंडल में थी जो अब नहीं है जिसके जाते ही कण केवल और केवल मात्र एक साधारण योद्धा और एक साधारण धनुर्धारी रह गया है दुर्योधन और ऐसे व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति को तुम प्रधान सेनापति बनाना चाहते हो कौरवों की वास्तविक शक्ति इच्छा मृत्यु के वरदान धारी महा मही भीष्म है ना कि वो कवच हीन सूत पुत्र कण मैं जानता हूं मैं जानता हूं कि तुम्हें तुम्हें बहुत बुरा लगता है बहुत बुरा लगता है जानता हूं मैं परंतु एक बार एक बार अपने मन से पूछो अपने मन से पूछो एक बार उत्तर यही मिलेगा कि वो सुपुत्र कण कुंती और उसके पुत्रों के लिए कोमल भाव रखता है कोमल भाव स्मरण करो कि किस प्रकार उसने हमारी हर चाल में बाधा डालने का प्रयास किया है दुर्योधन चाहे व दध सभा हो या विराट युध हा या फिर तुम्हारे जीजा श्री जयद्रथ का अपमान कण सदैव उन पांडवों के पक्ष में रहा है द्रोही है वो अपने मन को टटोलो दुर्योधन उत्तर मिल जाएगा तुम्ह विश्वास ती है तुम्हारा मित्र क विश्वास [संगीत] घाती य क्या क्या कर रहे हो कुछ मैंने अपने मन को टटोल कर देखा तो स्वर से यह आया कि मेरा मित्र कण पूर्ण रूप निष्ठावान है एक और स्वर मन से निकला यदि मेरे मित्र कण के ऊपर कोई भी उंगली उठाए तो उसे तोड़ देना [संगीत] केवल इसलिए कि आप मेरे मामा श्री है बारबार मेरे धैर्य की परीक्षा लेने का अधिकार नहीं मिल जाता भविष्य में स्मरण रखना जब मैंने अपने ज बंदियों को क्षमा नहीं [संगीत] किया उन्हे पांच कावना दे कर इस इस महायुद्ध का आवाहन कर दिया तो आपका नाश करने में मुझे एक श भी नहीं [संगीत] लगेगा इसलिए स्मरण रखना ना तो फिर कभी मेरे धैर्य की परीक्षा लेना और ना ही मेरे मित्र कण के ऊपर आरोप [संगीत] [हंसी] लगाना [संगीत] वाह वा मेरे होने वाले सम्राट वाह आज तुमने उस सु पुत्र के कारण अपने अपने उस मामा का अपमान किया जो जो अपना सब कुछ त्याग कर तुम्हारे हित के लिए केवल तुम्हारे हित के लिए अपनी बहन के घर स्वान बनकर बैठ [संगीत] तुमने उस मामा का अपमान किया जिसने अपना शवास अपना ध्यान अपनी आस अपना अभ्यास सब कुछ नवर कर दिया अपने होने वाले सम्राट के लिए तुमने उस मामा का अपमान किया दुर्योधन जिसने साम दाम दंड भेद युक्ति कपट ल कु चक्र षड़यंत्र सबकी पराक कर दी क्यों अपने अपने होने वाले सम्राट के लिए और तुमने उस मामा का अपमान किया उसके लिए जिसने जिसने अपना कवच और कुंडल उन पांडवों को दन में दे दिया द दद मेरे होने वाले सम्राट सा नहीं पिताश्री मुझे महामहिम का निर्णय स्वीकार नहीं है मुझे तो युवराज दुर्योधन का संदेह उचित प्रतीत होता है हा अवश्य महामहिम उन पांडवों की सुरक्षा चाहते हैं और व जानते हैं कि जब तक आप युद्ध में उपस्थित रहेंगे तब तक पांडव सुरक्षित नहीं है [संगीत] तभी वो आपको युद्ध से दूर रखना चाहते [संगीत] हैं जानता हूं मैं यह [संगीत] [प्रशंसा] बात शांत हो जाओ पुत्र कैसे शांत हो जाऊं पिता इस समय कौरवों को सबसे अधिक आवश्यकता आपकी है ना कि महामहिम की यह एक योद्धा नहीं एक पुत्र बोल रहा [संगीत] है युद्ध में योद्धा के बल से अधिक अनुभव का बल काम आता है गंगापुत्र भीष्म को ऐसे ही मा महीन नहीं कहा जाता स्वयं गुरु परशुराम भी उन्हे परास्त नहीं कर पाए थे आओ मेरे साथ जब तुम भीतर आए थे तो बाहर कौन था सैनिक थे सहस्त्र सैनिक थे तो बताओ वो सारे सैनिक कहां चले [संगीत] गए हस्तिनापुर में चारों ओर यह सूचना फैल रही है कि मां महिम कौरव सेना का नेतृत्व नहीं करेंगे सारे सैनिक अपने अपने सेना नायकों के पास इस बात की पुष्टि करने के लिए गए हैं और यदि यह निश्चित हो गया मा मही कौरव सेना का नेतृत्व नहीं करेंगे यु से पूर्व ही पव का अधिकतम बल यु से विरक्त हो जाएगा यह सारे सैनिक अपने प्राण हथेली पर लेकर इसलिए लड़ते हैं क्योंकि इन्ह विश्वास है उनका सेनापति के प्राण व्यर्थ नहीं जाने देगा कि उनके जीवन के बदले में उन्हें विजय मिलेगी इसलिए पुत्र दुर्योधन को मेरे बदले मा महीन को चुनना चाहिए क्योंकि मां महिम के पास सेना का विश्वास [संगीत] है तो अब आप क्या करेंगे पिताश्री एक योद्धा होने के नाते अपने से महान योद्धा का सम्मान और वोह कार्य जो मेरे मित्र के हित में [संगीत] होगा

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